नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल के विरोध में देश भर के डॉक्टर हड़ताल कर रहे हैं। यह हड़ताल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने आहूत की है, जिसे डॉक्टरों का समर्थन मिल रहा है।
आईएमए ने बुधवार को सुबह 6 बजे से 24 घंटे के हड़ताल आह्वान किया। आईएमए ने डॉक्टरों से कहा कि वे बुधवार सुबह 6 बजे से अगले दिन एक अगस्त की सुबह 6 बजे तक हड़ताल करेंगे। हालांकि इस दौरान इमरजेंसी, ट्रॉमा, आईसीयू सेवाएं बहाल रहेंगी।
आईएमए क्यों कर रहा है एनएमसी का विरोध?
आईएमए के अनुसार इस बिल के लागू होने से देश में मेडिकल शिक्षा महंगी हो जाएगी क्योंकि इस बिल में कॉलेज की 50 फीसदी से अधिक सीटों पर प्रवेश का अधिकार कॉलेज प्रबंधन को दे दिया जाएगा। आईएमए का यह भी कहना है कि इस बिल से मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा महंगी हो जाएगी।
आईएमए का कहना है कि इस के तहत गैर-चिकित्सा शिक्षा प्राप्त लोगों को अंग्रेजी चिकित्सा का लाइसेंस मिलेगा। यानी गैर- प्रोफेशनल लोग जो नीम-हकीमी करते हैं, उन्हें सर्टिफिकेट मिल जाएगा। इससे लोगों की जान खतरे में पड़ जाएगी।
आईएमए ने कहा कि बिल में कम्युनिटी हेल्थ प्रोवाइडर शब्द को सही से परिभाषित नहीं किया गया है। अब नर्स, फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल के लोग आधुनिक दवाइयों के साथ प्रैक्टिस कर सकेंगे। जबकि वे इसके लिए प्रशिक्षित नहीं होते हैं। आईएमए ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि यह बिल मरीज-विरोधी, गरीब-विरोधी और पूरी तरह से अमानवीय प्रकृति की है, इसलिए इसका विरोध जारी रहेगा।
Live #PressConference against #NMCBill pic.twitter.com/2i0HRVvvBb
— Indian Medical Association (@IMAIndiaOrg) July 30, 2019
आईएमए इस बिल का विरोध इसमें शामिल ‘एग्जिट टेस्ट’ के प्रावधानों की वजह से भी कर रहा है। इस बिल के अनुसार एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को प्रैक्टिस के लिए एग्जिट टेस्ट देना होगा। अभी एग्जिट टेस्ट सिर्फ विदेश से मेडिकल पढ़कर आने वाले छात्र ही देते हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन सिंह ने कहा कि बिल में एग्जिट टेस्ट का प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि मेडिकल शिक्षा में एकरूपता आए। उन्होंने कहा कि इस एग्जिट टेस्ट से जांचा जाएगा कि एमबीबीएस पास डॉक्टर आगे प्रैक्टिस करने या पोस्टग्रेजुएशन करने योग्य है या नहीं।