Union Budget 2019: ग्रामीण महिलाओं ने कहा- हमें योजनाओं का लाभ मिले तो खुशी होगी

जब गाँव कनेक्शन की टीम माल ब्लॉक के नरसिंह खेड़ा गांव पहुंची तो गांव की महिलाएं इस बात से पूरी तरह से बेखबर दिखीं कि शुक्रवार को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का संसद में बजट पेश हो रहा है, जिसमें उनके भी फायदे की बात हो सकती है।

Neetu SinghNeetu Singh   5 July 2019 1:36 PM GMT

Union Budget 2019: ग्रामीण महिलाओं ने कहा- हमें योजनाओं का लाभ मिले तो खुशी होगी

लखनऊ। जब देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में आम बजट 2019 पेश कर रहीं थीं तब लखनऊ से लगभग 45 किलोमीटर दूर पचास वर्षीय जगदेई देवी ये जानकर खुश हुई कि अब स्वयं सहयता समूह से जुड़ी हर महिला को मुद्रा योजना के तहत एक लाख रुपए का लोन मिल सकेगा।

जब गाँव कनेक्शन की टीम माल ब्लॉक के नरसिंह खेड़ा गांव पहुंची तो गांव की महिलाएं इस बात से पूरी तरह से बेखबर दिखीं कि शुक्रवार को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का संसद में बजट पेश हो रहा है, जिसमें उनके भी फायदे की बात हो सकती है। गाँव कनेक्शन की टीम ने उन्हें बजट की बातों को बताया तब उन्होंने दिलचस्पी दिखाई।

जहाँ वे बजट में महिला उद्यमियों को बढ़ावा और आर्थिक रूप से सशक्त करने की बात से खुश दिखीं, वहीं सरकारी योजनाओं की जानकारी ना होने और इन योजनाओं का लाभ मिलने में अड़चनें आने पर उनमें नाराजगी भी दिखी।

जगदेई की तरह वहां बैठीं लगभग 20 महिलाएं इस बात से प्रसन्न थीं कि अब जनधन योजना खाते में ओवरड्राफ्ट के तहत वे 5,000 रुपए निकाल सकती हैं और जब पैसे हो जायें तब उन्हें वापस बैंक में जमा कर सकती हैं।


जगदेई ने बताया, "आज पहली बार हमें पता चला कि बजट से हमें भी फायदा होगा। पर जब वास्तव में फायदा हो जाएगा तभी हमें भरोसा होगा। हम लोग पढ़े-लिखे तो हैं नहीं इसलिए सरकार की हर योजना का लाभ हमें नहीं मिल पाता।"

वो आगे कहती हैं, "शौचालय हमें मिला नहीं, आवास भी नहीं मिला। इसलिए सरकार जब भी कोई घोषणा करती है तो हमें भरोसा नहीं होता है। अगर समूह में एक लाख रुपया लोन मिल जाएगा तो हम कोई बिजनेस कर लेंगे।"

जगदेई भीमराव अम्बेडकर स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। जगदेई सरकार की योजनाओं से खुश नहीं है। इस बात पर उन्होंने नाराजगी भी जताई, "हमें आजतक आवास नहीं मिला है, घर के बाहर तालाब है जिससे बरसात में घर में पानी भर जाता है। चार साल पहले इसी पानी में डूबकर हमारी दो साल की पोती मर गयी थी।"


बजट में प्रधानमन्त्री आवास योजना के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि वर्ष 2022 तक 1.95 करोड़ गरीब परिवारों को घर उपलब्ध करवाए जाएंगे जिसमें एक मकान बनने में मात्र 114 दिन लगेंगे। इससे पहले एक आवास बनवाने में 314 दिन लगते थे।

वित्त मंत्री की इस बात से कुमकुम देवी (32 वर्ष) काफी खुश दिखीं। उन्होंने कहा, "पिछले दो साल से हमारी आवास योजना का पैसा फंसा है जो किस्तों में आ रहा है। जिसकी वजह से मकान अभी तक पूरा नहीं हुआ है। अगर इतने कम दिनों में आवास बन जाएगा तो सबको फायदा होगा। अभी तो एक आवास बनवाने के लिए सालों चक्कर काटने पड़ते हैं तब भी पैसा नहीं मिलता है।"

वहीं 65 वर्षीय लक्ष्मीं देवी ने कहा, "हम लोग पढ़े-लिखें नहीं हैं। सरकार की क्या योजना है, बजट क्या है इसकी कोई खबर हमें नहीं होती। हम तो बस इतना जानते हैं कि हमें किसी भी योजना का लाभ लेने में बहुत मुश्किल आती है। बाकी चीजें तो छोड़ दो जिन चीजों की रोज जरूरत होती है उसका भी लाभ नहीं मिलता।"

