पटना कृषि संस्थान को मिला दूसरी हरित क्रांति का ज़िम्मा

पटना कृषि संस्थान को मिला दूसरी हरित क्रांति का ज़िम्माgaon connection, गाँव कनेक्शन

गाँव कनेक्शन नेटवर्क

पटना। कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने पूर्वी राज्यों में दूसरी हरित क्रांति के संबंध में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा का ज़िम्मा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पटना को सौंपा है।

कृषि मंत्री ने क्या कहा

राधा मोहन सिंह ने संस्थान के 16वें स्थापना दिवस के मौके कहा कि इस संस्थान की विशेषज्ञता को ध्यान में रखते हुए दूसरी हरित क्रांति के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की समीक्षा और इसमें आनेवाली कठिनाइयों से कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को बताते रहें ताकि दूसरी हरित क्रांति के क्षेत्र में पूर्वी राज्य तेज़ी के साथ आगे बढ़ सके। इस काम के लिए जिन संसाधनों की ज़रूरत होगी उसे मुहैया कराया जाएगा।

दूसरी हरित क्रांति, जो न सिर्फ अनाज, दलहन, तिलहन तक सीमित है बल्कि श्वेत क्रांति, नीली क्रांति में भी पूर्वी राज्यों में विकास और उत्पादन की अपार संभावनांए हैं। संस्थान इस संबंध में सभी राज्यों से मशविरा कर भारत सरकार को ज़रूरी जानकारी देगा। पूर्वी क्षेत्र में यही एकमात्र संस्थान है जो खेती से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहा है।

कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने इस मौके पर संस्थान द्वारा 343.84 लाख रूपए की लागत से बनाए गए कृषक छात्रावास को पूर्वी राज्यों के किसानों के लिए समर्पित किया। इस छात्रावास में कुल सात कमरे,तीन डॉरमेट्री और एक प्रशिक्षण हॉल है। इस मौके पर कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले किसानों और कृषि संबंधी शोध कार्यों के प्रचार और प्रसार में अहम योगदान देने वाले पत्रकारों को सम्मानित किया गया।

सौर ऊर्जा के विकास पर रहेगा ज़ोर

राधा मोहन सिंह ने कहा कि खेती में ऊर्जा की बड़ी ज़रूरत है। इसलिए केंद्र सरकार सौर ऊर्जा के कृषि में उपयोग पर भी खास ध्यान दे रही है। पूर्वी क्षेत्र में साल भर में 250 से 300 दिन गर्म धूप खिली रहती है जिसकी सौर ऊर्जा क्षमता 4.0 से 4.3 किलोवाट प्रति वर्गमीटर प्रतिदिन है। इस ऊर्जा का उपयोग प्रकाश करने के अलावा भूजल दोहन में, कीटनाशक दवाइयों के छिड़काव वाली मशीनों के उपयोग में, मत्स्य पालन के जलाशयों में ऑक्सीजन की मात्रा को संतुलित करने में किया जा सकता है। 

राधा मोहन सिंह ने कहा कि मौजूदा वक्त में पूर्वी क्षेत्र चावल, सब्जी और मीठे जल की मछलियों के उत्पादन में आगे हैं। यह क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर चावल, सब्जी और मछली उत्पादन में 50%, 45% और 38% की भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। अगर इस क्षेत्र के विकास पर ध्यान दिया जाय तो यह क्षेत्र अनाज के साथ ही दलहन, तिलहन, फल-सब्जियों, दुग्ध एवं मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के काबिल है।

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