प्याज के बीज की खेती से कमा रहे लाखों रुपए

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पटना/लखनऊ। पढ़ाई पूरी करने के बाद दूसरे युवाओं की तरह आशीष के सामने रोजगार की समस्या आई, कई जगह कोशिश करने के बाद नौकरी नहीं लगी। तब उन्होंने खेती को अपना व्यवसाय बनाया। आशीष प्याज और उसके बीज की खेती कर सालाना लाखों रुपए का कमा रहे हैं।

पटना शहर के करीब बसे गंगापुर गाँव के युवा प्रगतिशील किसान आशीष मेहता (35 वर्ष) पिछले आठ वर्षों से प्याज व प्याज के बीज की खेती कर रहे हैं। उनके खेत देखने आस-पास के लोग भी आते हैं। प्याज की खेती करने में वे इस इलाके के किसानों में एक अलग पहचान बना चुके हैं।

बीए की शिक्षा पूरी करने के बाद आशीष ने 2001 में लगभग 13 बीघा में प्याज लगाकर   बीज उत्पादन किया लेकिन मौसम प्रतिकूल होने के कारण बीज का उत्पादन कम हुआ और नुकसान उठाना पड़ा़, जिसकी वजह से इन्हें घर-परिवार के साथ दोस्तों की भी सुननी पड़ी।

लेकिन ऐसे में भी आशीष ने हार नहीं मानी और दूसरे साल उन्होंने 13 बीघा में बीज उत्पादन के लिए प्याज लगा कर बीज का उत्पादन किया। इन्होंने 13 बीघा जमीन िकराए पर ले रखी है। आशीष बताते हैं, “लोगों ने कहा कि पैसे और समय दोनों बर्बाद कर रहे हो जाओ कहीं नौकरी देखो, लेकिन दूसरे साल ही बीज का अच्छा उत्पादन होने के साथ कीमत भी अच्छी मिली, जिससे मेरा हौसला और अनुभव बढ़ता गया और साल दर साल हजारों की कमाई लाखों में पहुंच गयी। अब दूसरे किसान भी मुझसे जुड़ गए हैं।”

बीज के उत्पादन में लागत व आय

एक बीघा खेत में बीज का उत्पादन दो-तीन कुंतल होता है। खेत में लागत प्रति बीघा 25-30 रुपए आ जाती है। इसमें 15 हजार रुपए जमीन का किराया और खाद, बीज, कीटनाशक का खर्च भी शामिल है।  दिसंबर-जनवरी महीने में प्याज की खेती की शुरुआत की जाती है। जिसकी कटाई अप्रैल के आखिरी हफ्ते तक शुरू हो जाती है।

देश व विदेशों में भी बाजार

आशीष के खेत में उत्पादित प्याज का बीज राज्य के अलावा उत्तर प्रदेश, बंगाल, नेपाल के साथ-साथ बांग्लादेश भी जाता है़, जिसकी कीमत लगभग एक हजार से 1500 रुपए प्रति किलोग्राम होती है़, प्याज को खेत से लाकर स्टोर करने के कुछ माह के बाद भाव अच्छा मिलने पर बिक्री करते हैं। आशीष इस बारे में कहते हैं, “खेती में फायदा और नुकसान बहुत कुछ मौसम व बाजार भाव पर भी निर्भर करता है।” 

आशीष को जिला व राज्यस्तरीय कई पुरस्कार मिल चुके हैं। देश में होने वाले सेमिनार-प्रदर्शनी में भी हिस्सा लेते रहते हैं।

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