फसल अवशेषों से बढ़ा सकते हैं खेत की उर्वरता

फसल अवशेषों से बढ़ा सकते हैं खेत की उर्वरतागाँव कनेक्शन

लखनऊ। ज्यादातर किसान फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन न करके उसे खेत में ही जला देते हैं या फिर ऐसे बर्बाद होने देते हैं। जबकि फसल अवशेषों से खाद बनाकर अपने खेत की उर्वरता बढ़ा सकते हैं।

आजकल अधिकतर किसान हार्वेस्टर से फसल की कटाई करते हैं, जिससे उन क्षेत्रों में फसल के तने का अधिकतर भाग खेत में ही रह जाता है। अधिकतर किसान खरीफ में धान की कटाई के बाद फसलों के अवशेष को उपयोग न करके उसको जला देते हैं। जिससे न तो फसल अवशेष काम का रह जाता है साथ ही खेत की मिट्टी की उर्वरता भी कम हो जाती है।

इनका उपयोग मृदा में जीवांश पदार्थ की मात्रा बढ़ाने के लिए नही किया जाता। इनका अधिकतर भाग या तो दूसरे घरेलू उपयोग में किया जाता है। या फिर इन्हें नष्ट कर दिया जाता है जैसे कि गेहूं, गन्ने की हरी पत्तियां, आलू, मूली, की पत्तियां पशुओं को खिलाने में उपयोग की जाती है या फिर फेंक दी जाती हैं। कपास, सनई, अरहर आदि के तने गन्ने की सूखी पत्तियां, धान का पुआल आदि सभी अधिकतर जलाने के काम में उपयोग कर लिए जाते हैं। इसी तरह गाँवों में पशुओं के गोबर का ज्यादातर भाग खाद बनाने के लिए प्रयोग न करते हुये इसे ईंधन के रूप में उपयोग किया जा रहा है। जबकि इसी गोबर को यदि गोबर गैस संयत्र में उपयोग करके गोबर की स्लरी प्राप्त कर उससे भी खाद बनाई जा सकती। गोबर गैस बनाने के लिए यूपी नेडा से गोबर गैस बनाने के लिए अनुदान भी दिया जाता है।

कैसे करे प्रबंधन

फसल अवशेषों का उचित प्रबन्ध करने के लिए आवश्यक है कि अवशेष (गन्ने की पत्तियों, गेहूं के डंठलों) को खेत में जलाने के बजाय उनसे कम्पोस्ट तैयार कर खेत में प्रयोग करना चाहिए। उन क्षेत्रों में जहां चारे की कमी नहीं होती वहां धान की पुआल को खेत में ढेर बनाकर खुला छोडऩे के बजाय गड्ढ़ों में कम्पोस्ट बनाकर उपयोग कर सकते हैं। आलू और मूंगफली जैसी फसलों को खुदाई कर बचे अवशेषों को भूमि में जोत कर मिला देना चाहिए। मूंग व उड़द की फसल में फलियां तोड़कर खेत में मिला देना चाहिए। इसी तरह केले की फसल के बचे अवशेषों से यदि कम्पोस्ट तैयार कर ली जाए तो उससे 1.87 प्रतिशत नाइट्रोजन 3.43 फीसदी फास्फोरस तथा 0.45 फीसदी पोटाश मिलता है।

खेत में अवशेष प्रबन्धन

फसल की कटाई के बाद खेत में बचे अवशेष घासफूस, पत्तियां व ठूंठ आदि को सड़ाने के लिए किसान फसल को काटने के बाद 20-25 किग्रा नाइट्रोजन प्रति हेक्टयर की दर से छिड़क कर कल्टीवेटर या रोटावेटर से मिट्टी में मिला देना चाहिए, इस प्रकार अवशेष खेत में विघटित होना प्रारम्भ कर देंगे। लगभग एक महीने में स्वयं सड़कर आगे बोई जाने वाली फसल को पोषक तत्व प्रदान कर देंगे क्योंकि कटाई के बाद दी गई नाइट्रोजन अवशेषों में सड़न की क्रिया को तेज कर देती है। अगर फसल अवशेष खेत में ही पड़े रहे तो फसल बोने पर जब नई फसल के पौधे छोटे रहते हैं तो वे पीले पड़ जाते हैं क्योंकि उस समय अवशेषों के सड़ने से जीवाणु भूमि की नाइट्रोजन का उपयोग कर लेते है और प्रारम्भ में फसल पीली पड़ जाती है इसलिए फसल अवशेषों का प्रबन्ध करना जरूरी है।

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