काली स्याही: भारतीय राजनीति का नया हथियार

काली स्याही: भारतीय राजनीति का नया हथियारकाली स्याही से राजनेताओं पर हमले

लखनऊ। राजस्थान के बीकानेर में यात्रा के दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर काली स्याही फेंकी गई।

स्याही अखिल भारतीय विघार्थी परिषद के दो कार्यकताओं ने फेंकी थी, इन्हें हिरासत में ले लिया गया।

इन कार्यकर्ताओं का विरोध मुख्यमंत्री के उस बयान को लेकर था जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भारतीय सेना के लक्षित हमलों को लेकर सबूत मांगे थे।

नेताओं पर जूते उछाले जाना, काले झण्डे दिखाना, रास्ता रोकना, नारे लगाना, काले बैज पहनना ये सब तरीके लंबे समय से भारतीय राजनीति में विरोध जताने के या अपने मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करने के प्रचलित तरीके रहे हैं।

आज़ादी के लड़ाई के दौरान तो स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेज़ों को तिरंगा लहराकर भारत की अखंडता को साबित करके विरोध जताते थे।

लेकिन भारतीय राजनीति में बीते कुछ सालों में विरोध की एक नई विधा प्रचलित हुई है -- काली स्याही।

अरविंद केजरीवाल पर पहली बार इंक नहीं फेंकी गई। इसके पाल एक भी मंच पर उनके भाषण के दौरान एक लड़की ने उन पर इंक फेंकी थी। मुख्यमंत्री बनने के पहले लोकसभा चुनाव के दौरान वाराणसी में भी उन्हें इंक का सामना करना पड़ा था।

लेकिन अरविंद केजरीवाल अकेले ऐसे नेता नहीं जिसे विरोध के इस हथियार का सामना करना पड़ा हो।

आइए बीते कुछ वर्षों के मामलों पर नज़र डालें:

19 सितंबर 2016: दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर दिल्ली में ही एलजी ऑफिस के बाहर इंक फेंकी गई थी।

17 सितंबर: भोपाल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा पर एम्स के गुस्साए छात्र ने इंक फेंकी

17 जनवरी 2016: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर एक लड़की ने भाषण के दौरान इंक फेंकी। केजरीवाल ऑड-इवेन फार्मुले की सफलता के लिए धन्यवाद भाषण दे रहे थे।

12 अक्टूबर 2015: पाकिस्तानी मंत्री खुर्शीद महमूद के किताब के अनावरण में शामिल होने का विरोध करते हुए शिवशेना के कार्यकर्ताओं ने वामपंथी नेता सुधींद्र कुलकर्णी के चेहरे पर इंक पोत दी थी।

23 अगस्त 2014: शिवशेना के एक कार्यकर्ता ने महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री बालासहेब थोरट पर अहमदनगर में इंक फेंक दी थी।

08 अगस्त 2014: महाराष्ट्र में ढांगर जाति को एसटी घोषित करने की मांग कर रहे कार्यकर्ताओं ने राज्य के सहकारिता एवं संसदीय कार्यभार मंत्री हर्षवर्धन पाटिल पर इंक फेंक दी थी। इससे उनकी आंख को नुकसान भी पहुंचा था।

25 मार्च 2014: अरविंद केजरीवाल को लोकसभा चुनावों के प्रचार के दौरान वाराणसी में इंक और अण्डों से हमले का सामना करना पड़ा।

08 मार्च 2014: तब आप में शामिल नेता योगेंद्र यादव पर जंतर मंतर में इंकक फेंकी गई थी।

14 जनवरी 2012: योग गुरू रामदेव पर इंक फेंकी गई थी।

क्यों फेंकी जाती है काली स्याही

फर्स्टपोस्ट वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर अनूप धर कहते हैं कि काली स्याही फेंके जाने का संबंध 'सफेद कुर्ते' से है। भारत में सफेद कुर्ते को ईमानदारी और प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इंक फेंकने वाला ये दिखाना चाहता है कि वो नेता या व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर प्रहार कर रहा है।


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