तब और आज : तस्वीरों में देखें आज़ादी से पहले और आज की दिल्ली 

Devanshu Mani TiwariDevanshu Mani Tiwari   17 Jan 2018 5:13 PM GMT

तब और आज : तस्वीरों में देखें आज़ादी से पहले और आज की दिल्ली गाँव कनेक्शन की सीरीज़ तब और आज का पहला भाग। 

भारत की आजादी के बाद हमारे शहरों, कस्बों और गाँवों में बहुत बदलाव हो चुका है। हमने गुमटियों की जगह शॉपिंग मॉल बनते देखे हैं और कच्ची सड़कों को हाईवे बनते हुए भी। शहरों को वाई-फाई से लैस होते हुए और गाँवों को हाईटेक होते हुए भी देखा है। आइए गाँव कनेक्शन की विशेष सीरीज़ 'तब और आज' में जानते हैं एेतिहासिक स्थानों से जुड़े इतिहास और वर्तमान के बारे में। सीरीज़ के पहले हिस्से में जानते हैं, देश की राजधानी 'दिल्ली' के बारे में -

दिल्ली तब और आज -

आज़ादी से पहले और आज की दिल्ली में बहुत कुछ बदल चुका है। आइये तस्वीरों में दिल्ली की कुछ जगहों को देखते हैं और जानते हैं कि वो पहले कैसी दिखती थी और आज वहां पर कितना कुछ बदल चुका है।

संसद भवन

दिल्ली का संसद भवन 1921-1928 के दौरान बनाया गया था। संसद भवन भारत के सबसे बड़े विधान-भवनों में से एक है, यह छह एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। वर्ष 1952 के संसद भवन और आज के संसद भवन के आस-पास काफी कुछ बदल चुका है।

वर्ष 1952 में कुछ ऐसा दिखता था संसद भवन।

क़ुतुब मीनार

दिल्ली की कुतुब मीनार को मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक ने अफ़गानिस्तान की जाम की मीनार से प्रेरित होकर साल 1193 बनवाया था। इसके बाद उनके उत्तराधिकारी इल्तुतमिश ने मीनार में तीन मंजिलों को और बढ़ाया। साल 1368 में फीरोजशाह तुगलक ने इस मीनार में पांचवीं मंजिल बनवाई। क़ुतुब मीनार आज दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है, एक समय पर इसके आस-पास सिर्फ जंगल ही जंगल थे।

सन् 1900 में ऐसी दिखती थी क़ुतुब मीनार।

इंडिया गेट

इंडिया गेट सन् 1924 में बनना शुरू हुआ। पहले इस रास्ते से रेलवे लाइन गुज़रती थी, जिसे किंग्सवे के नाम से भी जाना जाता था। सन् 1924 में ब्रिटिश सरकार ने इस रेलवे लाइन को इस रास्ते से हटाकर यमुना नदी के पास बनवाया। तभी से इंडिया गेट के निर्माण की शुरूआत हुई और इस रास्ते का नाम, राजपथ से जाना जाने लगा।

आज़ादी के पहले कुछ ऐसा दिखता था, इंडिया गेट।

लाल किला

लाल किला मुगल बादशाह शाहजहां ने 1639 में बनवाया था। लाल किला मुगल बादशाह शाहजहां की राजधानी, शाहजहांनाबाद का महल था। इसके बाद इस किले का विकास औरंगज़ेब ने भी करवाया।

वर्ष 1890 में जहां दिल्ली के लाल किले के आस-पास जंगल और खाली ज़मीने थी, वहीं आज इस इलाके में हर रोज़ लोगों की भीड़ रहती है।

कनॉट प्लेस

दिल्ली का सबसे बड़ा मर्केटिंग एरिया कनॉट प्लेस है। इसका नाम ड्यूक ऑफ कनॉट के नाम पर रखा गया था। इस मार्केट का डिजाइन डब्ल्यू एच निकोला किया था और यह जगह वर्ष 1933 में बनकर तैयार हो गई थी। उस समय यह मार्केट भारत की सबसे बड़ी मार्केट एरिया मानी जाती थी। आज भी खरीददारी के शौकीन मुख्यरूप से कनॉट प्लेस आते हैं। अब इस जगह को राजीव चौक के नाम से जाना जाता है।

वर्ष 1972 का कनॉट व्लेस और आज का कनॉट प्लेस।

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