प्याज़ खरीद के बाद मप्र सरकार के गोदाम ठसाठस भरे

प्याज़ खरीद के बाद मप्र सरकार के गोदाम ठसाठस भरेgaon connection

इंदौर। प्याज़ की कीमतें थोक बाज़ार में लुढ़कने के बाद किसानों को घाटे से बचाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी तरह के संभवत: पहले फैसले के तहत इस सब्जी की 9,36,000 क्विंटल से ज़्यादा की खरीद की है। इस प्याज़ को खुले बाज़ार में नीलाम करने के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरु कर दी गई है। 

किसानों से प्याज़ खरीदने का जिम्मा मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) को दिया गया है। मार्कफेड के महाप्रबंधक खरीद योगेश जोशी ने बताया कि चार जून से अब तक प्रदेश के 36,136 किसानों से छह रुपए प्रति किलोग्राम की दर पर 9,36,254 क्विंटल प्याज़ की खरीद की गई है।

उन्होंने बताया कि प्याज़ खरीदने के लिये सूबे के 40 जिलों में 71 केंद्र बनाए गए थे। इनमें से उन 13 जिलों में प्याज़ की सरकारी खरीद एक उच्चस्तरीय समिति के तय मानकों के मुताबिक अलग-अलग तारीखों में बंद कर दी गई, जहां अब तक 30 मिलीमीटर से ज़्यादा मॉनसूनी बारिश दर्ज की जा चुकी है। अन्य जिलों में प्याज़ की सरकारी खरीद जारी है। सरकारी अफसर ने दावा किया कि प्रदेश में प्याज़ के भंडारण के माकूल इंतजाम किए गए हैं लेकिन जब उनसे मंडी में किसानों से खरीदे गए प्याज़ के वेयर हाउस में भंडारण की कथित बदइंतज़ामी से बड़ी मात्रा में सड़ने की खबरों पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है।

बहरहाल, किसानों से प्याज़ की खरीद के बाद सरकारी गोदाम ठसाठस भर गए हैं। मानसूनी बारिश का दौर शुरु होने के मद्देनज़र प्रदेश सरकार प्याज़ को जल्द से जल्द नीलाम कर देना चाहती है, ताकि इस सब्ज़ी को खराब होने से बचाया जा सके। 

किसानों से खरीदें प्याज़ को खुले बाज़ार के टेंडर के लिए आखिरी दिन योगेश जोशी ने बताया कि किसानों से खरीदे प्याज़ को खुले बाज़ार में नीलाम करने के लिए टेंडर जारी कर दिए गए। टेंडर जमा करने की आखिरी तारीख 30 जून है। गोदामों में जमा प्याज़ को ‘जहां है, जैसा है’ की स्थिति में नीलाम किया जाएगा।सूबे में प्याज़ की बम्पर पैदावार के बाद मई में थोक मंडियों में इस सब्ज़ी के भाव इस कदर गिर गए थे कि किसानों के लिए खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा था। इस स्थिति से नाराज़ किसानों ने विरोध स्वरुप सड़क पर प्याज़ फेंकने शुरु कर दिए थे।

इन घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक जून को घोषणा की थी कि प्रदेश सरकार कृषकों को घाटे से बचाने के लिए छह रुपए प्रति किलोग्राम की दर से यह सब्ज़ी खरीदेगी। वैसे सूबे में कई किसान ऐसे हैं जिनकी उगाई प्याज़ सरकारी केंद्रों पर अब तक नहीं खरीदी जा सकी है। मॉनसूनी बारिश ने इन किसानों की चिंताओं में इज़ाफ़ा कर दिया है, क्योंकि उनके घरों में भंडारित प्याज़  वातावरण में नमी बढ़ने के कारण तेज़ी से खराब हो रही है। उज्जैन में कथित तौर पर बारिश को देखते हुए 23 जून को प्याज़ खरीद स्थगित किये जाने से आक्रोशित किसानों ने कृषि उपज मंडी के सामने सड़क पर प्याज़ बिखेर दिए। किसानों के विरोध प्रदर्शन के बाद प्याज़ खरीद शुरु की गई।

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