मुजफ्फरपुर में संदिग्ध बीमारी का कहर जारी, अब तक 36 बच्चों की मौत

एईएस को मस्तिष्क ज्वर भी कहा जाता है, समय से ईलाज कराने पर यह ठीक हो सकता है,अत्यधिक गर्मी की शुरुआत होने से एईएस से ग्रसित बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी शुरू होती है जो बारिश की शुरुआत पर ख़त्म हो जाती है

मुजफ्फरपुर में संदिग्ध बीमारी का कहर जारी, अब तक 36 बच्चों की मौत

लखनऊ। बिहार के मुजफ्फरपुर में संदिग्ध बीमारी की वजह से अब तक 36 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं 130 से अधिक बच्चे गंभीर रूप से बीमार हैं, जिनका इलाज स्थानीय अस्पतालों में चल रहा है। बिहार के विभिन्न हिस्सों से एईएस( एक्यूट इन्सेफ़लाइटीस सिंड्रोम) एवं जेई(जापानी इन्सेफ़लाइटीस) से पीड़ितों की संख्या में अचानक हुई बढ़ोतरी की खबर को राज्य स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से लिया है। इसके लिए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग जिले के एईएस/जेई प्रभावित क्षेत्रों में रोग के प्रति सामुदायिक जागरूकता को बढ़ाने पर विशेष रूप से कार्य रही है। साथ ही पीड़ित बच्चों को बेहतर ईलाज मुहैया कराने के लिए जिले के स्वास्थ्य केन्द्रों में समस्त सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी है।


मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेमोरियल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) के सिविल सर्जन डॉक्टर एसपी सिंह ने बताया," बच्चों की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए टीम का गठन किया गया है। अस्पताल आने वाले अधिकांश बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया (अचानक से शुगर की कमी) के लक्षण मिल रहे हैं। जांच रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हो रही है। सोमवार सुबह तक 4 बच्चों की मौत इस बीमारी से हो चुकी थी जो रात होते होते 9 तक पहुंच गई। अब तक 36 बच्चों की मौत हो चुकी है। बच्चों की मौत की संख्या निरन्तर बढ़ती ही जा रही जो चिंता का विषय बनता जा रहा है।"

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बक्सर जिले के जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने बताया, " इस गंभीर रोग से निपटने की तैयारी पूरी कर ली गयी है। इसके लिए जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर निशुल्क सुबिधा उपलब्ध करा दी गयी है। साथ ही सामुदायिक स्तर पर रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए आशा एवं एएनएम को भी ज़िम्मेदारी दी गयी है।"


68 से 75 प्रतिशत एईएस केस में वजह अज्ञात

अमेरिकन जनरल ऑफ़ हेल्थ रिसर्च द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक एईएस होने की पीछे वायरस, बैक्टीरिया, फंगी एवं अन्य टोकसिंस ज़िम्मेदार होते हैं। जेई वायरस से फैलने वाला रोग होता है जिसे सामान्यता एईएस के लिए ज़िम्मेदार माना जाता है। जेई वायरस के अलावा डेंगू वायरस, एंटेरो वायरस, हर्पिस वायरस एवं मिजिल्स वायरस भी एईएस फ़ैलाते हैं। इनके बावजूद 68 से 75 प्रतिशत एईएस केस में इसके होने की वजह ज्ञात नहीं हो पाती है।

मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेमोरियल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. गोपाल साहनी ने बताया, " गर्मी के मौसम में एईएस तेजी से फैलता है। एईएस मच्छर के काटने से होता है। एईएस के मरीजों की पहचान का सबसे आसान तरीका है कि इसमें मरीज को काफी तेज बुखार आता है। ऐसे लक्षण दिखने पर बिना देर किए डॉक्टर को दिखाना चाहिए। कई बार बच्चे तेज बुखार के कारण बेहोश भी हो जाते हैं। वहीं, उल्टी भी करने लगते हैं। समय पर इलाज नहीं होने पर बच्चे की मौत भी हो सकती है।"

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मस्तिष्क ज्वर को जानें

एईएस को मस्तिष्क ज्वर भी कहा जाता है। समय से ईलाज कराने पर यह ठीक हो सकता है। अत्यधिक गर्मी की शुरुआत होने से एईएस से ग्रसित बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी शुरू होती है जो बारिश की शुरुआत पर ख़त्म हो जाती है। जबकि जेई की शुरुआत बारिश के बाद शुरू होती है एवं ठंड की शुरुआत होते ही ख़त्म हो जाती है। इनके लक्षणों को जानकर इसका सटीक उपचार संभव है।

- तेज बुखार आना

- चमकी अथवा पूरे शरीर या किसी खास अंग में ऐंठन होना

-दांत का चढ़ जाना

- बच्चे का सुस्त होना या बेहोश हो जाना

-शरीर में हरकत या सेंसेशन का खत्म हो जाना


सामान्य उपचार एवं सावधानियां

कुछ उपायों के माध्यम से बच्चे को इस रोग से बचाया जा सकता है। इसके लिए बच्चे को तेज धूप से बचाएं, बच्चे को दिन में दो बार नहाएं, गरमी बढ़ने पर बच्चे को ओआरएस या नींबू का पानी दें, रात में बच्चे को भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं, तेज बुखार होने पर गीले कपड़े से शरीर को पोछें, बिना चिकित्सकीय सलाह के बुखार की दवा बच्चे को ना दें, बच्चे की बेहोशी की हालत में उसे ओआरएस का घोल दें एवं छायादार जगह लिटायें एवं दांत चढ़ जाने की स्थिति में बच्चे को दाएं या बाएं करवट लिटाकर अस्पताल ले जाएं। इसके अलावा तेज रौशनी से मरीज को बचाने के लिए आंख पर पट्टी का इस्तेमाल करें एवं यदि बच्चा दिन में लीची का सेवन किया हो तो उसे रात में भरपेट खाना जरुर खिलाएं।

-बच्चे को मस्तिष्क ज्वर से बचाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी है

-बच्चों को खाली पेट लीची ना खिलाएं

-अधपके एवं कच्चे लीची बच्चों को खाने नहीं दें

-बच्चों को गर्म कपडे या कम्बल में ना लिटायें

-बेहोशी की हालत में बच्चे के मुँह में बाहर से कुछ भी ना दें

-बच्चे की गर्दन झुका हुआ नहीं रहने दें

- आपातकाल की स्थिति में निःशुल्क एम्बुलेंस के लिए टोल फ्री नंबर 102 पर संपर्क करें

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