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गांवों में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, यूपी के बस्ती में 50 तो बाराबंकी में मिले 95 कोविड पॉजिटिव मरीज

Daya SagarDaya Sagar   19 May 2020 6:56 PM GMT

गांवों में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, यूपी के बस्ती में 50 तो बाराबंकी में मिले 95 कोविड पॉजिटिव मरीज

बुंदेलखंड से अरविंद शुक्ला, पूर्वांचल से मिथिलेश धर दूबे, अवध से नीतू सिंह और झारखंड से कुशल मिश्र के इनपुट के साथ-

अभी तक महानगरों और बड़े शहरों में फैल रहा कोरोना अब बहुत तेजी से ग्रामीण भारत में पांव पसारने लगा है। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के बस्ती और बाराबंकी जिलों का हैं, जहां क्रमशः एक साथ 50 और 95 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले। बस्ती में सभी 50 कोविड मरीज प्रवासी हैं, जो श्रमिक स्पेशल ट्रेन से बस्ती आए थे। वहीं बाराबंकी में पाए गए 95 केस में 49 प्रवासी हैं।

बस्ती के जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने इस संबंध में मीडिया से बात करते हुए बताया कि ये सभी 50 मजदूर 12 मई को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से बस्ती आए थे। इसमें से 14 बस्ती जिले और बाकी के 36 गोरखपुर-बस्ती मंडल के पड़ोसी जिलों के प्रवासी मजदूर हैं। उन्होंने बताया कि इस ट्रेन में एक प्रवासी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी, उसके बाद उस कोच से उतरे सभी मजदूरों को जिला प्रशासन ने वहां से आगे नहीं जाने दिया और बस्ती में ही क्वारंटाइन किया गया। अगर ये प्रवासी अपने गांव लौटे होते तो स्थिति और भयानक हो सकती थी। बाद में मृतक शख्स कोरोना पॉजिटिव निकला था और फिर जांच के लिए भेजे गए ट्रेन में सवार अन्य प्रवासियों के सैम्पल भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए।

वहीं बाराबंकी जिले में जैसे एक साथ कोरोना का विस्फोट हुआ, जब बुधवार को वहां पर एक साथ कोरोना के 95 मरीज मिले। इस तरह जिले में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 124 हो गई, जिसमें सिर्फ 2 अभी तक ठीक हो पाए हैं। बाराबंकी के जिलाधिकारी आदर्श सिंह ने बताया कि 95 पाए गए मामलों में 46 कॉन्टैक्ट संक्रमण के शिकार हैं, जो जिले के पहले 6 कोरोना मरीजों से संक्रमित हुए हैं, जबकि 49 दूसरे राज्यों और जिलों से आए हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि समय रहते जांच कर लिया गया।




बस्ती और बाराबंकी के उदाहरणों से स्पष्ट हो रहा है कि कोरोना ग्रामीण भारत में तेजी से फैल रहा है। बस्ती और गोरखपुर मंडल में कुल 7 जिले हैं, जिसमें 19 मई को कुल 68 केस आए। बस्ती के अलावा देवरिया में नौ कोरोना पॉजिटिव केस मिले, इसमें भी अधिकतर प्रवासी हैं। वहीं गोरखपुर में मुंबई से लौटे एक युवक का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव निकला। इससे पहले संत कबीर नगर जिले में मुम्बई से पैदल आ रहे दो प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी। दोनों मजदूरों को बाद में कोरोना जांच पॉजिटिव निकला था।

पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड, बिहार, झारखंड सहित उन तमाम राज्यों में कोरोना के मामले बढ़ने लगे हैं, जहां पर प्रवासी अपने घर की तरफ लौटे हैं। आने वाले ज्यादातर लोग इंदौर, अहमदाहबाद, सूरत, मुंबई जैसे शहरों से हैं जहां पर कोरोना के केस सबसे ज्यादा है। बहुत तेजी से ग्रीन और ऑरेंज जोन के जिले रेड ज़ोन में तब्दील हो रहे हैं और यह सरकार व प्रशासन के सामने आने वाले दिनों में बहुत बड़ी चुनौती बनने वाली है।

