साल 2021 में गाँव कनेक्शन में सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली 10 खबरें

ग्रामीण भारत के मीडिया संस्थान ने सीमित संसाधनों ने 2021 में देश के अलग-अलग राज्यों से हजारों खबरें की । जिसमें कई गंभीर मुद्दे थे, तो कई लोगों के सरोकार की, कुछ खबरें ऐसे थीं, जिन्हें लोगों की काफी सराहना मिली। इस लिस्ट में वो 10 खबरें जो लोगों ने वेबसाइट पर खूब पढ़ी हैं।

साल 2021 में गाँव कनेक्शन में सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली 10 खबरें

साल 2021 भी अनिश्चितताओं भरा साल रहा, 2020 के बाद यह साल कोविड की दूसरी लहर लेकर आया, जिसने लाखों को लोगों को प्रभावित किया, लेकिन वैक्सीन के जरिए कुछ उम्मीद की रोशनी भी दिखी।

इस साल भी गाँव कनेक्शन देश के विभिन्न राज्यों से अपने पाठकों और दर्शकों के लिए ऐसी खबरें लाता रहा, जहां तक लोग नहीं पहुंच पाते हैं। चाहे वो किसानों के मुद्दे रहे हों या फिर स्वास्थ्य के मुद्दे सभी खबरों को जिनसे ग्रामीण भारत का सरोकार है, उन्हें गाँव कनेक्शन प्रमुखता से उठाता रहा।

कोविड महामारी और वैक्सीनेशन को लेकर भी लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने का काम गाँव कनेक्शन ने किया। इस साल कृषि कानूनों के खिलाफ किसान देश की राजधानी में डटे रहे तो गाँव कनेक्शन ने उनकी बात भी लोगों तक पहुंचाता रहा, लेकिन साल के जाते जाते उन्हें भी सरकार ने एक नई उम्मीद दी।

कोविड-19 की धुंध के बीच गाँव कनेक्शन ने कुछ ऐसी भी खबरें आप तक पहुंचायी, जिससे उम्मीद की रोशनी कायम रहे। किसानों और पशुपालकों के लिए काम खबरें भी लाते रहे।

गाँव कनेक्शन की 2021 की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली 10 खबरें जिसे देश के लाखों ने पढ़ा और उनसे कुछ जानकारी भी हासिल की।

1) पपीते की खेती में किसानों को दिखा फायदा

पिछले कुछ वर्षों में किसानों ने परंपरागत खेती से हटकर बागवानी फसलों की तरफ रुख किया है। किसान कुछ न कुछ नया आजमाना चाहते हैं, ऐसे में देश के लाखों किसानों ने पपीता की खेती के बारे में पढ़ा, गाँव कनेक्शन ने पपीता की खेती के बारे में इस खबर में विस्तार से जानकारी दी है। पपीता की खेती शुरू करने के लिए किसान खेत की तैयारी से लेकर बुवाई के सही तरीके को इस खबर के जरिए समझाया गया है।

2) पशुपालकों के लिए मुसीबत बनी लम्पी स्किन डिजीज

देश की एक बड़ी आबादी पशुपालन से जुड़ी हुई है, ऐसे में साल के शुरुआत में पशुओं की बीमारी लम्पी स्किन डिजीज ने लोगों का ध्यान खींचा।

वैसे तो इस बीमारी को साल 2019 में सबसे पहले भारत में देखा गया था, बीमारी के चपेट में आते ही पशु दूध देना कम कर देते हैं, इस बीमारी का अभी कोई इलाज भी नहीं है। लेकिन जनवरी 2021 तक यह बीमारी तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक, केरल, असम, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों तक पहुंच गई।

लम्पी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी होती है, जो गाय-भैंसों में होती है। लम्पी स्किन डिजीज में शरीर पर गांठ बनने लगती हैं, खासकर सिर, गर्दन, और जननांगों के आसपास। धीरे-धीरे ये गांठ बड़ी होने लगती हैं और घाव बन जाता है। पशुओं को तेज बुखार आ जाता है और दुधारू पशु दूध देना कम कर देते हैं, मादा पशुओं का गर्भपात हो जाता है, कई बार तो पशुओं की मौत भी हो जाती है। एलएसडी वायरस मच्छरों और मक्खियों जैसे खून चूसने वाले कीड़ों से आसानी से फैलता है।

3) जवाहर मॉडल: खेत में नहीं बोरियों में उगाइए फसलें

जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने 'जवाहर मॉडल' तैयार किया है, इसमें किसान खेत में नहीं बोरियों में कई तरह की फसलें उगा सकते हैं। यही नहीं इस मॉडल में खेती की लागत भी काफी कम हो जाती है।

