पंचतंत्र की कहानी: बूढ़ा-बेटा और गधा

पंचतंत्र की कहानी:  बूढ़ा-बेटा और गधाgaoconnection

एक बार एक बूढ़ा और उसका पुत्र दोनों अपने गधे को साथ लेकर बाजार जा रहे थे। रास्ते में खड़े कुछ लोग हंसने लगे। एक व्यक्ति बोला- ”भला इस गधे को बिना बोझ लादे ले जाने से क्या लाभ? अरे तुम दोनों में से एक इस पर बैठ क्यों नहीं जाता?“ अरे हां!“ बूढ़ा आदमी बोला- ”आप ठीक कहते हैं।”

यह कह कर बूढ़े ने अपने छोटे बेटे को गधे पर बिठा दिया और चल दिया। कुछ देर बाद जब वे एक गाँव के पास से गुजरे तो कुछ गाँव वाले उन्हें देखकर बोले- ”अरे! यह देखो। यह कामचोर लड़का तो आराम से गधे पर बैठा है और बूढ़ा पिता उसके पीछे पैदल चल रहा है।ऐ बदतमीज लड़के! उतर नीचे और अपने पिता को बैठाओ।” बूढ़ा व्यक्ति उन गाँव वालों की बातें सुनकर घबरा गया और अपने बेटे को गधे से उतार कर स्वयं गधे पर बैठ गया। अभी वे कुछ और आगे बढ़े थे कि एक कुएं के किनारे खड़ी कुछ स्त्रियां चिल्ला उठीं – ”अरे! इस निकम्मे बूढ़े को तो देखो। कैसे मजे से गधे पर बैठा है और बच्चे को पैदल दौड़ा रहा है। बेचारा कैसा हांफ रहा है। ओ बूढ़े, शर्म नहीं आती। खुद गधे पर बैठा है। बच्चे को भी गधे पर क्यों नहीं बिठा लेता।”

यह सुनकर बूढ़े ने बच्चे को भी गधे पर अपने पीछे बैठा लिया और आगे बढ़ा। बूढ़े ने सोचा, “चलो अब तो कम से कम कोई नहीं टोकेगा। मगर जैसे ही वे अभी सौ गज ही आगे बढ़े होंगे कि राजमार्ग पर खड़े एक व्यक्ति ने उन्हें रोक लिया और बोला- ”क्षमा करें, श्रीमान! यह गधा आपका ही है?“

“हां, है तो मेरी ही!” बूढ़ा बोला। “भला कौन सोच सकता है कि इस बेचारे गधे पर आप लोग इतना बोझ लादते होंगे।” यह कहकर वह व्यक्ति हंसता हुआ आगे बढ़ गया। अब बूढ़ा व्यक्ति गुस्से से बड़बड़ाने लगा- ‘समझ में नहीं आता कि करूं तो क्या करूं। गधे पर बोझ नहीं लादता तो लोग घूर कर देखते हैं। यदि हम में से कोई एक गधे पर बैठ कर यात्रा करता है तो बैठने वाले को धिक्कारते हैं। अगर हम बाप-बेटे दोनों गधे पर बैठ जाते हैं तो भी लोग हमारा उपहास करते हैं।

बूढ़े व्यक्ति ने विचार किया और गधे के चारों पैर रस्सी से एक साथ बांध दिए और गधे को उल्टा एक बांस के डंडे में लटका लिया। अब बांस का एक छोर बूढ़े ने अपने कंधे पर रखा और दूसरा लड़के के कंधे पर और दोनों बाजार की ओर चल दिए। बाजार पहुंचने के लिए नदी पर बने एक पुल से होकर गुजरना पड़ता था। डंडे पर लटका गधा देखकर पूरा कस्बा ही उमड़ पड़ा। लोगों की भीड़ और चिल्लाहट सुनकर गधा बुरी तरह हाथ-पैर मारने लगा। अचानक गधे के पैरों में बंधी रस्सी टूट गई और वह पूल से नीचे नदी में गिर गया और थोड़ी देर छटपटाने के बाद मर गया। 

शिक्षा – यदि आप सभी लोगों को प्रसन्न रखने का प्रयत्न करेंगे तो हो सकता है किसी को भी प्रसन्न न रख सकें।

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