पठानकोट में हुए शहीद का लखीमपुर से भी था नाता

पठानकोट में हुए शहीद का लखीमपुर से भी था नातागाँव कनेक्शन

लखीमपुर। पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले में शहीद हुए सूबेदार फतेह सिंह का निशाना ऐसा था कि पेड़ में लगा आम एक शॉट में ही गिरा देते थे। काबिलियत ये थी कि पेड़ का पत्ता तक नहीं हिलता था। पठानकोट में आखिरी सांस तक आतंकियों से लड़ते हुए उनकी सांसें जरूर थम गईं पर सूबेदार फतेह सिंह ने आतंकियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।

खीरी की एनसीसी की 26 वीं बटालियन में सूबेदार मेजर पद पर तैनात रह चुके थे। अचूक निशानेबाज और देश पर हमेशा मर मिटने को तैयार रहने वाले फतेह सिंह काम में जितने सख्त थे स्वभाव से उतने ही मृदु। एनसीसी 26वीं बटालियन में 3 अप्रैल 2005 से 31 सितम्बर 2006 तक रह चुके फतेह सिंह के साथ काम कर चुके सीनियर असिस्टेंट यशपाल मौर्य रुंधे गले और आंखों में आंसू लेकर कहते हैं, ''उनके जैसे कर्मठ अफसर कम ही देखने को मिलते हैं। अफसर एक बार जिस काम को आर्डर कर दें वो झट उसे पूरा करने में जुट जाते थे और तभी दम लेते थे जब काम निपट जाता था। ड्यूटी को हमेशा धर्म समझते थे सूबेदार साहब।’’

इंटरनेशनल रायफल शूटर फतेह सिंह पंजाब के गुरदासपुर के रहने वाले थे और मरते दम तक देश के लिए अपने खून का एक एक कतरा न्योछावर कर गए। शहीद सूबेदार के साथ 26वीं बटालियन में तैनात एक और सीनियर असिस्टेंट आशीष कुमार गुप्ता उनके बारे में बात करते ही भावुक हो जाते हैं। वह कहते हैं, ''विश्वास नहीं होता सूबेदार साहब किसी की गोली का निशाना बन सकते हैं। बटालियन में तैनाती के दौरान अक्सर हम लोग उनसे मजाक में कहते थे पीछे पेड़ में लगी अमिया तोड़ कर दिखाइए तो सूबेदार साहब अपनी एयर रायफल झट से उठा लाते थे। एक ही शाट में टप से आम नीचे गिरा देते थे। पत्ता तक नहीं हिलता था पड़ोस का। हम लोग उड़ती चिडिय़ा को मारने को कहते तो कहते मार तो दूंगा पर चिडिय़ों को मारना अच्छा नहीं।’’

खीरी जिले में अपने बिताए डेढ़ साल के दौरान ही परेड हो या एनसीसी का कोई भी कार्यक्रम सूबेदार फतेह सिंह का जिसमें हाथ लगा वो बुलन्दियों तक पहुंचा। फतेह सिंह के वक्त उनके साथ कैडेट ट्रेनिंग कर चुके हर्षित श्रीवास्तव कहते हैं, ''जब से उनकी मौत की खबर सुनी विश्वास नहीं हुआ। फतेह सिंह सर ने जि़न्दगी का फलसफा भी सिखाया और अनुशासन भी। हम उन्हें कभी नहीं भुला सकते।’’फतेह सिंह की सधी हुई ट्रेनिंग के चलते उनके कई कैडेट आर्मी और एसएसबी में सेलेक्ट हुए। फतेह सिंह के व्यवहार को पास में चाय का दुकान चलाने वाले चाचू कहते हैं, ''चाय के घूंट के साथ भी हमेशा समाज में फैल रही कुरीतियों और बिगड़ते माहौल पर ही चिंतित रहते थे सूबेदार साब।’’

रिपोर्टर - प्रतीक श्रीवास्तव

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