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इस समाज सेवक ने कठिन परिश्रम से बचा ली पहाड़ की शिप्रा नदी

नैनीताल जिले के कस्बा भवाली में रहने वाले जगदीश नेगी शिप्रा नदी को साफ-सुथरा करने, शहर को स्वच्छ बनाने और पेड़ लगाकर पर्यावरण को बचाने का बीड़ा उठाया। इस काम में कही हद तक वह कामयाब भी हैं।

Mo. AmilMo. Amil   3 July 2019 7:38 AM GMT

इस समाज सेवक ने कठिन परिश्रम से बचा ली पहाड़ की शिप्रा नदी

भवाली (नैनीताल)। अगर व्यक्ति कुछ करने की ठान लेता है तो उसे उस काम को पूरा करने में कठिनाई नहीं होती है। कुछ ऐसा ही प्रयास समाज सेवक जगदीश नेगी उत्तराखण्ड़ की विलुप्त होती शिप्रा नदी एवं पर्यावरण को बचाने का कर रहे हैं।

नैनीताल जिले के कस्बा भवाली में रहने वाले जगदीश नेगी शिप्रा नदी को साफ-सुथरा करने, शहर को स्वच्छ बनाने और पेड़ लगाकर पर्यावरण को बचाने का बीड़ा उठाया। इस काम में कही हद तक वह कामयाब भी हैं। गाँव कनेक्शन से बात करते हुए वह बताते हैं, "पहले लोग कहते थे कि तुम्हारे कूड़ा-कचरा उठाने से कुछ नही होगा। कुछ समय में तुम अपना अभियान बन्द कर दोगे, लेकिन हम चुपचाप लगे रहे, जिसका नतीजा सुखद रहा। अब लोग हमारे कार्य की सराहना कर रहे है। हमारे कार्य से शिप्रा नदी काफी प्रसिद्ध हुई है।"

"हमारे सफाई अभियान के कारण ही सरकार ने शिप्रा नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 13 करोड़ 45 लाख की भारी भरकम योजना बनाई है। पहले नदी को लोग कूड़ेदान की तरह प्रयोग करते थे। लोग खुलेआम नदी में कूड़ा-कचरा को फेकते थे। लेकिन अब ऐसा नही है लोगों में जागरूकता आयी है। भवाली शहर भी अब पहले से काफी अधिक स्वच्छ हो गया है। पालिका भी अच्छा कार्य कर रही है।" जगदीश नेगी ने बताया।

जगदीश नेगी चेहरे पर हल्की मुस्कान लाते हुए बताते हैं, "राजस्थान जैसे कम वर्षा वाले प्रदेश में जल पुरुष राजेन्द्र सिंह पांच सूख चुकी नदियों को पुनर्जीवित कर सकते है, तो शिप्रा नदी भी निश्चित रूप से पुनर्जीवित की जा सकती है। भले ही इसमें कुछ समय लग जाये। शिप्रा नदी में गिरने वाले गधेरों को बांधना होगा। यही गधेरे नदियों को जीवित करते है। शिप्रा नदी की कई दशकों से सुध नही ली गयी। इसमे कूड़ा-कचरा और सीवर भी डाले जा रहे हैं, जिन्हें रोकना होगा। नदियाँ हमारी माँ है, जीवनदायिनी है इन्ही से जीवन है, इनको न बचाया गया तो भविष्य बहुत दुःखद होगा।"

शुरुआत में मिला लोगों का साथ, फिर रह गए अकेले

शिप्रा नदी को साफ और स्वच्छ बनाने की शुरुआती मुहिम में लोगों का साथ मिला, लेकिन धीरे-धीरे लोग इस अभियान से अलग होने लगे। जगदीश नेगी कहते हैं, "नदी की दुर्दशा को देखकर मुझे बहुत दुख होता था क्योंकि यह नदी पहले काफी अच्छी थी लेकिन धीरे-धीरे लोगो ने इसे एक कूड़ेदान की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इसी नदी के किनारे भवाली का श्मसान घाट भी है। सीवर मिश्रित जल में अंतिम संस्कार हो रहे है, यह बहुत बुरा लगा। यह नदी परम् पूज्य बाबा नीब करोरी महाराज के धाम से होकर भी गुजरती है। इसमे फेंका गया कूड़ा-कचरा आदि धाम तक भी पहुचता था। इन्ही कारणों से मुझे नदी को साफ करने का निर्णय लेना पड़ा।"

