परिवार का आरोपः गलत इन्जेक्शन लगाने से हुई वत्सल की मौत

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लखनऊ। हंसता खेलता मासूम वत्सल वृद्धावन (12 वर्ष) माँ को देखा चूमा और मौत की नींद सो गया। सिविल अस्पताल में सेंट फ्रांसिस स्कूल में पढ़ने वाले ग्यारह वर्षीय वत्सल वृद्धावन की गलत इंजेक्शन लगाने से मौंत हो गई। परिवार वालों का आरोप है पहले गलत दवा बाद में गलत इन्जेक्शन की वजह से बेटे की मौत हुई है।

तेली बाग स्थित खरिका वार्ड के कुम्हार मंडी निवासी संतोष राय के ग्यारह वर्षीय बच्चें वत्सल वृद्धावन की सिविल अस्पताल की ओपीडी में पैर के इलाज के लिए दवा ली गयी थी। दवा खाने के बाद पैर में दाने निकलने लगे और सूजन आ गयी। बृहस्पतिवार की शाम को पैर में ज्यादा दिक्कत होने पर सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। परिवारजन का आरोप है यहां डाक्टरी काफी देर से फोन पर व्यस्त थें स्टाफ लोगो के बार-बार कहने पर जांच कराई गयी और बच्चे को भर्ती कर लिया गया।

पिता संतोष का कहना है कि वत्सल वृद्धावन को मामूली सी रगड़ लगी थी शुक्रवार को टिटनेस का इन्जेक्शन लगवा दिया, इन्जेक्शन लगाने से उसमें सूजन आ गई, जिस वजह से उसे सिविल अस्पताल हजरत गंज की ओपीडी में दिखाया ओपीडी में डाक्टर अटल वर्मा ने बच्चे को देखा और दवा दे दी वह दवा खिलाने से छोटे-छोटे दाने निकलने लगे और उल्टियां होने लगी। बृहस्पतिवार रात उसे सिविल अस्पताल बाल विभाग में भर्ती कर दिया मौके पर मौजूद डाक्टर अटल ने उसको देखा और दवा दी।

पिता संतोष का आरोप है कि रात से लेकर सुबह तक बच्चे की हालत में सुधार था। उसने चाय पी और केक खाया उसके बाद नर्स ने डाक्टर अटल का लिखा हुआ इन्जेक्शन लगाया जिससे अचानक उसकी तबियत बिगड़ने लगी तबियत बिगड़ने पर डाक्टर को बुलाने के लिए कहा गया लेकिन सिस्टर ने फटकार दिया। और इन्जेक्शन लगाने के दस मिनट बाद ही बच्चे का सारा शरीर नीला पड़ गया और बच्चा मर गया।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. आशुतोष दुबे का कहना है कि बच्चे का इलाज डा. अटल कर रहे थे। उनकी डायग्नोस के अनुसार बच्चे को डीआईसी बीमारी थी, जिसमें खून का थक्का जम जाता है। इसके कारण बच्चे की मौत हुई है। जबकि परिवार वाले इस बात को पूरी तरह से बेबुनियाद बताते हुए कहते है बच्चे को पैर में चोट लगने के अलावा कोई बीमारी नहीं थी। पैर में सूजन व दाने के कारण भर्ती कराया गया। चोट का इलाज तो चल ही रहा था।

बच्चे की मौत से गुस्साए परिवार जन आज शनिवार को हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर लिखाने पहुचे तो एसएसआई संतोष पाण्डेय ने किसी एक्ट का हवाला देते हुए एफआईआर लिखने से मना कर दिया और कहा कही गुस्सा कर डाक्टर हड़ताल पर चले गए तो क्या होगा। सीएमओ से शिकायत करने की सलाह दी काफी देर तक जदोजहद करने के बाद भी एफआईआर नही दर्ज की गई शनिवार छुटटी होने के कारण सीएमओ भी नही मिले।

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