बागी अखिलेश और रामगोपाल सपा से निकाले गए 

बागी अखिलेश और रामगोपाल सपा से निकाले गए अनुशासनहीतना और पार्टी करने के आरोप में दोनों पर कार्रवाई:  मुलायम

लखनऊ। बंटवारे के कगार पर खड़ी समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को पार्टी से निष्काषित कर दिया गया है। पहलवान से नेता बने मुलायम ने जीवन का सबसे बड़ा फैसला लेते हुए अपने मुख्यमंत्री बेटे को 6 साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया।

शुक्रवार को हंगामे भरे दिन के बाद शाम को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने बगावत और अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी अखिलेश के साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव को भी पार्टी से निकाल दिया। नाराज मुलायम ने कहा, “पार्टी बचाने के लिए इन दोनों (अखिलेश और रामगोपाल) को निकाल दिया है।” मुलायम ने अपने चचेरे भाई और पार्टी के राज्यसभा सांसद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “वो लगातार पार्टी को तोड़ने में लगे हैं, वो मुख्यमंत्री का भविष्य खराब कर रहे हैं।” मुलायम ने ये कार्रवाई अखिलेश और रामगोपाल के अलग प्रत्याशी घोषित करने और रामगोपाल द्वारा आपात राष्ट्रीय अधिवेशन पर की।

पिछले दो महीने से देश के सबसे बड़े राज्य की सत्ताधारी पार्टी में चल रहा विवाद का ये पटाक्षेप माना जा रहा है। सपा की ये अंदरूनी लड़ाई आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव में कई कई बड़े लोगों का भविष्य तय करेगी। 403 विधानसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में सपा ने 2012 में बसपा को पटखनी देकर 224 सीटें जीती थीं। भारी खींचतान के बाद अखिलेश सीएम बने थे। अब 2017 के चुनाव उनकी अग्निपरीक्षा है। ये चुनाव सपा, बसपा और भाजपा के लिए भी निर्णायक साबित होंगे। सपा की लड़ाई से अगर बीजेपी को फायदा मिलता है तो 2019 में उसकी राह आसान होगी, जबकि 2014 के आम चुनाव में सूपड़ा साफ हो चुकी बीएसपी वापसी के लिए एडी-चोटी का जोर लगा रही है। यही वजह ही कि मुलायम कह रहे हैं कि पार्टी के लिए को कुछ भी करेंगे।

पार्टी और बेटे के नाम पर कई बार भावुक हो चुके मुलायम ने कहा कि मुलायम ने कहा जो रामगोपाल यादव के बुलाए राष्ट्रीय सम्मेलन में आएगा उसे भी पार्टी से बाहर किया जाएगा। मुलायम ने कहा कि पार्टी का राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाने का अधिकार राष्ट्रीय अध्यक्ष को होता है, जबकि मुझे खबर नहीं है। मैनें रामगोपाल की कई कमियों गलतियों को भुलाकर माफ करता रहा लेकिन वो पार्टी को कमजोर करते रहे। उन्होंने कहा कि रामगोपाल ने मुख्यमंत्री का भविष्य खराब कर दिया। दो महीने पहले रामगोपाल को निकालने के बाद मुलायम ने वापस ले लिया था। शुक्रवार को जब पत्रकारों ने मुलायम से पूछा क्या माफी मांगने पर अखिलेश को माफ कर दिया जाएगा, इस पर मुलायम ने कहा- “अखिलेश कहां माफी मांगेगा, वो तो लड़ता रहता है पिता मांगता रहता होगा तो देखा जाएगा।”

मुलायम, प्रोफेसर रामगोपाल यादव के 1 जनवरी को बुलाए गए आपात राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बात करने आए थे। नाराज मुलायम ने कुछ देर पहले ही अखिलेश और रामगोपाल यादव को पार्टी के अलावा अपनी लिस्ट जारी करने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया था। रामगोपाल यादव ने इटावा से लखनऊ रवाना होते हुए कहा था कि अब समझौते की गुंजाइश नहीं बची है। सपा प्रमुख ने मुख्यमंत्री अखिलेश और महासचिव रामगोपाल को कारण बताओ नोटिस जारी करने के महज पौन घंटे के अंदर संवाददाता सम्मेलन करके दोनों को पार्टी से निकालने का फरमान सुना दिया। पार्टी से निकालेजाने के कदम को रामगोपाल ने संवैधानिक बताया है। देररात शिवपाल यादव ने पत्र जारी कर कहा रामगोपाल के सम्मेलन में शामिल होने वाले हर कार्यकर्ता को बाहर किया जाएगा।