पिछले एक सप्ताह में पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के 14 जिले ग्रीन जोन से रेड जोन में बदल गए, वहीं, गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, फतेहपुर, चित्रकूट, देवरिया, कुशीनगर और चंदौली सहित 12 जिले ग्रीन जोन से ऑरेंज जोन में पहुंच गए। ये सभी जिले ऐसे हैं, जहां पर ग्रामीण आबादी बहुत अधिक है और बाहर से प्रवासी मजदूर आए हैं।

पूर्वांचल के दूसरे हिस्से यानी बनारस वाले हिस्से में भी कोरोना तेजी से पैर पसार रहा है। गुरुवार 19 मई को वाराणसी में 14, गाजीपुर में 7, मिर्ज़ापुर में 6, चंदौली में 5 और बलिया में 1 कोरोना पॉज़िटिव केस मिला। वाराणसी, मिर्ज़ापुर और आज़मगढ़ मंडल को मिलाकर कुल 33 मामले एक ही दिन में सामने आये। इनमें से 26 प्रवासी कामगार हैं। वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्ज़ापुर, भदोही, चंदौली, मऊ, आज़मगढ़, बलिया और सोनभद्र जिलों में अब 265 मामलों की पुष्टि हो चुकी है।

बुन्देलखण्ड का ललितपुर यूपी के सबसे संवेदनशील जिलों में से एक है, जहां से सबसे ज्यादा प्रवासी उत्तर प्रदेश में आ रहे हैं या फिर प्रदेश से गुजर रहे हैं। ललितपुर की झांसी के अलावा बाकी सीमाएं मध्य प्रदेश से लगी हैं, मध्य प्रदेश निवाड़ी, टीकमगढ़, सागर, अशोक नगर, गुना, शिवपुरी और छतरपुर जिलों की सीमाएं ललितपुर से जुड़ी हैं। इन जिलों में मुख्य मार्गों के अतिरिक्त हजारों प्रवासी खेतों और दूसरे रास्तों से भी ललितपुर पहुंच रहे हैं, जिन्हें संभालना जिला प्रशासन के लिए मुश्किल भरा काम है।

ललितपुर के जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ला गांव कनेक्शन को बताते हैं, "अब तक एक लाख से ज्यादा प्रवासियों को ललितपुर से गुजारा जा चुका है। करीब 50 हजार प्रवासी सिर्फ ललितपुर आए, जो यहीं के निवासी हैं।" ललितपुर में फिलहाल कोरोना का कोई केस नहीं है, लेकिन अब जिस संख्या में प्रवासी जिले को लौटे हैं, प्रशासन भी चितिंत है। ऐसे में प्रशासन के साथ जागरुक ग्रामीण भी आशंका में हैं।


उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में रहने वाले हिमांशु गुप्ता बताते हैं, "जिले में 10 कोरोना संक्रमित मरीज हैं जो सभी प्रवासी मजदूर हैं। कोई भी स्थानीय व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव नहीं हैं। ये प्रवासी मजदूर अहमदाबाद, गुजरात, गुरुग्राम से वापस आये मजदूर हैं।"

वहीं कानपुर देहात जिले के पुखरायां कस्बे के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता संदीप बंसल बताते हैं, "जिले में एक भी कोरोना का मामला नहीं था लेकिन जबसे प्रवासी मजदूर पलायन करके आये हैं तबसे ग्रीन जोन से जिला ऑरेन्ज जोन में पहुंच गया है।"

वह आगे बताते हैं, "जो भी लोग बाहर से आ रहे हैं वो बात ही नहीं मानते किसी की। सब जगह ऐसे ही घूमते रहते। ग्राम प्रधान इसलिए कुछ नहीं कहता क्योंकि आने वाले समय में वोट बैंक का सवाल है।"

उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्य बिहार में भी स्थितियां तेजी से बिगड़ रही हैं। राज्य के 1500 से अधिक कोरोना मरीजों में लगभग 50 फीसदी मरीज प्रवासी हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शहरी क्षेत्र के मुकाबले गांव में 70 फीसदी संक्रमण फैल रहा है, क्योंकि प्रवासी मजदूरों का बड़ा तबका ग्रामीण क्षेत्रो में लौटा है। कई गांव नए हॉटस्पॉट बने हैं, जो कि चिंता का विषय है।

प्रवासी मजदूरों के लौटने से झारखंड में भी तेजी से मरीज सामने आ रहे हैं। जहां 18 मई को झारखंड में 8 नए मरीज सामने आए थे, वहीं 19 मई को ये आँकड़ा 16 पहुंच गया। राज्य प्रशासन के अनुसार ज्यादातर मामले प्रवासी मजदूरों के लौटने पर सामने आ रहे हैं। झारखंड में 19 मई तक 248 कोरोना संक्रमित मामले सामने आए हैं, इसमें 55 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। राज्य में अब तक एक लाख से अधिक प्रवासी श्रमिक पहुंचे हैं, जिनमें 100 के करीब कोरोना संक्रमित मिले हैं।

झारखंड में सबसे ज्यादा मरीज रांची, गढ़वा और हज़ारीबाग़ जिले में सामने आएं हैं। प्रवासी मजदूरों के लौटने से गांवों में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। अभी 19 मई तक झारखंड के 24 में से 20 जिलों में कोरोना से संक्रमित मरीज सामने आ चुके हैं।

झारखण्ड में प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली बताते हैं, "झारखण्ड में प्रवासी मजदूरों के पहुँचने से गांवों में संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ा है। हर रोज नए मामले सामने आ रहे हैं और जिन जिलों में अभी तक संक्रमण नहीं फैला था, वहां भी उनके पहुँचने से बढ़ रहा है।"

सिकंदर बताते हैं, "अभी तो रांची में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं, यहाँ के डूंगरी पंचायत के मुरूंगटोली गाँव में एक कोरोना मरीज सामने आने के बाद पूरे गाँव को सील कर दिया गया है। इसके अलावा हजारीबाग जिले के करबालो गाँव में भी मरीज सामने आने के बाद प्रशासन सख्त रैवैया अपना रहा है।"

कहां हो रही है चूक?

प्रवासी मजदूर परदेस से तो आ रहे हैं, लेकिन उन्हें क्वारंटीन करने में शासन प्रशासन की लापरवाही दिख रही है। बसों, ट्रकों में सवार होकर वह जैसे आ रहे हैं, उसमें सोशल डिस्टेंसिंग की उम्मीद करना बेमानी भी है। इसलिए अगर एक प्रवासी को कोरोना हो रहा है, तो अन्य लोगों को भी कोरोना होने का खतरा बढ़ा है। बस्ती की घटना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां पर एक साथ 50 प्रवासी मजदूर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इससे पहले संत कबीर नगर के मगहर में भी एक परिवार के 25 से अधिक लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे क्योंकि बाहर से आए शख्स ने होम क्वारंटाइन के नियमों का पालन सही से नहींं किया था।

कई जगह प्रवासी भी सोशल डिस्टेंसिंग और क्वारंटीन के मानकों का पालन करते हुए नहीं दिख रहे हैं। वहीं क्वारंटीन सेंटरों की खराब व्यवस्था भी उन्हें क्वारंटीन सेंटरों से भागने पर विवश कर रही है। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से प्रवासी मजदूरों के भागने की खबरें आती रही हैं। वहीं बिहार में क्वारंटीन सेंटर में ही मनोरंजन के साधन उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा है। एक वीडियो मंगलवार से ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें बिहार के एक क्वारंटीन सेंटर में क्वारंटाइन लोग स्थानीय लोकनृत्य का लुत्फ उठा रहे हैं।


