पशुओं की आड़ में ड्रग्स का खेल

पशुओं की आड़ में ड्रग्स का खेलgaonconnection

मेरठ। ड्रग्स की गिरफ्त में घिरते पंजाब में माफिया ड्रग्स पशुओं के माध्यम से ला रहे हैं। पंजाब के माफिया पशु व्यापारी बन  प्रदेश के बागपत जिले के ग्रामीण इलाकों में अपने साथ पशुओं और उनके चारे में छुपा कर लाये मादक पदार्थ तस्करों को सौंप देते हैं।

हाल ही में गाँव कनेक्शन ने उड़ता पंजाब, उड़ता यूपी शीर्षक से खबर प्रकाशित कर यूपी से पंजाब जा रही अफीम कैसे हेराेइन में बदलती है, का खुलासा किया है। अब ये नया मामला सामने आया है कि कैसे तस्कर पंजाब से यूपी में हेराेइन और ड्रग्स ले जाते हैं।

बागपत जिले के बड़ौत थाना क्षेत्र निवासी शहज़ाद राय शोध संस्थान के अध्यक्ष अमित राय जैन अन्य बताते हैं, “हमारी संस्था सामाजिक सरोकार के मुद्दों पर कार्य कर रही है।” कुछ वर्ष पहले जब उन्होंने अपने जिले के युवकों को नशे का आदी होते सुना तो वो इसकी जड़ तक जाने में लग गए और उनके शोध में निकल कर आया कि इसके पीछे पंजाब से आने वाली ड्रग्स है।

वो बताते हैं, “अच्छी नस्ल के दुधारू पशुओं (गाय-भैंस) के लिए विख्यात पंजाब के कुछ ड्रग माफिया पशु व्यापारी बन पंजाब से ट्रकों में गायें-भैंस और उन का चारा भर बागपत जिले के हरियाणा और दिल्ली की सीमा से लगते गाँव निवाड़ा, सिसाना, कट्ठा (थाना बागपत कोतवाली), ताबका, कोताना, छपरौली, जागोत (थाना बड़ौत), फाकरोब और मवी कलां (थाना खेकड़ा) में आते हैं।

इन स्थानों पर इन्होंने गाँव से बाहर खेतों के बीच मासिक किराए पर जगह ली हुई है जहां ये हफ्ता दस दिन रुकते हैं। कहने को तो ये अपने पशु बेचने आते हैं और बेच कर चले जाते हैं परन्तु असल में इन के रुकने के ठिकानों पर दिल्ली, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद आदि स्थानों के लोग पहुंचते हैं और इनसे ड्रग्स ले निकल जाते हैं। वो भी कुछ ऐसा ही तरीका अपनाते हैं कि एक-दो पशु भी खरीदते हैं और उन्हीं की आड़ में ड्रग्स ले जाते हैं। अमित राय जैन की माने तो क्योंकि रास्ते में पुलिस चेकिंग में पशु होते हैं, उन्हीं के नाम पर पुलिस इनसे अवैध वसूली कर जाने देती है। पशु चारे या पशु की जांच नहीं होती और ये ड्रग्स लेकर निकल जाते हैं।

रिपोर्टर - सुनील तनेजा

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