पढ़ाई में बाधक मनचलों का खौफ़

पढ़ाई में बाधक मनचलों का खौफ़गाँव कनेक्शन

बागपत। यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में परचम फहराकर बेटियां जश्न मना रही हैं, लेकिन पश्चिमी यूपी के बागपत जिले के एक गाँव में लड़कियां मायूस हैं। मनचलों के डर से गांव की ज्यादातर लड़कियों को आठवीं के बाद स्कूल भेजना बंद कर दिया जाता है। जिला मुख्यालय से चार किलोमीटर दूर पूरब दिशा में 2000 की आबादी वाले बाघू गाँव में आठवीं तक सरकारी स्कूल हैं।

आगे की पढ़ाई के लिए छात्राओं को टिटोरी या फिर बागपत जाना पड़ता है लेकिन टिटोरी और शहर को जाने वाला करीब चार किलोमीटर का रास्ता जंगल से गुजरता है और यहीं पर आसपास के गांवों के कुछ लड़के छात्राओं से छेड़खानी करते हैं। कई बार हंगामे और मारपीट के बाद मनचले बाज नहीं आए तो ज्यादातर लोगों ने बेटियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया। 

इसी बार 12वीं पास करने वाली टटीरी कस्बे में पढ़ने वाली खुशबू बताती हैं, “मेरे साथ मेरी ही मोहल्ले की एक लड़की कस्बे में पढ़ने जाती थी, दो साल पहले कुछ लड़कों ने उससे छेड़खानी कर दी। खूब बवाल हुआ, दोनों गांवों के लोगों में मारपीट हुई। कुछ लोग जेल भी गए। उसके बाद सहेली की पढ़ाई छुड़वा दी गई। विवाद और डर के चलते कई लड़कियों को पढ़ाई छोड़नी पड़ी।” दलित बस्ती की एक छात्रा ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “मेरे साथ भी एक लड़के ने छेड़खानी की थी, मैने घर में बता दिया तो पढ़ाई बंद करा दी।” गांव के लोग पढ़ाई को लेकर जागरुक हैं लेकिन वो बेटियों के साथ कोई विवाद नहीं चाहते। गांव की बुजुर्ग महिला कैलाशी (69 वर्ष) बताती हैं, “लड़कीन तो स्कूल जावै का कहवे हैं, हम भी चाहत हैं कि वो पढ़ैं, लेकिन रास्ते में लड़के परेशान करते हैं, मोटर साइकिल से पीछा करते हैं, तो डर लागति है। गांव में बड़ा स्कूल (इंटर कॉलेज) बनना चाहिए।”

पढ़ाई छूटने से मायूस लड़कियों ने कहा, “भैया आप कुछ मदद करवा दो तो हम सब स्कूल को जान लगैं।” इस बारे में बात करने पर डीआईओएस आशुतोष भारद्वाज ने कहा, अभी तक बात मेरे संज्ञान में नहीं थी, छात्राओं की सुरक्षा को लेकर मैं पुलिस के बड़े अधिकारियों को खत लिखूंगा।”  पुलिस अधीक्षक रवि शंकर ने कहा, “छात्राओं की सुरक्षा अहम है स्कूल के रास्ते पर गस्त बढ़ाई जाएगी। हमने पहले कई बार अभियान चलाएं हैं, आगे और कार्रवाई करेंगे।”

रिपोर्टर - सचिन त्यागी

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