पपीते की खेती में मुनाफा ज्यादा

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लखनऊ। पपीता सबसे कम समय में फल देने वाला पेड़ है इसलिए इसमें फायदा ज्यादा है। ये समय सही है पपीते के पौधे लगाने का। पपीता न केवल सरलता से उगाया जाने वाला फल है, बल्कि जल्दी लाभ देने वाला फल भी है। पपीते में कई पाचक इन्जाइम भी पाए जाते हैं और इसके ताजे फलों को खाने से लम्बी कब्जियत की बीमारी भी दूर की जा सकती है।

जलवायु : पपीते की अच्छी खेती गर्म नमी युक्त जलवायु में की जा सकती है। इसे अधिकतम 38 डिग्री सेल्सियस 44 डिग्री सेल्सियस तक तापमान होने पर उगाया जा सकता है, न्यूनतम 5 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं होना चाहिए लू तथा पाले से पपीते को बहुत नुकसान होता है।

भूमि : जमीन उपजाऊ हो तथा जिसमें जल निकास अच्छा हो तो पपीते की खेती उत्तम होती है, जिस खेत में पानी भरा हो उस खेत में पपीता बिल्कुल नहीं लगाना चाहिए क्योंकि पानी भरे रहने से पौधे में कॉलर रॉट बीमारी लगने की सम्भावना रहती है, अधिक गहरी मिट्टी में भी पपीते की खेती नहीं करना चाहिए।

भूमि की तैयारी : खेत को अच्छी तरह जोत कर समतल बनाना चाहिए तथा भूमि का हल्का ढाल उत्तम है। 2 X 2 मीटर के अन्दर पर लम्बा, चौड़ा, गहरा गढ्ढा बनाना चाहिए, इन गढ्ढों में 20 किलो गोबर की खाद, 500 ग्राम सुपर फास्फेट एवं 250 ग्राम म्यूरेट आफ पोटाश को मिट्टी में मिलाकर पौधा लगाने के कम से कम 10 दिन पूर्व भर देना चाहिए।

किस्म : पूसा मेजस्टी एवं पूसा जाइंट, वाशिंगटन, सोलो, कोयम्बटूर, हनीड्यू, कुंर्गहनीड्यू, पूसा ड्वार्फ, पूसा डेलीसियस, सिलोन, पूसा नन्हा आदि प्रमुख किस्में हैं।

बीज : एक हेक्टेयर के लिए 500 ग्राम से एक किलो बीज की आवश्यकता होती है, पपीते के पौधे बीज द्वारा तैयार किए जाते हैं, एक हेक्टेयर खेती में प्रति गढ्ढे 2 पौधे लगाने पर 5000 हजार पौध संख्या लगेगी।

लगाने का समय एवं तरीका : पपीते के पौधे पहले रोपणी में तैयार किए जाते हैं, पौधे पहले से तैयार किए गढ्ढे में जुलाई, अगस्त में लगाना चाहिए, जहां सिंचाई का पूरा प्रबंध हो वहां सितम्बर से अक्टूबर तथा फरवरी से मार्च तक पपीते के पौधे लगाए जा सकते हैं।

नर्सरी में रोपा तैयार करना : इस विधि द्वारा बीज पहले भूमि की सतह से 15 से 20 सेमी ऊंची क्यारियों में कतार से कतार की दूरी 10 सेमी और बीज की दूरी 3 से 4 सेमी रखते हुए लगाते हैं। जब पौधे करीब 20 से 25 सेमी ऊंचे हो जाएं तब प्रति गढ्ढा 2 पौधे लगाना चाहिए।

खाद एवं उर्वरक

एक पौधे को वर्षभर में 250 ग्राम नत्रजन, 250 ग्राम स्फुर एवं 500 ग्राम पोटाश की आवश्यकता होती है, इसे छह बराबर भाग में बांट कर प्रति 2 माह के अंतर से खाद तथा उर्वरक देना चाहिए।

उपज व आर्थिक लाभ 

प्रति हेक्टर पपीते का उत्पादन 35-40 टन होता है। यदि 1500 रुपए/ टन भी कीमत आंकी जाए तो किसानों को प्रति हेक्टर 34000 रुपए का शुद्ध लाभ होगा।

फलों को तोड़ना 

पौधे लगाने के 9 से 10 माह बाद फल तोड़ने लायक हो जाते हैं। फलों का रंग गहरा हरे रंग से बदलकर हल्का पीला होने लगता है तथा फलों पर नाखून लगने से दूध की जगह पानी तथा तरल निकलता हो तो समझना चाहिए कि फल पक गया होगा। फलों को सावधानी से तोड़ना चाहिए। छोटी अवस्था में फलों की छटाई अवश्य करना चाहिए।

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