एक सवाल के जवाब में मुलायम ने कहा कि वह हम तय करेंगे। इसके लिये पार्टी नेताओं से विचार-विमर्श किया जाएगा। मुलायम ने कहा कि रामगोपाल ने कुछ महीने पहले भी अनुशासनहीनता की थी। शीर्ष नेतृत्व को बताए बगैर राष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन बुलाकर उन्होंने ना सिर्फ घोर अनुशाासनहीनता की है बल्कि पार्टी को भारी आघात भी पहुंचाया है। सपा मुखिया ने कहा कि अगर वह खुद भी यह सम्मेलन बुलाते तो पहले राष्ट्रीय कार्यकारिणी की या संसदीय बोर्ड की बैठक करते। उसके लिये कम से कम 15 दिन का समय लिया जाता है. यह पूरा अधिवेशन असंवैधानिक है. हमारी अपील है कि इसमें शामिल ना हों। यह पूरी तरह से अनुशासनहीनता है। अभी तो मैंने छह साल के लिये निकाला है.... सोचेंगे कि और कडी सजा क्या दी जाए।

असंवैधानिक काम कर रहे हैं मुलायम : रामगोपाल

इस बीच, रामगोपाल ने अपने निष्कासन पर कहा कि सपा मुखिया ने उन्हें और मुख्यमंत्री को बाकायदा नोटिस भेजा था और बिना उनके पक्ष को सुने की गयी निष्कासन की कार्रवाई पूरी तरह असंवैधानिक और गलत तथ्यों पर आधारित है।

उन्होंने आरोप लगाया ‘‘पार्टी में लगातार शीर्ष स्तर से असंवैधानिक काम हो रहे हैं। अगर पार्टी का अध्यक्ष ही ऐसा काम करे तो राष्ट्रीय प्रतिनिधियों का सम्मेलन कौन बुलाएगा। मैं संसदीय बोर्ड का सदस्य सचिव था, उसकी एक भी बैठक नहीं हुई तो कैसे प्रत्याशी घोषित कर दिये गये। सारा काम असंवैधानिक हो रहा है। जब हजारों प्रतिनिधियों ने कहा तो हमने बैठक बुलायी।'' रामगोपाल ने कहा कि नेताजी (मुलायम) को शायद पार्टी के संविधान के बारे में पूरी तरह नहीं मालूम हो। सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही पार्टी का विधिवत गठन है। इसी प्रदेश के प्रतिनिधियों की मांग पर यह सम्मेलन बुलाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग पार्टी के सदस्य नहीं थे, उन्हें पार्टी का टिकट दिया जा रहा है। जो उम्मीदवार जीतने वाले थे, उनका टिकट काट दिया गया है जबकि हारने वालों को दिया गया। फिरोजाबाद, इटावा, मैनपुरी और औरैया समेत अनेक जगह यही हाल है। रामगोपाल ने कहा ‘‘नेताजी ने कहा है कि पार्टी में हमारा कोई योगदान नहीं है लेकिन गैर-यादवों के बीच वोट के लिये रामगोपाल की ही जरुरत पडती है। चुनाव में पता लग जाएगा कि किसकी कितनी स्वीकार्यता है।''

इस बीच, अखिलेश को सपा से निकाले जाने की खबर सुनकर बडी संख्या में उनके समर्थक मुख्यमंत्री आवास के बाहर आ गये और ‘नेताजी न्याय करो' के नारे लगाये। कुछ समर्थकों ने ‘मुलायम सिंह मुर्दाबाद' के भी नारे लगाये। हालात के मद्देनजर मौके पर बडी संख्या में पीएसी और पुलिस तैनात कर दी गयी। उधर, मुलायम के आवास के बाहर भी अखिलेश समर्थक धरने पर बैठ गये, और शिवपाल यादव के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें वहां से हटाया। मुख्यमंत्री द्वारा कल रात 235 प्रत्याशियों की समानान्तर सूची जारी किये जाने के बाद पैदा हालात के बीच सपा मुखिया ने आज शाम को अखिलेश को कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया है कि आपके द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष के समानान्तर सूची जारी किया जाना घोर अनुशासनहीनता है। इसलिये क्यों ना आपके विरद्ध अनुशासनिक कार्यवाही की जाए। इसके अलावा मुलायम ने सपा महासचिव रामगोपाल यादव को भी बिना इजाजत के मीडिया में बयान देने पर नोटिस जारी किया। इसके बाद तेजी से हुए घटनाक्रम में रामगोपाल ने पार्टी महासचिव की हैसियत से आगामी एक जनवरी को राष्ट्रीय प्रतिनिधियों का आपात्कालीन सम्मेलन बुलाया। राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में कोई बहुत बडा फैसला लिया जा सकता है। बहरहाल, परिवार में जारी घमासान के बीच सपा मुखिया मुलायम ने अपने द्वारा गत बुधवार को जारी सूची में घोषित पार्टी प्रत्याशियों की कल पार्टी प्रदेश मुख्यालय पर बैठक बुलायी है। पार्टी में जारी उठापटक के मद्देनजर यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. माना जा रहा है कि मुलायम इस बैठक में प्रत्याशियों के रख को भांपने की कोशिश करेंगे। इस बीच, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी में मचे घमासान पर संवाददाताओं द्वारा पूछे गये किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। उधर, दोपहर बाद लखनउ पहुंचे रामगोपाल ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की थी।

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