वह कहते हैं, "शुरू में नगर पालिका चेयरमैन और उनके सफाई कर्मी भी कुछ हफ़्तों तक हमारे साथ सफाई में आये थे। कुछ दिनों में धीरे-धीरे हम अकेले हो गए। फिर मैंने और मेरे चचेरे भाई पीयूष ने मजदूरों के साथ नदी को साफ किया। बहुत मुश्किल काम था शहर के लोगो का सहयोग भी नही था और लोग हमारा मजाक बनाते थे। नदी की दुर्दशा हो गयी थी कूड़े-कचरे, सीवर आदि से कार्य करने में भी गन्दगी के कारण बहुत परेशानी उठानी पड़ी। मुझे भी पता था कि हमारे कूड़ा कचरा हटाने से शिप्रा नदी नही बचेगी लेकिन हमारे अभियान से व्यापक जागरूकता आयी है। हमारे अभियान से प्रेरित होकर आस-पास के इलाकों में कई लोग सफाई अभियानों को चला रहे है। लोग हमारे कार्य की सराहना मुक्त कंठ से कर रहे है और हमारे कार्य से प्रेरणा ले रहे है।"

2015 से शुरू किया नदी बचाने का अभियान, 100 ट्रक निकाल दिया कचरा

भवाली में बहने वाली शिप्रा नदी एक दूषित नाले में तब्दील हो चुकी थी उसे बचाने के लिए जगदीश नेगी आगे आए। उन्होंने इसके लिए 19 जनवरी 2017 को शिप्रा कल्याण समिति का गठन किया। वह बताते हैं, "11 अक्टूबर 2015 को मेरे द्वारा भवाली की शिप्रा नदी को साफ करने का अभियान शुरू किया गया। हर हफ्ते रविवार को सफाई अभियान चलाया गया। इस तरह हमने नदी से करीब100 ट्रक कूड़ा कचरा निकाल दिया और इसे नगर पालिका को सौंप दिया। सबसे पहले हमने उन स्थानों से कचरा निकाला जहां लोगो और पालिका ने कूड़ा कचरा डालकर नदी के किनारे काफी बड़े-बड़े ढेर लगा दिए थे। नदी के आस पास के लोगो से भी निवेदन किया कि नदी में कूड़े कचरे को न फेंके। धीरे-धीरे लोगो मे जागरूकता आयी और नदी में कूड़े कचरे की मात्रा काफी कम हो गयी।"


वह आगे बताते हैं, "हमने वर्ष 2016 बसंत पंचमी से नदी में जनेऊ संस्कार भी शुरु करवाये। इस नदी में गन्दगी के कारण पिछले20 वर्षों से ज्यादा समय से जनेऊ संस्कार बन्द हो गए थे। वर्ष 2017 और 2018 में भी इसमें जनेऊ संस्कार करवाये गए। इससे लगभग 70 प्रतिशत कूड़ा-कचरा पहले से कम हो गया है। साथ ही 40 ओपन सीवर के लिए हमारे प्रयास से सीवर पिट बन गए है। शहर के लोगो मे स्वच्छता के प्रति काफी जागरूकता आयी है।

उत्तरवाहिनी पवित्र नदी है शिप्रा, 22 वर्ष पहले पानी से रहती थी लबालब

जगदीश नेगी शिप्रा नदी के बारे में बताते हैं, "ये नदी एक उत्तरवाहिनी नदी है। उत्तरवाहिनी नदियाँ बहुत कम होती है। उत्तरवाहिनी नदियों को बहुत ही पवित्र माना जाता है। इनके किनारे पर अंतिम संस्कार मोक्षदायी माना जाता है। स्कन्दपुराण के मानस खंड में शिप्रा नामक नदियों को उल्लेख आता है। हिमालय की ज्यादातर नदियाँ दक्षिणवाहिनी होती है। इसका मतलब है उत्तर से दक्षिण की तरफ बहती है पर ये नदी दक्षिण से उत्तर की तरफ बहती है, इसीलिए इसका महत्व बहुत बढ़ जाता है।"

नदी की फिक्र करते हुए वह बताते हैं, "भवाली के पानी की आपूर्ति शिप्रा नदी के स्रोतों से ही होती है। श्यामखेत में नानतिन बाबा आश्रम के आस-पास इस नदी का उद्गम माना जाता है पर मानवीय लापरवाही और अत्यधिक निर्माण कार्य होने से ये नदी फिलहाल एक बरसाती नदी भर रह गयी है। करीब 22-23 वर्ष पहले नदी में बारहों महीने पानी रहता था। अभी भी यदि इसमे कार्य सही ढंग से हो जाये तो इस नदी को निश्चित रूप से बचाया जा सकता है। इस नदी की पिछले 30 वर्षों से किसी ने कोई सुध नही ली।"

