मोदी जी ये 10 काम करके आप वोट के लिए किसानों को दे सकते हैं धन्यवाद

नरेंद्र दामोदार दास मोदी ने भारत के दूसरे प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली है। ऐसे में किसानों को उम्मीद है जल्द उनकी उम्मीदें पूरी होंगी।

Arvind ShuklaArvind Shukla   30 May 2019 1:40 PM GMT

लखनऊ। लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक हासिल करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है।

चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद बीजेपी मुख्यालय में लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये देश के किसानों की भी जीत है। पीएम मोदी को देश के किसानों को श्रेय देना भी चाहिए था, क्योंकि एनडीए को जो देशभर में 41 फीसदी से ज्यादा वोट मिले उसमें बड़ा योगदान किसानों का है।

लेकिन मेरी नजर में पीएम मोदी का ये धन्यवाद ग्रामीण जनता और किसानों तक तभी सार्थकता के साथ पहुंचेगा जब तुरंत कुछ कदम उठाएं जाएं। मैं कृषि संकट, जीडीपी और भारी-भरकम आंकड़ों की बात नहीं कर रहा। पिछले कुछ महीनों में देश के कई राज्यों के गाँवों में किसानों के बीच जाकर एक कृषि पत्रकार के रुप में जो अनुभव हुआ, किसानों से बातचीत के आधार पर मैं कह सकता हूं कि किसानों के हित के लिए प्रधानमंत्री मोदी को इन 10 कामों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।

1.सूखा: भारत की तत्कालिक समस्या सूखा है। 22 मई तक भारत में प्री मॉनसून में भी 23 फीसदी बारिश कम हुई, इस बार मानसून भी देरी से आ रहा है। बारिश नहीं लाई जा सकती, लेकिन महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात समेत कई इलाकों में बूंद-बूंद पानी को तरसते लोगों और पशुओं के लिए पर्याप्त पानी का इंतजाम होना चाहिए।

2.गेहूं खरीद: इन दिनों देश के कई राज्यों में गेहूं, सरसों समेत कई फसलों की खरीद हो रही है। सरकारें सुनिश्चित करें कि किसानों की फसलों की सरकार द्वारा शत-प्रतिशत खरीद हो। यूपी समेत कई राज्यों में सरकारी गेहूं खरीद का बुरा बेहाल है।

यहां रोचक ये भी है कि इस बार सांसद चुनकर लोकसभा पहुंचे हैं उनमें से 38 फीसदी नेताओं ने अपने आप को किसान बताया है। पीआरएस लेजेस्टिव रिसर्च की इस रिपोर्ट के मुताबिक 17वीं लोकसभा में किसान पेशा वाले सांसदों की संख्या 38 फीसदी है जबकि 16वीं लोकसभा में ये संख्या 28.29 फीसदी थे, उस दौरान 146 सांसद ऐसे थे जिन्होंने चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामें में अपना पेशा खेती बताया था।

ये जरुरी है कि शत प्रतिशत किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिले। फोटो- गांव कनेक्शन

3.न्यूनतम समर्थन मूल्य : मान लिया कि सरकार तत्कालिक रुप में न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं बढ़ा सकती, लेकिन जिन फसलों की एमएसपी तय है उन पर खरीद कर किसानों के वोट के कर्ज़ का एक भाग चुकाया जा सकता है। साथ उन फसलों को भी एमएसपी के दायरे में लाया जाए जो बड़े भाग के किसान उगाते हैं। जैसे बिहार में बड़े पैमाने पर मक्का होता है लेकिन उन्हें एमएसपी नहीं मिलती। पंजाब का किसान आलू के भाव से परेशान है।

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किसानों को उम्मीद हैं प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा आई नरेंद्र मोदी सरकार उनकी बेहतरी के लिए कई कदम उठाएगी। फोटो- अभिषेक वर्माकिसानों को उम्मीद हैं प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा आई नरेंद्र मोदी सरकार उनकी बेहतरी के लिए कई कदम उठाएगी। फोटो- अभिषेक वर्मा

4.फसल पैटर्न में बदलाव (क्राप रोटेशन) : भारत के कई इलाकों में ऐसी फसलें हो रही हैं जो इन इलाकों में भूजल संकट और बढ़ा सकती हैं। महाराष्ट्र व यूपी में केला और गन्ना, पश्चिमी यूपी में गन्ना, हरियाणा व पंजाब में धान, मध्य यूपी में मेंथा, बुंदेलखंड में पान (नगण्य) जैसी फसलों में बहुत पानी खर्च हो रहा है।

