परम्परा की आड़ में न ले बेजुबान पक्षियों की जान

परम्परा की आड़ में न ले बेजुबान पक्षियों की जानगाँव कनेक्शन

लखनऊ। चाइनीज मांझा से घायल होने वाले पक्षियों को बचाने के लिए 'बेजुबान क्रांति' के नाम से जागरुकता अभियान चला कर स्कूली बच्चों और लोगों को जागरुक किया जा रहा है। 

लखनऊ स्थित नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान में गो ग्रीन सेव अर्थ फांउडेशन और हमराह फांउडेशन द्वारा जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। 

पिछले तीन वर्षों से इन संस्थाओं द्वारा पक्षियों को चाइनीज मांझा से बचाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के लगभग आठ जिलों में यह जागरुकता अभियान चला चुके है। गो ग्रीन सेव अर्थ फांउडेशन के संस्थापक विमेलश निगम बताते हैं, ''चाइनीज मांझे से पक्षियों को ही नहीं बल्कि इंसानों को भी काफी खतरा है। इसीलिए हम स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों पर जागरुकता अभियान कार्यक्रम चला रहे है ताकि लोग जागरुक हो। मांझे की बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं लगती तब तक इस अभियान को चलाएंगे।" निगम अपनी बात को जारी रखते हुए बताते हैं, ''चाइनीज मांझा के प्रयोग रोज 15 से 20 पक्षी घायल होते है।"

अभियान को चलाने का उद्देश्य बताते हुए संस्था के जिलाध्यक्ष आशीष मौर्या कहते हैं, ''मंकर संक्रांति के पर्व पर पंतगबाजी हर जगह होती है इस परम्परा को निभाना भी चाहिए लेकिन परम्परा की आड़ में बेजुबान पक्षियों को जान न ले इस उद्देश्य से यह अभियान चला रहे है। पतंग को उड़ाने में सद्दी का प्रयोग करे न कि चाइनीज मांझा का। 

मांझे पर लगी रोक के बारे में मौर्या बताते हैं, ''इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चाइनीज मांझे पर रोक भी लगाई है लेकिन अभी भी बहुत असानी से मांझा बाजार में मिल जाता है। इसके लिए संस्था ने बाजार में बिकने से रोकने के लिए डीएम और एसडीएम को शासनादेश के लिए पत्र भी लिख चुके है।" 

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