हमने की शिकायत तब हुआ नदी में कूड़ा-कचरा फेंकना और सीवर बंद

पूर्व में शिप्रा नदी को लोग कूड़ा-कचरा फेकने के इस्तेमाल में लेते थे। यहां तक की भवाली नगर पालिका का कूड़ा भी शिप्रा नदी को बुरी तरह से दूषित कर रहा था। जगदीश नेगी ने इसका विरोध दर्ज करने के साथ सम्बंधित उच्चाधिकारियों से शिकायतें भी की, जिसका असर भी नजर आया। वह बताते हैं, "भवाली पालिका पहले अपना सब कूड़ा कचरा अल्मोड़ा हाईवे के किनारे निगलात के पास डाकरोली नामक स्थान पर सड़क के किनारे फेंकती थी, जिस कूड़े-कचरे की काफी मात्रा बरसात में बहकर नीचे शिप्रा नदी में चली जाती थी और कैंची धाम होते हुए नदी को प्रदूषित करती थी। शिप्रा कल्याण समिति ने इस मामले को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के हल्द्वानी और देहरादून ऑफिस में भेजा उसके बाद यहां पर पालिका को कूड़े-कचरे फेंकने को मना किया गया। शिप्रा कल्याण समिति के प्रयास से शिप्रा नदी की हालत काफी सुधरी है। अब पहले की अपेक्षा नदी में लोग बहुत कम कूड़ा-कचरा फेंकते है। भवाली पालिका का कूड़ा कचरा भी अब हल्द्वानी भेजा जाता है। पहले पालिका कूड़े कचरे को नदी में ही जगह-जगह फेंक देती थी।" नदी में गिरने वाले सीवरों को बंद कराने के बारे में वह बताते हैं, "शिप्रा कल्याण समिति ने मंदिर के समीप सीधे नदी में गिरने वाले सीवरों की शिकायत जिलाधिकारी के आफिस में की, जिसके परिणामस्वरूप करीब 40 ओपन सीवर नदी से हटे और उनके लिए सीवर पिट बने।"

अभियान में खुद से खर्च किये चार लाख हुए

नदी बचाने के प्रयास के लिए बनाई शिप्रा कल्याण समिति के सदस्यों ने भवाली को स्वच्छ बनाने की मुहिम भी छेड़ दी। समिति ने इसके लिए चंदा इकट्ठा किया और इस रकम से पालिका को कूड़ेदान दिए, आमजनों और छात्रों की मदद से हजारों पेड़-पौधे लगवाए। जगदीश नेगी बताते हैं, "शिप्रा कल्याण समिति ने अपने प्रयास से लोगो से चंदा जमा करके 75000 के 15 कूड़ेदान भी भवाली पालिका को दिए, जिनसे भी नगर को साफ और स्वच्छ रखने में मदद मिल रही है। भवाली शहर अब पहले से काफी साफ-सुथरा हो गया है। मैं अपने शहर में अभी तक 60 कूड़ेदान 20 किलोग्राम क्षमता के दुकानदारों को वितरित कर चुका हूँ। पिछले वर्ष 9500 वृक्ष वितरित कर चुका हूँ, जिसमे नींबू, माल्टा, अमरूद, संतरा आदि चौड़ी पट्टी के जलवर्धक वृक्ष भवाली और आस-पास के इलाको में लोगों और स्कूली बच्चों को वितरित कर चुका हूं। इस अभियान में अब तक पांच लाख रुपए खर्च हो चुके हैं, जिसमें एक लाख रुपए लोगों का चंदा व बाकी चार लाख मैं खुद के खर्च कर चुका हूं।"


सरकार द्वारा शिप्रा नदी के लिए जारी किए गए बजट के बारे में कहते हैं, "धीरे-धीरे हमारे कार्य से नदी प्रसिद्ध हुई और सरकार का ध्यान इस पर गया। सरकार ने इसे पुनर्जीवित करने वाली नदी में चुन लिया। अब नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 13 करोड़ 45लाख की बड़ी योजना बन गयी है। बरसात से इस पर काम शुरू होने वाला है।"

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