लक्ष्मी देवी को अभी तक स्वच्छ भारत मिशन के तहत न तो शौचालय मिला और है न ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर। उन्होंने कहा, "जब तक हमें किसी योजना का लाभ नहीं मिलेगा तो हमें कैसे लगे कि ये योजना हमारे लिए बनाई गई। बातें बहुत बड़ी-बड़ी होती हैं पर हकीकत में ज्यादा कुछ काम नहीं होता।"



मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में बजट पेश कर रहीं वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि स्टैंड अप इण्डिया के तहत महिला उद्यमियों को लाभ मिलेगा। इस पर आरती देवी (33 साल) ने कहा, "हम गाँव में खाली बैठे रहते हैं कोई काम धाम यहाँ नहीं रहता। अगर हमें समूह से एक लाख रुपए का लोन मिलेगा तो हम कोई कामकाज घर बैठे शुरू कर सकते हैं। अगर सरकार की तरफ से भी मदद मिल जायेगी तो हमारा काम काज चल जाएगा। पर ये तभी होगा जब हमें इसका लाभ मिलेगा।"

इन महिलाओं ने धरातल की उस तस्वीर को भी बताने की कोशिश की जिसमें उनकी नाराजगी साफ़ दिखी। वहां खड़ी अनुपमा देवी ने गाँव कनेक्शन की टीम को देखकर ये समझा कि आवास देने वाले लोग आये हैं जो नाम लिख रहे हैं। वो अपने गिरे हुए मिट्टी के मकान को दिखाते हुए बोलीं, "तीन साल से ये मकान बन नहीं पाया है क्योंकि एक क़िस्त 30,000 की आई, उसके बाद पैसा ही नहीं आया। अगर एक साथ पैसा मिलता तो ये घर पूरा बन जाता अभी रहने में बहुत दिक्कत होती है।"

वहीं वात्सल्य संस्था में काम कर रही कम्युनिटी मोबलाइजर वैशाली चौहान ने कहा, "आज बजट पेश हो रहा है, यह बात गाँव तक पहुंच ही नहीं पाती। इन्हें पता ही नहीं होता है कि हमारे लिए भी कोई बात हुई है। ये अपनी मूलभूत जरूरत शौचालय, आवास, पानी इसी में उलझ जाते हैं। इस बजट में न तो महिला सुरक्षा को लेकर बात हुई न ही स्वास्थ्य पर जो की अहम मुद्दे थे।" उन्होंने आगे कहा, "महिलाओं को अभी तक ये नहीं पता था कि जनधन योजना के तहत दो हजार रुपए निकाले जा सकते हैं जो आज बढ़ाकर पांच हजार किये गये हैं। बजट में जो बातें पेश हो उसकी चर्चा ग्रामीण क्षेत्रों तक आनी चाहिए जिससे इन्हें इसका लाभ मिल सके।"


इस गाँव की रूचि (20 वर्ष) ने कहा, "पहली बार तो हमसे बजट पर किसी ने राय पूछी है। इससे पहले न हमें पता था न हमें बताया गया। अगर लड़कियों की स्नातक तक की शिक्षा मुफ्त हो जाती तो गाँव की लड़कियाँ आसानी से अपनी पढ़ाई पूरी कर पातीं। बजट में इस पर बात हुई कि नहीं ये तो हमें नहीं पता पर अगर ऐसा होता हो बहुत अच्छा होता।" वहीं रूचि ने लड़कियों की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा, "सरकार को हमें पढ़ाने से ज्यादा हमारी सुरक्षा पर ध्यान दे जो हमारे लिए बहुत जरूरी है।"

बजट में महिलाओं के लिए ये थी महत्वपूर्ण घोषणाएं

1- वित्र मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि स्टैंड अप इंडिया स्कीम के तहत महिला उद्यमियों को लाभ मिलेगा। इसके लिए टीवी चैनल प्रोग्राम शुरू किये जाएंगे।

2- वित्त मंत्री ने कहा कि महिलाओं के विकास के बिना देश का विकास नहीं हो सकता। ऐसे में जनधन खाताधारक महिलाओं को 5,000 रुपए ओवरड्राफ्टिंग की सुविधा दी जायेगी। इसके तहत खाते में पैसे न होने के बाद भी 5000 रुपए निकाले जा सकेंगे।

जनधन योजना के तहत पहले भी महिलाएं अपने खाते में पैसे न होने पर दो हजार रूपये तक निकाल सकती थी। लेकिन इस बार बजट में इस रकम को बढ़ाकर पांच हजार रूपये कर दिया गया है।

3- मुद्रा योजना के तहत स्वयं सहायता समूह की एक महिला को एक लाख रुपए तक ऋण दिया जायेगा।

4- 'नारी तू नारायणी' योजना लॉन्च होगी। जिसके तहत एक कमेटी बनेगी जो देश के विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का सुझाव देगी।

5- अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए समिति के गठन का प्रस्ताव रखा गया है।

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