पीएम ने अपने हाथ ली योजनाओं की देख-रेख

पीएम ने अपने हाथ ली योजनाओं की देख-रेखगाँवकनेक्शन

नई दिल्ली। आने वाले एक साल में कई राज्यों में चुनाव हैं और भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के दिग्गजों ने अब तैयारियों का ज़िम्मा खुद अपने हाथ ले लिया है। रैलियों से लेकर रुकी पड़ी योजनाओं को गति देने तक।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक तरह ग्रामीण विकास की योजनाओं का लक्ष्य पूरा करने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली हुई है। इस सिलसिले में उन्होंने मंगलवार को सभी योजनाओं की विवेचना भी की, जिसमें प्रमुख रही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और दीनदयाल अंत्योदय योजना।

प्रधानमंत्री ने पीएमजीएसवाई के तहत बनाई जा रही सड़कों की गुणवत्ता की ठोस निगरानी के लिए प्रभावशाली तंत्र स्थापित करने का निर्देश दिए। इस योजना में निगराने के लिए प्रयोग की जा रही अंतरिक्ष आधारित तकनीकों और जन भागीदारी के लिए बनी ‘मेरी सड़क’ मोबाइल एप की भी जानकारी दी गई।

केंद्रीय ग्राम विकास मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2015-16 के दौरान पीएमजीएसवाई के तहत हर दिन औसतन 91 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया है।

इस तरह कुल मिलाकर 30,500 किमी ग्रामीण सड़कों का निर्माण हुआ है। इसके परिणामस्वरुप चालू वित्त वर्ष के दौरान 6500 बस्तियों को जोड़ा गया है। दीनदयाल अंत्योदय योजना के बारे में भी प्रधानमंत्री को बताया गया कि इसके ज़रिए तीन करोड़ परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया।

केंद्रीय बजट में ही इस साल सरकार द्वारा देश के 70 प्रतिशत ग्रामीणों तक पहुंच बनाने की मंशा साफ हो गई थी। इस मंशा को पुख्त़ा करने में केंद्रीस मंत्री भी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के एक कार्यक्रम में शामिल हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘‘यदि भारत को वृद्धि दर्ज करनी है और गरीबी से छुटकारा पाना है तो कृषि क्षेत्र को सबसे अधिक तेजी से वृद्धि दर्ज करनी होगी, कृषि अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।’’

वित्त मंत्री ने कहा कि लगातार दो साल खराब मानसून के बाद अब यदि इस साल भी कम बारिश होती है तो यह पूरी प्रणाली की परीक्षा होगी। देश की कृषि को खराब दौर से उबारने के संदेश के साथ केंद्र सरकार ने कई महात्वाकांक्षी योजनाओं की शुरुआत की है। इन्हीं में से एक है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना। वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अप्रैल से मिशन के तौर पर पेश की जाएगी ताकि इस साल से ही खरीफ मौसम की फसल को बीमा सुरक्षा प्रदान की जा सके। “इस योजना में कृषि क्षेत्र की मुश्किलें दूर करने और देश को किसानों की आत्महत्या के कलंक से मुक्त करने की क्षमता है,” जेटली ने कहा।

इस बीच यह भी खबर आई कि अगले महीने से नई फसल बीमा योजना के शुर किये जाने से पहले सरकार ने बीमा कंपनियों को आज आगाह किया कि अगर दावे के निपटान में देर होती है तो वे जुर्माने का भुगतान करने के लिए तैयार रहें। देश के वित्तीय सेवा सचिव अंजुली चिब दुग्गल ने कहा, “इस विशेष योजना में, हम देर होने पर जुर्माने के बारे में सोच रहे हैं”। वहीं केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तीन अप्रैल को उत्तर प्रदेश (जहां अगले वर्ष विधानसभा चुनाव हैं) की राजधानी लखनऊ में तीन अप्रैल को रैली करने पहुंचने वाले हैं।

अटल पेंशन योजना में संशोधन अंशधारक की मृत्यु के बाद बचे समय के लिए जमा हो सकेगा पैसा 

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने अटल पेंशन योजना में संशोधन किया है। इसके तहत अंशधारक की समय से पहले मृत्यु की स्थिति में पति या पत्नी को योजना की शेष अवधि के लिए योगदान करते रहने का विकल्प मिलेगा। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि योजना में पति या पत्नी को तब तक योगदान जारी रखने का विकल्प उपलब्ध कराने का निर्णय किया गया है जब तक कि मूल योजनाधारक की आयु 60 साल पूरी नहीं होती। अभी अंशधारक के 60 साल पूरे होने से पहले मौत होने की स्थिति में पूरी राशि पति या पत्नी को दी जाती है। संशोधन के बाद मूल अंशधारक के पति या पत्नी को उसकी मृत्यु तक उतनी ही पेंशन मिलेगी, जितना कि अंशधारक को मिलती। अंशधारक तथा उसके पति या पत्नी दोनों की मौत होने की स्थिति में अंशधारक के 60 साल पूरा होने तक जो भी पेंशन राशि जमा हुई, नामित उस राशि को पाने का हकदार होगा। अटल पेंशन योजना के तहत प्रत्येक अंशधारक को 60 साल पूरा होने पर न्यूनतम मासिक पेंशन मिलेगी।

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