पंचायत चुनाव : ठप पड़ा पशुओं में जानलेवा बीमारी का टीकाकरण

पंचायत चुनाव : ठप पड़ा पशुओं में जानलेवा बीमारी का टीकाकरण

शाहजहांपुर। पंचायत चुनावों के चलते उत्तर प्रदेश में अभी भी एक करोड़ से ज्य़ादा पशुओं में सबसे खतरनाक महामारी खुरपका-मुंहपका का टीका नहीं लग पाया है। कारण यह है कि पशुचिकित्सकों की ड्यूटी चुनाव की अनेक प्रक्रियाओं में लगा दी गयी है।

''टीकाकरण अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के 4 करोड़ 55 लाख पशुओं को टीके लगाने का लक्ष्य था, पर चुनाव में पशुचिकित्सकों की व्यस्तता के चलते लगभग तीन करोड़ टीके ही लग पाए हैं," उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ वीके सिंह ने बताया। 

वायु के माध्यम से खुरपका-मुंहपका बीमारी का संक्रमण दूसरे पशुओं में बहुत तेजी से फैलता है। एक जि़ले से दूसरे जि़ले, एक राज्य से दूसरे राज्य तक तेजी से पहुंचने में सक्षम होने के चलते यदि किसी भी क्षेत्र के पशु को यह बीमारी हो तो वह खतरे की घंटी होती है। ऐसे में प्रदेश के लगभग एक करोड़ 55 लाख पशुओं को टीका लगने में देरी होना खतरे की घंटी है। इसे रोकने के लिए हर छह महीने में पशुचिकित्सकों और पशु मित्रों की टीम बनाकर गाँव-गाँव जाकर टीकाकरण किया जाता है, जिसका खर्च भारत सरकार उठाती है।

केंद्रीय पशुपालन विभाग के अनुसार देश की 30 करोड़ गाय-भैंसों में से लगभग 70 प्रतिशत बहुत कम आय वाले परिवारों के पास हैं। ऐसे परिवारों के पशु की खुरपका-मुंहपका के कारण मौत हो जाना परिवार के लिए बड़ा आर्थिक झटका होता है।

आजकल पंचायत चुनावों में ड्यूटी कर रहे शाहजहांपुर जिले के बंडा ब्लॉक के पशुचिकित्सक डॉ इस्लामुद्दीन बताते हैं, ''पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगने से ब्लॉक में टीकाकरण रुका हुआ है। ब्लॉक में 35 हज़ार पशुओं का टीकाकरण होना है पर अभी तक लगभग 23 हज़ार टीके ही हुए हैं।"

शाहजहांपुर में 7.67 लाख पशुओं के टीके लगाने का लक्ष्य है, अभी तक चार लाख पशुओं का ही टीकाकरण हो पाया है। इस पर जि़ले के मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ इन्द्रमणि बताते हैं, ''पशु अस्पतालों के वेटनरी डॉक्टरों की निर्वाचन ड्यूटी लगा दिए जाने से टीकाकरण रुका है। डॉक्टरों के साथ मेरी भी ड्यूटी लगाई गयी है जिस वजह से पशु टीकाकरण अभियान की प्रगति का ब्यौरा भी पूर्णतया नहीं ले पाये हैं"।

प्रदेश भर में साल में दो बार, मई-जून व सितंबर-अक्टूबर के दौरान टीकाकरण चलता है। पिछले 15 सितंबर से शुरू अभियान 31 अक्टूबर तक पूरा किया जाना था, जो संभव नहीं। ''अगर 31 अक्टूबर तक टीकाकारण नहीं पूरा हुआ तो इसको आगे बढ़ा दिया जाएगा", डॉ सिंह ने कहा।

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