'उद्यम एक लक्ष्य नहीं, एक यात्रा, कृषि क्षेत्र में इसकी अपार संभावनाएं'

Daya SagarDaya Sagar   1 March 2020 8:41 AM GMT

कृषि क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए अयोध्या में 'यूथस्केप' नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या में आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर के कृषि विशेषज्ञ, कृषि वैज्ञानिक, उद्यमी, शिक्षक और कृषि छात्र शामिल हुए।

'एग्रीप्रेन्योरशिप' थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य खेती-किसानी को एक करियर और एक आंत्रप्रेन्योरशिप के रूप में देखना और युवाओं को इसके लिए प्रोत्साहित करना था। इसी मुद्दे पर विभिन्न वक्ताओं ने अपनी बात रखी।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिजेंद्र सिंह ने कहा, "तेजी से बदलती दुनिया में खेती को पारंपरिक तरीके से देखने की बजाय प्रोफेशनल तरीके से देखने की जरूरत है। यह क्षेत्र संभावनाओं और प्रयोगों के लिए हमेशा खुला हुआ है, आप जितना प्रयोग और नवाचार करेंगे इस क्षेत्र को और आपको उतना ही फायदा होगा।"

उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय कैंपस में ही प्रयोग की गतिविधियों को बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को छोटे-छोटे समूह बनाकर विश्विद्यालय कैंपस में ही प्रयोग करते रहना चाहिए, ताकि भविष्य के लिए वे तैयार हो सकें। उन्होंने इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।


वरिष्ठ वैज्ञानिक और बायो-टेक पार्क, लखनऊ के संस्थापक प्रोफेसर प्रह्लाद सेठ ने कहा कि अगर किसी भी युवा के पास कृषि क्षेत्र में नवाचार के लिए कोई बेहतर योजना है, तो वह पूरी तैयारी के साथ उनकी संस्था के पास आए। उनकी संस्था आर्थिक और तकनीक दोनों तरीके से मदद करेगी।

कार्यक्रम की मुख्य आयोजक 'मेधा' के सहसंस्थापक ब्योमकेश मिश्रा ने कहा कि आंत्रप्रेन्योरशिप एक लक्ष्य न हो कर एक यात्रा है, जो लगातार चलती रहती है। उन्होंने कहा कि अगर आपको खेती में सफल होना है तो इसके उत्पाद पक्ष को देखने की बजाय बाजार पक्ष को भी देखना होगा ताकि वैल्यू चेन में किसानों को अधिक से अधिक फायदा हो।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर बड़े-बड़े होटल लाल और पीले शिमला मिर्च को अधिक दाम पर खरीदते हैं तो किसानों को भी प्रयोग करते हुए पारंपरिक खेती के साथ-साथ ऐसे उत्पादों को भी उगाना चाहिए। उन्होंने खेती को एक फूड सिस्टम की तरह भी देखने की सलाह दी।


कार्यक्रम में शामिल हुए नाबार्ड के क्षेत्रीय प्रमुख परमेश्वर लाल पोद्दार ने कहा कि किसानों और कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ रहे युवाओं को गर्व से कहना चाहिए कि 'वे किसान हैं, कृषि विशेषज्ञ हैं।' उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे भविष्य के लिए डरे नहीं बल्कि अपना प्रयास करते रहें। उन्होंने कई ऐसी सरकारी योजनाओं के बारे में बताया जिसकी मदद से युवा कृषि क्षेत्र में बेहतर भविष्य बना सकते हैं।

वहीं ISEED-IRMA की इंक्यूबेशन मैनेजर शुभा खड़के ने एग्रीप्रेन्योरशिप में आने वाली मुश्किलों पर युवाओं से चर्चा की। उन्होंने कहा, "एग्रीप्रेन्योरशिप की जो यात्रा है वह काफी चुनौतीपूर्ण है। लेकिन अगर आप अपनी योजना पर सही काम किया है, तो आपको एग्रीप्रेन्योरशिप की इस यात्रा में काफी मजा भी आएगा।"

आर्यावर्त बैंक के क्षेत्रीय प्रमुख डीपी सिंह ने कहा कि युवाओं को दिमाग में बिना कोई नकारात्मक विचार लाए अपनी योजना पर पूरी तरह से लग जाना चाहिए, निश्चित रुप से सफलता मिलेगी। उन्होंने कई ऐसी सरकारी ऋण योजनाओं के बारे में युवाओं को बताया जिसकी मदद लेकर युवा अपने एग्रीप्रेन्योरशिप को बढ़ावा दे सकते हैं


सफल किसानों ने साझा किए युवाओं से अपने अनुभव

कार्यक्रम के अंतिम सेशन में युवाओं को उन एग्रीप्रेन्योर्स से संवाद करने का मौका मिला, जिन्होंने खेती-किसानी के क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़े हैं और कई उद्यमियों से बेहतर कार्य कर रहे हैं। सफल मछली पालक परवेज खान ने कहा कि उत्तर प्रदेश में युवा इस समय मछली पालन में अपना सफल करियर बना सकते हैं क्योंकि राज्य में वर्तमान समय में हजारों टन मछली झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों से मंगाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अगर कोई असफल होता है, तो इसका मतलब उसकी योजना नहीं फेल हुई है बल्कि उस व्यक्ति ने अपनी योजना पर सही ढंग से काम नहीं किया। उत्तर प्रदेश के मऊ के सफल केला किसान और नया दौर एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ डॉ. मनीष राय ने युवाओं से संवाद पर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह एक बेहतरीन अनुभव रहा क्योंकि जिनसे हम संवाद कर रहे थे, वे कृषि की ही पढ़ाई करते हैं और आगे इसी क्षेत्र में कुछ अच्छा करने की क्षमता रखते हैं।


छात्रों ने जताई खुशी

'एग्रीप्रेन्योरशिप' पर आयोजित इस कार्यक्रम में भाग लेकर कृषि विश्वविद्यालय के छात्र काफी खुश दिखाई दिए। एमएससी के छात्र विवेक सिंह ने कहा, "यह विश्वविद्यालय प्रशासन और मेधा की एक सराहनीय पहल है जो हमें छात्र जीवन में ही ऐसे-ऐसे लोगों के अनुभव सुनने का मौका दे रहे हैं, जिन्होंने कई कठिनाईयों से लड़कर कृषि क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़े हैं। यह हमारे लिए प्रेरणादायक है।"

वहीं बीएससी के छात्र राहुल मौर्या ने कहा, "ग्रेजुएशन करने के बाद मैं नर्सरी फार्मिंग के क्षेत्र में करियर बनाना चाहता हूं। मेरे दिमाग में इसके लिए एक योजना थी, जो परिपक्व नहीं हुई। आज के कार्यक्रम में मैंने एक्सपर्ट से बात करके इस योजना को और तराशने की कोशिश की है। इस संवाद से मुझे बहुत ही आत्मविश्वास मिला है और उम्मीद मिली है कि मैं भविष्य में कुछ अच्छा कर सकूंगा।"

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के छात्रों ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग, बायो गैस, जैविक खेती और जल संरक्षण से जुड़े कुछ प्रोटोटाइप्स और मॉडल की प्रदर्शनी भी लगाई, जिसे कृषि विशेषज्ञों ने खूब सराहा।


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