पुरस्कार देने के लिए यूपी में कृषि वैज्ञानिकों की कमी

पुरस्कार देने के लिए यूपी में कृषि वैज्ञानिकों की कमीgaon connection, गाँव कनेक्शन

दिवेन्द्र सिंह

लखनऊ। प्रदेश सरकार कृषि के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले वैज्ञानिकों को सम्मानित करना चाहती है, लेकिन प्रदेश सरकार को कृषि विशेषज्ञ ही नहीं मिल रहे जिन्हें सम्मानित किया जा सके। कृषि वैज्ञानिकों को कुल सोलह पुरस्कार दिए जाने हैं लेकिन सिर्फ़ नौ के लिए ही नाम प्रस्तावित हुए हैं।

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक प्रोफ़ेसर राजेन्द्र प्रसाद के मुताबिक़ देश में कृषि वैज्ञानिकों की कमी है जिसकी वजह से सिर्फ़ नौ लोगों को ही नामित किया गया है।

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद की बैठक में देश के कई कृषि विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम में तत्काल संसोधन करने की जरूरत बताई है। बैठक की अध्यक्षता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक पद्मविभूषण डॉ वी एल चोपड़ा कर रहे थे।

परिषद महानिदेशक प्रोफ़ेसर राजेन्द्र प्रसाद ने बताया ''उत्तर प्रदेश सरकार ने कृषि क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करने वाले 16 वैज्ञानिकों को अलग-अलग विधाओं में सम्मानित करने का फैसला किया है। नाम तलाशने का जिम्मा उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद को सौंपा गया था। देश-प्रदेश के दिग्गज कृषि वैज्ञानिकों का पैनल बनाकर नाम ढूंढे गए तो नौ श्रेणियों के लिए ही नाम मिले। इसके साथ ही यूपी एकेडमी सम्मान के लिए भी 27 कृषि वैज्ञानिकों का चयन किया गया है।

समिति के अध्यक्ष व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व अध्यक्ष पद्मभूषण डॉ. वीएल चोपड़ा ने कहा कि मानदेय व सम्मान के साथ ही लोगों को लुभाया जा सकता है। इन स्थितियों के लिए सरकारों की उदासीनता भी जिम्मेदार है। "कृषि को कार्यक्षेत्र बनाने के लिए युवाओं को जोड़ना जरूरी है। पंजाब के एक सर्वे में सामने आया कि 96 प्रतिशत युवा कृषि को कार्यक्षेत्र के तौर पर नहीं अपनाना चाहते। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालयों को नए कानून बनाने होंगे। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि नियंत्रण कम होने के डर से राज्य सरकारें यह नहीं कर पा रहीं।" आईसीआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. वीएल चोपड़ा ने कहा।

डॉ वी एल चोपड़ा ने आगे बताया, ''परिषद की तरफ से सरकार को भेजे गए उत्तर प्रदेश कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अधिनियम के मसौदे को स्वीकार करके यह स्थिति बदली जा सकती है। यह मसौदा आईसीएआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. आर एस परौदा की अध्यक्षता में गठित सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है।''

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