प्रदूषण से भी हो सकता है अस्थमा

प्रदूषण से भी हो सकता है अस्थमाgaon connection

लखनऊ। दमा या अस्थमा सांस से संबधित बीमारी है, जिसमें लोग ठीक से सांस नहीं ले पाते हैं। इस बीमारी में सांस नलिकाएं प्रभावित होती हैं। जब इन नलिकाओं की भीतरी दीवार में सूजन हो जाती है तो नलिकाएं बेहद संवेदनशील हो जाती है और सिकुड़ जाती हैं ऐसे में फेफड़े में हवा की कमी हो जाती है। 

अस्थमा पीड़ित लोगों में आमतौर पर घबराहट और तेज खांसी, सांस लेने में तकलीफ और घुटन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसके बारे में बता रहे हैं, लखनऊ के चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ अनिल चौहान-

दमा होने के कारण

पुश्तैनी मर्ज 

उन बच्चों में अस्थमा की शिकायत ज्यादा होती है जिनकी परिवार में किसी को यह बीमारी हो।

एलर्जी

एलर्जी के कई कारण हो सकते हैं। खाने-पीने की चीजों में रासायनिक खाद का ज्यादा इस्तेमाल, धूल, मिट्टी, घास, कुत्ते-बिल्ली जैसे बालों वाले जानवर, कुछ दवाएं और घर के अंदर सीलन आदि से भी यह समस्या होती है।

इंफेक्शन

सांस की नली में कुछ बैक्टीरिया या वायरस के जाने से अंदर सूजन हो जाती है और सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं। इससे सांस लेने और छोड़ने में काफी परेशानी होती है।

वातावरण

सड़को पर अंधाधुंध बढ़ रही गाड़ियों की संख्या के अलावा कुछ पेड़ जैसे बबूल भी एलर्जी की समस्या बढ़ाने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा मौसमी बदलाव भी इसमें अहम भूमिका निभाता है। खासतौर से अक्टूबर-नवंबर और मई-जून के महीने में समस्या काफी बढ़ जाती है।

मनोवैज्ञानिक कारण  

अस्थमा के कुछ मनौवैज्ञानिक कारण भी देखे गए हैं, जिनका प्रभाव बच्चों पर सबसे ज्यादा होता है। अगर मां या पिता किसी बात को लेकर बच्चे को बहुत ज्यादा डांटते हैं तो डर से बच्चे के अंदर घबराहट की एक धारणा बढ़ जाती है, जो कई बार आगे चलकर सांस की दिक्कत में बदल जाती है।

अटैक आने पर क्या करें 

1. अटैक आने पर लेटें नहीं, बैठ जाएं।

2. मरीज की पीठ सहलाएं, इससे सांस लेने में आसानी होगी।

3. आराम के लिए कंधो का ढीला रखें और आराम करें।

4. फौरन राहत के लिए इनहेलर का इस्तेमाल करें।

5. डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

दमा या अस्थमा के लक्षण

दमा में खांसी आना, नाक बजना, लगातार जुकाम बने रहना, रात और सुबह में सांस लेने में तकलीफ होना, सांस लेने में कठिनाई होना, सीने में जकड़न और लगातार खांसी बने रहना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं।

बचने के घरेलू उपाय

  • दमा में अदरक और तुलसी का रस फायदेमंद होता है। 
  • अदरक का एक चम्मच ताजा रस, एक कप मेथी के काढ़े और स्वादानुसार शहद इस मिश्रण में मिलाएं। 
  • एलर्जी को नियंत्रित करने के लिए दूध में हल्दी डालकर पीनी चाहिए। नींबू पानी दमे के दौरे को नियंत्रित करता है।   
  • खाने के साथ प्रतिदिन दमे रोगी को नींबू पानी देना चाहिए
  • आंवला खाना फायदेमंद है। आंवले को शहद के साथ खाना ज्यादा फायदेमंद है।

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