फूलों के व्यापार से चमकाएं किस्मत

फूलों के व्यापार से चमकाएं किस्मतगाँव कनेक्शन

भारत में फूल की खेती एक लंबे अरसे से होती रही है, लेकिन आर्थिक रूप से लाभदायक एक व्यवसाय के रूप में पुष्पों का उत्पादन पिछले कुछ वर्षों से ही शुरू हुआ है। समकालिक पुष्प जैसे गुलाब, कमल ग्लैडियोलस, रजनीगंधा, कार्नेशन आदि के बढ़ते उत्पादन से गुलदस्ते देने में इनका उपयोग काफ़ी बढ़ा है। फूलों को मनुष्य के द्वारा सजावट और औषधि के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसके अलावा घरों और कार्यालयों को सजाने में भी इनका उपयोग बहुतायत से होता है। मध्यम वर्ग के जीवनस्तर में सुधार और आर्थिक संपन्नता के कारण पुष्प बाज़ार के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

10 साल से फूलों का व्यापार कर रहे शहाबुददीन बताते हैं "शुरुआत में आप नए होते हैं इसलिए आपको फूलों के रेट और प्रजाितयों की ज्यादा समझ नहीं होती ऐसे में कोशिश करें किसी पुराने फूलों के व्यापारी के साथ कुछ महीनों के लिए लग जाएं जैसे ही आपको उनके रेट के और प्रजाितयों के बारे में अच्छी जानकारी हो जाए आप आपना अलग व्यापार कर लें। शुरुआत में ज्यादा पैसा न लगाए क्योंकि जितना ज्यादा पैसा उतना ज्यादा नुकसान होने का खतरा बना रहता है।"

शुरुआती परेशािनयां

शहाबुद्दीन बताते हैं "फूलों का व्यापार शुरू करने से पहले इस क्षेत्र से जुड़ी छोटी-छोटी बारीिकयों के बारे में पूरी जानकारी ले लेनी चाहिए।" व्यापार से जुड़ी क्या-क्या समस्या आपके सामने आ सकती है इसके बारे में बता रहे हैं शहाबुद्दीन-

  • व्यापार कोई भी हो शुरुआती वक्त मे थोड़ा सा परेशािनयों का सामना करना पड़ता है।
  • व्यापार में तो नफा और नुकसान लगा ही रहता है अगर नफा होता है तो नुकसान होने का खतरा भी बना रहता है।
  • कभी-कभी ऐसा होता है कि आप कोई माल महंगा खरीदते हो उसे सस्ते में ही देना पड़ता है।
  • कभी-कभी माल खराब हो जाता है। जिससे काफी नुकसान होता है।
  • अपनी पार्टी बनाने में बाहर-बाहर भटकना पड़ता है।
  • शुरुआती दौर में बहुत कठिन परिस्थितियों से होकर गुजरना पड़ता है।
  • और अगर आप उन परिस्थितियों से घबरा गए तो फूलों का व्यापार ही क्या किसी भी व्यापार में आप सफल नहीं हो पाएंगे।

फूलों की किस्में और पैदावर

शहाबुद्दीन बताते हैं "फूलों की किस्में पुष्प कृषि उत्पादों में मुख्यतया खुले पुष्प, पॉट प्लांट, कट फ़ोइलेज, सीड्स बल्बस, कंद, रुटेड़ कटिंग्स और सूखे फूल व पत्तियां सम्मिलित हैं। प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय पुष्प कृषि में खुले गुलाब के फूलों का व्यापार, लाली, गुलदाउदी, गारगेरा, ग्लेडियोलस, जाइसोफिला, लायस्ट्रिस, नेरिन, आर्किड, अर्किलिया, अन्थुरियम, ट्यूलिप और लिलि है। गारव्रेरास, गुलनार आदि फूलों की खेती ग्रीन हाऊस (हरित गृह) में की जाती है। खुले खेतों में उगाई जाने वाली फसल गुलदाउदी, गुलाब, गेल्लारड़िया, लिलि, मेरीगोल्ड, तारा, कंदाकार प्रमुख है।"

फूलों की पैदावार के लिए सबसे उपयुक्त समय सितंबर से मार्च तक है, लेकिन अक्टूबर से फरवरी का समय इस व्यवसाय के लिए वरदान है। फूलों की लगभग सभी प्रजातियों की बुवाई सितंबर-अक्तूबर में की जाती है। गुलाब और गेंदा हर प्रकार की मिट्टी में लगाए जा सकते हैं, परंतु दोमट, बलुआर या मटियार भूमि ज्यादा उपयोगी है। गुलाब की खेती कलम लगा कर की जाती है। उन्नत किस्म के बीज पूसा इंस्टीट्यूट या देश के किसी भी बड़े अनुसंधान केंद्र से प्राप्त किए जा सकते हैं। वैसे तो फूलों का कारोबार और पैदावार साल भर चलती है, पर जाड़ों में यह बढ़ जाती है।

सम्भावनाएं

फूलों की खेती के रूप में भी व्यापार की सर्वािधक सम्भावनाएं हैं क्योंिक खुशी से लेकर गम तक फूल एक महत्वपूर्ण भूिमका िनभाता है। ऐसे में फूलों की खेती भी आपके काफी काम आ सकती है। भारत में फूलों की खेती- जलवायु क्षेत्र है जो नाजुक और कोमल फूलों की खेती के लिए अनुकूल है। उदारीकरण के पश्चात के दशक के दो दौरान पुष्पकृषि ने निर्यात के क्षेत्र में विशाल कदम रखा है। इस युग में सतत उत्पादन के स्थान पर वाणिज्यिक उत्पादन के साथ गतिशील बदलाव देखा गया है। वर्ष 2012-13 के दौरान, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा प्रकाशित राष्ट्रीय पुष्पकृषि डेटाबेस 2012 के अनुसार भारत में फूलों की खेती के लिए 232.74 हज़ार हेक्टयर क्षेत्र था जिसमें से शिथिल फूलों उत्पाद 1.729 मिलियन टन हुआ तथा खुले फूलों का उत्पाद 76.73 मिलियन टन हुआ। फूलों की खेती कई राज्यों में व्यावसायिक रूप से की जा रही है और मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ को पीछे छोड़ते हुए पश्चिम बंगाल (32%), कर्नाटक (12%), महाराष्ट्र(10%), राज्यों में फूलों की खेती की हिस्सेदारी बढ़ गई है।

एक व्यवसाय के रूप में

जो युवा इस क्षेत्र में अपना भाग्य आजमाने चाहते हैं, उनके लिए अनुभव बेहद जरूरी है। सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री जैसे कोर्स के लिए 10+2 में बायोलॉजी, फिजिक्स, कैमिस्ट्री के साथ पास होना जरूरी है, लेकिन मास्टर्स डिग्री के लिए एग्रीकल्चर में बैचलर डिग्री जरूरी है। मास्टर्स डिग्री के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च द्वारा ऑल इंडिया एंट्रेंस टेस्ट परीक्षा ली जाती है। गौरतलब है कि किसी भी यूनिवर्सिटी में फ्लोरीकल्चर (ऑनर्स) की पढ़ाई नहीं करवाई जाती, बल्कि बीएससी (एग्रीकल्चर) में एक विषय के तौर पर फ्लोरीकल्चर पढ़ाया जाता है। इस काम के लिए सवा बीघा जमीन काफी है, लेकिन जमीन पांच बीघा हो तो वारे-न्यारे हैं। इसे एक नर्सरी के तौर पर खोला जाए।

रिपोर्टिंग - दरख्शां कदीर सिद्दिकी

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