प्रधानों के खातों में 'सड़' रहे हैं करोड़ों रुपये

प्रधानों के खातों में सड़ रहे हैं करोड़ों रुपयेयोजना कमी, विकास को तरसते गाँव

बाराबंकी/लखनऊ। ग्राम पंचायतों का चुनाव हुए सात महीने से ज्यादा हो चुका है। प्रधानों के खाते में करीब आठ-आठ लाख रुपए भी आ चुके हैं लेकिन हजारों ग्राम पंचायतों में प्रधान एक भी रुपए का काम नहीं करा पा रहे हैं। कारण ये है कि इन ग्राम पंचायतों ने जो कार्य-योजना उच्चाधिकारियों को भेजी थी उस पर स्वीकृति नहीं मिली।

14वां वित्त आयोग लागू होने के बाद ग्राम पंचायतों को मिलने वाले फंड में कई गुना बढ़ोतरी कर दी गई। साथ ही गाइडलाइंस के मुताबिक ये शर्त भी लगा दी गई कि वो कार्ययोजना बनाकर जिलाधिकारी से अनुमोदन कराएंगे, उसके बाद ही विकास कार्य शुरु हो पाएंगे।

59162 ग्राम पंचायतों वाले उत्तर प्रदेश में हजारों ग्राम पंचायतों ने कार्ययोजना बनाकार बीडीओ के माध्यम से जिलाधिकारी को भेज भी दी लेकिन वहां से स्वीकृत होकर वापस नहीं आई हैं इसलिए बजट होने के बावजूद पंचायतों में काम नहीं शुरू कराया जा सका है, जिसके चलते प्रधान काफी परेशान हैं। कई जिलों में प्रधान सड़कों पर उतरने लगे हैं।

बाराबंकी जिले में सूरतगंज ब्लॉक के 50 से ज्यादा किसानों ने बुधवार को ब्लॉक कार्यालय पर धरना दिया। सूरतगंज ब्लॉक प्रधान संघ के उपाध्यक्ष और दौलतपुर ग्राम पंचायत के प्रधान अमित सिंह ने बताया, “पैसा प्रधानों के खातों में पड़ा है। हम लोगों ने कई महीने पहले ही कार्ययोजना बनाकर ब्लॉक पर जमा करा दी थी, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ रही है।

कार्ययोजना पर स्वीकृति नहीं मिलने से हम लोग काम नहीं करवा पा रहे हैं। विधानसभा चुनाव आने वाले हैं। आचार संहिता लागू हो गई तो फिर कुछ काम नहीं हो पाएगा। ऐसे में गाँवों में विकास कार्य पिछड़ जाएंगे।”

वो आगे बताते हैं, “यही हाल राज्य वित्त आयोग का भी है। वैसे इसमें कई दिक्कते हैं। पहले हैंडपंप सही कराना हो या कहीं दो ट्राली मिट्टी डालनी हो तो तुरंत काम हो जाता था। 500 रुपये का काम है अब 1500 का खर्च स्टीमेट बनाने में हो जाता है। ऐसे में तो सरकार को पुराना ढर्रा वापस लाना चाहिए।”

चौदहवें वित्त आयोग के तहत केंद्र ने राज्य को करीब 1900 करोड़ रुपए दिए हैं। प्रधानों के खाते में भी अप्रैल महीने में ही लाखों रुपए आ गए थे लेकिन वो मनरेगा के अलावा इसका एक भी रुपया खर्च नहीं पा रहे हैं।

कानपुर देहात जिले के राजापुर ब्ल़ॉक के डाढ़ापुर ग्राम पंचायत के प्रधान शिवकुमार कटियार भी परेशान हैं। वो बताते हैं, एक महीने हो गया पांच कार्ययोजना बनाकर एडीओ पंचायत को दी थी, लेकिन एक भी स्वीकृत नहीं हुई। एडीओ का कहना है ऊपर से आदेश नहीं है। जब डीएम से जिले के प्रधान मिले तो वो आजकल का आश्वासन दे रहे हैं।”

वहीं, कानपुर जिले में बिधनू के ग्राम प्रधान पवन चंदेल बताते हैं, "हमने खुली बैठक कर कार्ययोजना बनाकर जिले में भेजी लेकिन वहां से बोला गया ये प्रोफार्मा (नियम) बदल गया है, आप ऐसे नहीं ऐसे बनाइए। हमें तो समझ में नहीं आ रहा क्या होगा। वो तो राज्यवित्त का थोड़ा पैसा मिल गया था, उसी से काम करवाए थे गर्मियों में वर्ना कुछ नहीं होता।" 

प्रदेश के हजारों किसानों का कहना है गाँवों में मनरेगा के अलावा सभी काम ठप पड़े हैं। अगर जल्द ही हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो हम लोग एकजुट होकर अनिश्चितकालीन धरना देंगे।

इस बारे में बात करने पर प्रधानसंघ के प्रदेश प्रवक्ता अखिलेश सिंह ने कहा, “अगर किसी ग्राम पंचायत ने कार्य योजना बनाकर ब्लॉक पर भेजी है और दो महीने में जवाब नहीं मिलता है तो वो डीएम से मिले। वहां भी निराशा हाथ लगे तो कमिश्नर, प्रमुख सचिव ग्राम पंचायत, निदेशक पंतायती राज और एपीसी से मिलने के विकल्प खुले हुए हैं।”

त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव के बाद केंद्र से जिला और क्षेत्र पंचायत का फंड भी ग्राम पंचायतों के पास भेजना शुरू कर दिया है। प्रधानसंघ की अध्यक्ष श्वेता सिंह बताती हैं, “भारत सरकार से पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 1900 करोड़ रुपए यूपी को मिले हैं। लेकिन ये पैसा कई महीनों तक बैंक में पड़ा रहा, फिर हम लोगों ने मुख्य सचिव समेत कई अधिकारियों को चिट्टी लिखी तब जाकर पैसा प्रधानों को खाते में पहुंचा। इसी तरह राज्य वित्त आयोग का पैसा भी डेढ़ महीने बाद मिला था।”

रिपोर्टर - वीरेंद्र शुक्ला

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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