पश्चिमी यूपी की लड़कियां चाहती हैं आजादी और हक

पश्चिमी यूपी की लड़कियां चाहती हैं आजादी और हकगाँव कनेक्शन, स्वयं प्रोजेक्ट

शामली/मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की लड़कियां अब मुख़र हो रही हैं। स्कूल और कॉलेज जाने वाली लड़कियां अपने आसपास की समस्याओं से परेशान तो हैं लेकिन वो अपनी आजादी और हक के लिए भी बेबाकी से अपनी आवाज़ उठा रही हैं।

ग्रामीण इलाके के छात्र-छात्राओं को छात्र पत्रकार और स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से शुरू किये गये गाँव कनेक्शन के 'स्वयं प्रोजेक्ट' की टीम ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई स्कूलों और कॉलेजों में छात्र-छात्राओं से बात की।

झिंझना स्थित बलवंती देवी इंटर कॉलेज में बारहवीं की छात्रा प्रज्ञा ने कहती हैं, ''क्या लड़के ही वंश को आगे बढ़ा सकते हैं, लड़कियां भी वंश को आगे बढ़ा सकती हैं। सब चाहते हैं कि उनके घर में बेटा ही हो।” आंखों में आंसू लिए वो आगे कहती हैं, ''मैं एक बार अपनी माँ के स्कूल में गयी जहां पर वो अध्यापिका हैं, वहां पर सिर्फ लड़के ही थे लड़कियां बहुत कम थीं, इस बारे में मैंने मम्मी से पूछा तो पता चला कि वहां पर लोग अपनी लड़कियों को स्कूल ही नहीं भेजना चाहते।"

इसी कॉलेज की पायल सरवा ने लड़कों और लड़कियों के बीच हो रहे भेदभाव पर नाराज दिखी। पायल ने कहा, ''समाज को सोच बदलनी होगी जब लड़के अकेले जा सकते हैं तो लड़कियां क्यों नहीं?, लड़कियों अपने तरीके से आगे बढ़ने की आजादी चाहिए।"

स्वयं प्रोजेक्ट की टीम के सामने शामली के मदरलैंड पब्लिक स्कूल, महाराजा सूरजमल पब्लिक स्कूल और महामना मदन मोहन मालवीय इंटर कॉलेज और मेरठ के एलटीआर पब्लिक स्कूल की सैंकड़ों लड़कियों ने अपनी बात रखी।

शामली के मदरलैंड पब्लिक स्कूल में ग्यारहवीं में पढ़ने वाली मुस्कान गोस्वामी बताती हैं, ''एक बार मेरे घर के बगल ही एक बच्चे को नशा दिया जा रहा था मैंने अपने मोबाइल से वीडियो बना लिया, लेकिन मेरे पापा पुलिस में शिकायत करने से मना कर दिया। उसके बाद मैंने प्रधानमंत्री को भी इस बारे में चिट्टी लिखी लेकिन फालतू के विवाद से मैं उसे पोस्ट नहीं कर पाई, लेकिन मैं चाहती हूं इस पर कार्रवाई हो।"

ज्यादातर लड़कियां समाज में हो लड़कियों के साथ हो रहे दोहरे व्यवहार से परेशान नजर आईं। मदरलैंड स्कूल में बारहवीं में पढऩे वाली आयूषी तोमर डांसर बनना चाहती हैं, आयूषी कहती हैं, ''लोगों की ऐसी सोच बन गयी है कि डांसर पेशा गलत है, लोग समझते ही नहीं मुझे डांसर बनकर लोगों की सोच बदल के दिखाना है।"

शामली के महाराजा सूरजमल पब्लिक स्कूल में छात्र-छात्राओं ने न सिर्फ अपनी समस्याएं बताई बल्कि अपने हुनर और शौक को लेकर भी खुलकर बात की। 9वीं में छात्रा बिंदिया शर्मा पढ़ाई के साथ कविता भी लिखती हैं। वो बताती हैं, “मैं अपने शौक को करियर बनाना चाहती हूं, लेकिन पहले पढ़ाई पूरी लूं।”

इस दौरान छात्राओं ने स्वयं प्रोजेक्ट को अपने लिए शानदार मौका बताया तो स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षकों ने इस पहल की सराहना की। बलवंती देवी इंटर कॉलेज के मैनेजिंग डॉयरेक्टर अंकित तोमर ने कहा, “ग्रामीण इलाकों के छात्रों के लिए ये बड़ा अवसर है। इससे उनकी समस्याएं बड़े अधिकारियों तक पहुंचेंगी।”

वहीं सूरजमल कॉलेज की प्रिंसिंपल प्रिंयका मित्तल ने कहा, छोटे शहरों के छात्र-छात्राओं में प्रतिभा की कमी नहीं होती है। लेकिन उन्हें बड़े शहरों की अपेक्षा कम मौके मिलते थे। स्वयं प्रोजेक्ट एक बेहतर विकल्प बनेगा।

वहीं गांव कनेक्शन ने पहले से स्वयं प्रोजेक्ट से जुड़े मेरठ के करौली में स्थित एलटीआर पब्लिक स्कूल में भी स्टूडेंट से बात की। एलटीआर ग्रुप के चेरयमैन अनिल गुप्ता ने बताया, गांव कनेक्शन ने जिस तरह पहले 2 दिसंबर को ग्रामीण इलाके की महिलाओं को सम्मान दिलवाया वो सराहनीय है। इस प्रोजेक्ट से जुड़कर खासकर छात्राओं को आगे बढ़ने के कई मौके मिलेंगे।

इन स्कूलों की कई छात्र-छात्राओं ने गांव कनेक्शन की छात्र पत्रकार बनने को हामी भरी हैं। इनके द्वारा लिखी और बताई गई समस्याओं को अख़बार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

अतिरिक्त रिपोर्टिंग सहयोग - सुनील तनेजा/ पुष्पेंद्र चौधरी

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