प्रशासनिक लापरवाही की मार झेल रहा कहला शहीद स्थल

प्रशासनिक लापरवाही की मार झेल रहा कहला शहीद स्थलगाँव कनेक्शन

प्रतापगढ़। किसान आन्दोलन का प्रमुख स्थल कहला जो इस समय विकास खण्ड गौरा के रानीगंज तहसील में स्थित है। यहां स्व. इन्दिरा गॉंधी के प्रयास से एक स्मारक बना है, जो सौन्दर्यीकरण के आभाव में खराब हालत में है।

कहला गाँव के निवासी हरिलाल बताते हैं, ''यहां किसान आन्दोलन 1920 से प्रारम्भ हुआ था। बाबा राम चन्द्र और झुमरी सिंह ने किसान आन्दोलन की शुरूआत की थी। इस क्षेत्र के किसान नेता माताचरण जो बासुरी बजाकर लोगों को शहीद स्थल पर इकट्ठा करते थे और किसानों के बीच अपनी बात रखी जाती थी।’’

स्मारक की हालत के बारे में जब खण्ड विकास अधिकारी निरंकार मिश्र से बात की गई तो उन्होंने कहा, ‘‘हमारी तैनाती के बाद यह मामला पहली बार हमारे संज्ञान में आया है, डीएम से कहकर स्थल का सौंदर्यीकरण करवाया जाएगा।’’

स्थानीय लोगों से पता चला कि 16 फरवरी 1931 को महुए के पेड़ के नीचे किसानों की एक बैठक चल रही थी जिसकी भनक अंग्रेजों को लग गई और अंग्रेजों ने वहां पहुंचकर धुआंधार गोली चलाकर कालिका प्रसाद, राम दास व मथुरा प्रसाद की हत्या कर दी थी। इसमें दर्जनों लोग घायल हुए थे। अंग्रेज सिपाही मृतकों को अपने साथ उठाकर ले जाना चाहते थे, पर माता चरण ने इसका विरोध किया और अपने अन्य साथियों की लाश न ले जाने देने की रणनीति तैयार कर खुद पैदल इलाहाबाद से चार घंटे में 50 किमी की दूरी तय कर पं. जवाहर लाल नेहरू को अपने साथ लेकर घटना स्थल पर आ गए और ग्रामीणों का गुस्सा शांत कराया।

रूर गाँव के निवासी अम्बिका प्रसाद (65 वर्ष) इस स्थल के बारे में बताते हैं, ''स्वतंत्रता की रजत जयन्ती वर्ष में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इन्दिरा गांधी ने यहां शहीद स्मारक का उद्घाटन सन 1973 में किया था, जो आज उपेक्षा का शिकार हो रहा है। आज प्रशासनिक लापरवाही के चलते कहला शहीद स्थल वीरान पड़ा है। हाल यह है कि धीरे-धीरे यहां के नवजवान इसके इतिहास को भी भूलते जा रहे हैं।’’

कहला निवासी संदीप दूबे (35 वर्ष) का कहना है ,''यहां के लोगों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपनी जान तक दे दी। लेकिन सरकार ने स्मारक के अलावा इस गाँव और यहां के नौजवानों के लिए कुछ नहीं किया। स्मारक की याद प्रशासन व राज नेताओं को सिर्फ राष्ट्रीय पर्वों पर ही आती है, जो यहां आकर फूल-माला चढ़ाकर चले जाते हैं।’’

जिले का किसान आन्दोलन प्रदेश में ही नहीं भारत के इतिहास में अपना स्थान रखता है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने प्रतापगढ़ जनपद के ग्राम रूर व कहला क्षेत्र के गाँवों में घूम-घूम कर किसानों का संगठन बनाकर अपनी राजनीतिक शुरूआत की थी।

रिपोर्टर - मेहताब खान/सचिन पाण्डेय

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