इसके अलावा लोगों में कोरोना को लेकर लापरवाही भी दिख रही है। मंगलवार को ही मिर्ज़ापुर की कचहरी में जब गांव कनेक्शन की टीम पहुंची तो वहां काम सामान्य दिनों की तरह चल रहा था। न तो किसी में मास्क की फिक्र दिखी न ही कोई सोशल डिस्टेसिंग का पालन करता दिखा। कचहरी में प्रैक्टिस करने वाले वकील देवी शंकर मिश्रा कहते हैं, "यहां लॉकडाउन का पालन शहरों की तरह नहीं हो रहा, जबकि अब हमारे जिले में मामले रोज बढ़ रहे हैं। जैसे किसी में डर ही नहीं है।"

मिर्ज़ापुर के कछवां बाजार के आसपास कोरोना के 5 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। यहीं के गांव विदापुर निवासी विवेक मिश्रा कहते हैं, "रोज मुंबई से लोग चले आ रहे हैं। कोई बाहर नहीं रुक रहा। सभी लोग गांव में घूम रहे हैं। कोई कुछ मानने को तैयार ही नहीं है। मेरे आसपास के गांवों में कई मामले सामने आ चुके हैं, वे सभी बाहर से आये हैं।"

क्या हो सकता है उपाय?

कोरोना वायरस की अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है और निकट भविष्य (एक-दो महीने) में इसके बनने के कोई आसार भी नजर नहीं आते। तमाम विशेषज्ञ सोशल डिस्टेंसिंग को ही एकमात्र इसका उपाय बता रहे हैं। इसलिए भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में लॉकडाउन हुआ, लेकिन प्रवासी मजदूरों की समस्या और सरकारों द्वारा उसे ठीक से संभाल नहीं पाने के कारण भारत में लॉकडाउन का उतना अधिक प्रभाव नहीं दिखा है।

सबसे जरूरी यह है कि लोग अगर कहीं से आ भी रहे हैं तो लॉकडाउन का पालन करें। अगर उन्हें होम क्वारंटाइन किया जाता है, तो वह घर के एक कमरे में ही खुद को समेट लें। अपने घर वालों से भी उचित दूरी बनाए रखें। और अगर उन्हें किसी क्वारंटाइन सेंटर में रखा जाता है तो सरकार द्वारा बनाए गए मानकों और नियमों का पालन करें। सरकार को भी चाहिए कि वह क्वारंटाइन सेंटरों की स्थिति बेहतर करे ताकि वहां पर रहने वाले प्रवासियों को कोई असुविधा नहीं हो। इसमें स्थानीय प्रशासन जैसे- ग्राम प्रधान, नगर निकाय चेयरमैन का अहम योगदान हो सकता है।

जैसा कि ग्रामीण सूरज गांव कनेक्शन को बताते हैं कि उनके गांव में कोरोना का एक भी मरीज नहीं मिला है, लेकिन गांव के प्रधान और स्थानीय अधिकारी भी काफी सुस्त हैं। उन्होंने बताया कि उनके गांव में अब तक कोई भी अधिकारी नहीं आया है और राशन वितरण व अन्य कार्यों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कैसे हो रहा है, यह भी देखने वाला कोई नहीं है।

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के पहाड़पुर गाँव के रहने वाले सूरज बताते हैं, "हमारे गाँव में एक क्वारंटाइन सेंटर बना है लेकिन वो भी बहुत ख़राब हालत में है। अभी मेरे पापा भी लॉकडाउन के दौरान गाज़ियाबाद में फंस गए थे। अभी 10 दिन पहले गाँव आये हैं तो हमने उनके लिए घर के बाहर ही एक कमरानुमा बनाया है जहाँ वे रह रहे हैं, अभी हम 15-16 दिन तक उन्हें वहीं रखेंगे। मगर गाँव के और लोग वायरस को लेकर जागरूक नहीं हैं।"

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