'जवाहर मॉडल' को जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है, जिसमें किसान के जुताई जैसे बहुत से खर्चे बच जाते हैं। इसके जरिए किसान अपनी बेकार और बंजर पड़ी जमीन में फसलें उगा सकते हैं, यही नहीं घर की खाली पड़ी छतों पर भी कई तरह की फसलें लगा सकते हैं।

एक एकड़ में लगभग 1200 बोरियां रख सकते हैं, यही नहीं अरहर के साथ दूसरी फसल भी ले सकते हैं। जैसे कि बोरी में धनिया भी लगा सकते हैं। एक बोरी में लगभग 500 ग्राम तक धनिया की हरी पत्तियां मिल जाती हैं। यही नहीं बोरी में हल्दी भी लगा सकते हैं। हल्दी जैसी फसलें छाव में भी तैयार हो जाती है और एक बोरी में लगभग 50 ग्राम हल्दी का बीज लगता है और छह महीने में 2-2.5 किलो तक हल्दी और अरहर के एक पौधे से 2-2.5 तक अरहर भी मिल जाती है।

4.) जब डीएपी और एनपीके बढ़ गए दाम

देश की बड़ी आबादी खेती से जुड़ी हुई, ऐसे में वो खेतों डीएपी व एनपीके जैसे उर्वरकों का भी इस्तेमाल करते हैं।

दरअसल, सोशल मीडिया और किसानों के व्हाट्सअप ग्रुप में 7 अप्रैल से विश्व की सबसे बड़ी उर्वरक सहकारी संस्था इफको का मेल वायरल हो रहा था, जिसमें कहा गया था कि कि फास्फेट फर्टिलाइजर में भारी बढ़ोतरी हो गई है।

लेकिन इफको ने कहा कि नए रेट किसानों के लिए लागू नहीं है। इफको के पास 11.26 लाख टन कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर (डीएपी,एनपीके) मौजूद हैं और किसानों के पुराने रेट पर ही मिलेंगी। इफको ने संकेत दिए हैं कि जल्द नए संशोधित रेट जारी किए जा सकते हैं।

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5.) सरसों की खेती में

राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों में किसान सरसों की खेती करते हैं। साल 2021 में सरसों के तेल के दाम आसमान छू रहे थे। इसलिए किसान पहले से ही सरसों की खेती की तैयारी में थे, ऐसे में सरसों की अगेती खेती की जानकारी लोगों के लिए फायदेमंद साबित हुई।

इस खबर में सरसों की खेती की तैयारी से लेकर, किस्म के चुनाव और बुवाई के सही तरीके की जानकारी विस्तार से दी गई है।

सरसों की खेती: बढ़िया उत्पादन के लिए कब और कैसे करें बुवाई

6.) प्रगतिशील किसान की सफलता की कहानी

देश में बागवानी फसलों की बढ़ती मांग को देखते हुए कई किसानों ने पारंपरिक खेती से हटकर फलों की खेती का रुख किया है। जानकारों के मुताबिक बागवानी में भी वो किसान ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं जो क्वालिटी युक्त, बाजार की मांग के अनुसार खेती करते हैं। ऐसे ही एक किसान हैं मध्य प्रदेश के राजेश पाटीदार जो जैविक तरीके से बागवानी कर रहे हैं।

इंदौर के किसान राजेश पाटीदार अपने आसपास के ज्यादातर किसानों की तरह आलू, प्याज और लहसुन की खेती करते थे लेकिन लागत के अनुरूप में मुनाफा नहीं हो रहा, इसलिए राजेश ने अमरूद की बागवानी शुरु की। 3 एकड़ जमीन के मालिक राजेश पाटीदार पिछले 4 साल से थाई अमरुद की खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें सालाना करीब 5 लाख रुपए की कमाई होती है।

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से करीब 55 किलोमीटर जमली गांव में राजेश पाटीदार की जमीन है, जिसमें वो अमरुद की खेती और उसके बीच में मौसम के हिसाब से सफेद मूसली, अदरक या हल्दी की इंटरक्रॉपिंग करते हैं।

आलू और प्याज की खेती छोड़ 3 एकड़ में लगाया थाई अमरुद का बाग, सालाना 5 लाख की कमाई

7.) देश में भैंस की प्रमुख नस्लें

भारत, विश्व में भैंसों की सबसे अधिक आबादी वाला देश है और देश की एक बड़ी आबादी भैंस पालन से जुड़ी हुई है, लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि देश में कितनी तरह की भैंस पाई जाती हैं? कौन सबसे अधिक दूध देने वाली नस्ल है?

केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान के अनुसार देश में भैंस की मुर्रा, नीली रावी, जाफराबादी, नागपुरी, पंढरपुरी, बन्नी, भदावरी, चिल्का, मेहसाणा, सुर्ती, तोड़ा, स्वैप, तराई, जेरंगी, कालाहांडी, परलाखेमुंडी, मंडल/गंज, मराठवाड़ी, देशिला, असामी/मंगूस, संबलपुरी, कुट्टांड, धारावी, साउथ कन्नारा, सिकामीस और गोदावरी जैसी 26 तरह की नस्लें हैं। इनमें से 12 नस्ल की भैंस रजिस्टर्ड नस्लें हैं, जो कि ज्यादा दूध देती हैं। इनमें मुर्रा, नीली रावी, जाफराबादी, नागपुरी, पंढरपुरी, बन्नी, भदावरी, चिल्का, मेहसाणा, सुर्ती, तोड़ा, जैसी भैंस शामिल हैं।

20वीं पशुगणना के अनुसार, देश में भैंसों की आबादी 109.9 मिलियन है, जबकि अगर प्रदेश के हिसाब से बात करें तो सबसे अधिक भैंसों की संख्या उत्तर प्रदेश में है, उसके बाद राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे प्रदेश आते हैं। भारत में 12 तरह की भैंसों की नस्लें पाई जाती हैं, हर भैंस की अपनी खासियत होती है, आइए जानते हैं कौन सी भैंस की क्या खूबियां हैं।

ज्यादा दूध देने वाली भैंस की इन 12 नस्लों के बारे में जानते हैं?

8.) गेहूं की उन्नत किस्मों की ऑनलाइन बुकिंग

कोविड महामारी के चलते गेहूं जैसी फसलों की उन्नत किस्मों के बीज की ऑनलाइन बुकिंग शुरू की गई है। किसान बेहतर उपज के लिए उन्नत किस्मों का चयन करते हैं, हरियाणा के करनाल में स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) में हर साल किसान मेले का आयोजन कर किसानों को बीज दिया जाता था। लेकिन पिछले साल से संस्थान ने ऑनलाइन बुकिंग शुरु की थी।

इस बार भी गेहूं की करण वंदना और करण वैष्णवी की ऑनलाइन बुकिंग शुरू की गई, किसान कैसे इन किस्मों की बुकिंग कर सकते हैं और इन किस्मों की क्या खासियते हैं, इनकी कब बुवाई करनी चाहिए, जैसी जानकारियां इस खबर के माध्यम से दी गई है।

गेहूं की उन्नत किस्मों के लिए ऑनलाइन बुकिंग शुरु: करण वंदना और करण नरेंद्र की जानिए खूबियां

9.) बासमती की किस्मों की बिक्री

उत्तर प्रदेश के तीस जिलों के साथ ही पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बासमती धान की खेती होती है। किसान के सामने सबसे बड़ी समस्या अच्छे किस्म की बीज की आती है।

बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान, मोदीपुरम और सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ में भी इस बार बासमती धान के बीजों की ऑनलाइन बुकिंग शुरू की गई है। जहां पर पूसा बासमती 1121, पूसा बासमती 1509, पूसा बासमती 1, पूसा बासमती 1637, पूसा बासमती 1728, पूसा बासमती 1718 प्रजाति के बीज ले सकते हैं। इस खबर में धान की किस्मों की बिक्री की जानकारी दी गई थी कि किस तरह से किसान बीज खरीद सकते हैं।

बासमती धान की खेती करने वाले किसानों के लिए बढ़िया मौका, यहां से खरीद सकते हैं बीज

10.) सोयाबीन की नई कीट प्रतिरोधी किस्म

वैज्ञानिकों ने सोयाबीन की नई किस्म विकसित की है, जिसकी खेती करने पर किसानों का कीटनाशक और दवाओं का खर्चा बचेगा और उत्पादन भी अच्छा मिलेगा। आघारकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (एआरआई), पुणे के वैज्ञानिकों सोयाबीन की नई किस्म एमएसीएस 1407 विकसित की है। यह किस्म असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर राज्यों में खेती के लिए सही है।

वैज्ञानिकों ने विकसित की सोयाबीन की नई कीट प्रतिरोधी किस्म, मिलेगी बढ़िया पैदावार

सभी पाठकों को नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। गाँव कनेक्शन पढ़ते रहिए क्योंकि हम आपके लिए ग्रामीण भारत की ऐसी कहानियां लाते हैं जिनसे आपका सरोकार है।

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