पंचायत चुनावों में लगे कृषि वैज्ञानिक, रबी दालों का प्रचार ठप

पंचायत चुनावों में लगे कृषि वैज्ञानिक, रबी दालों का प्रचार ठप

लखनऊ। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को दलहन की खेती को बढ़ाने के लिए रबी में किसानों के खेतों में जाकर दलहन के प्रचार व प्रदर्शन का आदेश दिया है। उत्तर प्रदेश के सभी केवीके इस कार्यक्रम को अभी शुरू भी नहीं कर पाए हैं क्योंकि केन्द्रों के पूरे स्टाफ की ड्यूटी पंचायत चुनावों में लगा दी गई है।

''दलहन की जो स्थिति चल रही है उसे देखते हुए भारत सरकार ने खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत ये कार्यक्रम दिया हुआ है। इसके लिए अव्वल दर्जे का बीज लाना, रिपोर्ट तैयार करना, किसानों के खेतों में अपनी देख-रेख में बुआई कराना आदि काम होने थे, सब ठप्प पड़े हैं। गाड़ी समेत सारे स्टाफ की ड्यूटी चुनाव में लगा दी है, हमने पूरा एक महीना खो दिया," उत्तर प्रदेश के समस्त कृषि विज्ञान केंद्रों के संयोजक डॉ अतर सिंह ने बताया। डॉ अतर आईसीएआर के प्रधान वैज्ञानिक हैं।

हाल ही में 200 रुपए प्रति किलो का आंकड़ा पार कर गए अरहर के दामों ने देश में दालों की खेती को बढ़ावा देने को राष्ट्रीय प्राथमिकता में बदल दिया है। इसके बाद देश के कृषि मंत्रालय ने भारतीय किसान अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) द्वारा संचालित सभी केवीके को दलहन-तिलहन के प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी थी।

दलहन प्रसार-प्रचार कार्यक्रम के लिए 20 करोड़ रुपए व तिलहन के लिए 14 करोड़ रुपए का बजट जारी किया गया है। रबी मौसम में दलहन फसलें जैसे चना, मटर व मसूर और तिलहन फसलें जैसे- सरसों, अलसी व सूरजमुखी का प्रदर्शन किया जाना है।

उत्तर प्रदेश में 68 कृषि विज्ञान केंद्र संचालित हैं। कृषि वैज्ञानिक, तकनीकी स्टाफ व सहायकों को मिलाकर प्रति केंद्र 16 सदस्यों के स्टाफ के हिसाब से लगभग 1088 लोग इन केंद्रों में कार्यरत हैं। सिर्फ प्रसार वैज्ञानिकों की बात करें तो इन केंद्रों में 300 से ज्यादा कृषि वैज्ञानिक तैनात हैं जो मतदान से लेकर, वोटों की गिनती तक की प्रक्रियाओं में भिड़ा दिए गए हैं।

इन केंद्रों के स्टाफ की ड्यूटी चुनाव में लगने से देशव्यापी 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण कार्यक्रम' में भी ये केंद्र अपने लक्ष्य से बहुत पीछे चल रहे हैं।

''पांच दिसम्बर को विश्व मृदा दिवस है, इस दिन हर केवीके को एमपी, एमएलए या जि़लाधिकारी की उपस्थिति में कार्यक्रम करके 250 मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जाने का लक्ष्य है। इसके लिए हमें सेंपल भी अक्टूबर में दलहन-तिलहन की बुआई से पहले इकट्ठा करके, जांच शुरू करनी थी, जो रुकी हुई है" डॉ सिंह ने कहा

इस संबंध में आईसीएआर के उप-महानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ एके सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन को पत्र लिखा है कि चुनाव की प्रक्रियाओं में प्रसार वैज्ञानिकों को न लगाया जाए, इससे केंद्रों के ज़रूरी और तय कार्य बाधित होते हैं, जिनका खर्च केंद्र सरकार वहन कर रही है।

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