सरकार को चाहिए फसल का पैटर्न बदलने के प्रयास करे। किसानों को ऐसी खेती के विकल्प बताएं जाएं साथ ही जहां ये फसल नुकसान दायक हो रही है वहां इसपे रोक लगाकर दूसरी फसल को उगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना होगा।

उदाहरण के तौर हरियाणा को लिया जा सकता है। पानी की कमी से जूझते हरियाणा में धान की खेती को कम करने की कवायद शुरु हुई है। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने किसानों से कहा कि वो धान की खेती छोड़ते हैं तो 2000 रुपए प्रति एकड़ का मुआवजा और दूसरी फसलों के मुफ्त बीज समेत कई सुविधाएं सरकार देगी।

5.मनरेगा और तालाब: ताल तलैयों के देश भारत में तालाब कभी पानी संरक्षण का बड़ा जरिया हुआ करते थे। अब ज्यादातर गाँवों के तालाब सूखे और कचरा घर बन गए हैं। तालाबों को बर्बाद करने में मनरेगा का बहुत बड़ा योगदान है। सरकार को चाहिए तालाबों की इंजीनियरिंग में तुरंत सुधार करवाए, क्योंकि लाखों रुपए लगाकर बनाए जाने वाले तालाबों में बारिश का पानी जमा ही नहीं हो पा रहा।

6.जैविक बाजार: पिछले कई वर्षों से भारत में जैविक का शोर बढ़ा है ये अच्छा है लेकिन ऑरगैनिक उत्पादों के लिए बाजार की उपलब्धता नहीं के बराबर है। जो किसान अपने उत्पाद बेच रहे वो उनकी मेहनत है। बाकी मार्केट पर कंपनियों का कब्जा है। सरकार को तत्काल किसानों की उपज की बिक्री का प्रबंध करना होगा वर्ना ये किसान भी रासायनिक उर्वरक और जहरीले कीटनाशकों की तरफ लौट जाएंगे।

7.अवारा पशु : किसानों ने भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट दिया है लेकिन छुट्टा पशु उनके लिए सिरदर्द बने हैं। किसान, फसल और गाय तीनों संकट में हैं। गोशाला (गोवंश आश्रय स्थल) ही सिर्फ समाधान नहीं हैं। यूपी इसका उदाहरण है। छुट्टा गोवंश में रोजगार के अवसर तलाए जाएं, साड़ों का बधियाकरण हो और सेरोग्रेसी आदि पर युद्धस्तर पर काम हों, वर्ना देर जो जाएगी। संबंधित रिपोर्ट यहां पढ़ें

यूपी से लेकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान तक छुट्टा पशुओं से किसान परेशान हैं। यूपी से लेकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान तक छुट्टा पशुओं से किसान परेशान हैं।

8.फल सब्जी बाजार : फल और सब्जियों की खेती से अच्छा मुनाफा हो सकता है, लेकिन ये तभी संभव है जब मंडी किसान की पहुंच में हो। जो फसल ज्यादा पैदा हो रही हो वहां उसकी मंडी हो। ब्लॉक स्तर पर छोटे कोल्ड स्टोरेज बनाए जाएं।

9.प्रसंस्करण : किसान का गेहूं 16 से 18 रुपए किलो बिकता है लेकिन आटा 24 से 40 रुपए किलो तब बिकता है। ये सबको पता है कि प्रसंस्कण में फायदा है, लेकिन ये फायदा किसान को तब मिलेगा जब छोटा-मंझोला किसान भी उद्दमी बन जाए। लेकिन इसके लिए जरुरी है न ग्राम पंचायत तो ब्लॉक स्तर पर ऐसी यूनिट लगाई जाएं। सहकारिता के आधार पर ये काम सफल हो सकता है। यूनिट सरकार लगवाए, देखभाल समिति करे और किसान उसके मुताबिक पैसे देकर अपने उत्पाद बनवाए।


10.ग्राम पंचायतों पर निगरानी : चौदहवां वित्त आयोग लागू होने के बाद ग्राम पंचायतों को करोड़ों रुपए मिलते हैं। अगर ये सारा पैसा वाजिब तरीके से खर्च हो तो गाँवों की सूरत बदल सकती है। कई पंचायतों ने ऐसे सराहनीय काम किए भी हैं लेकिन ज्यादतर में प्रधान और स्थानीय अधिकारियों की मनमर्जी जारी है। ऐसे में निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था को और बेहतर करने की जरुरत है।

(लेखक गाँव कनेक्शन के डिप्टी न्यूज एडिटर और कृषि पत्रकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)


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