रिपोर्टर कोना

नीतीश-भाजपा की खिचड़ी तो काफी पहले से पक रही थी, ठगे गए लालू

लखनऊ। नीतीश कुमार ने छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। विपक्ष के नेता सुशील मोदी एक बार फिर डिप्टी सीएम बन गए हैं। ठगे गए तो केवल लालू प्रसाद यादव। सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद लालू अब विपक्ष में होंगे।

लालू यादव को जमीनी स्तर का नेता कहा जाता है। तमाम भ्रष्टचार के आरोपों के बावजूद एक खास वर्ग पर उनकी अच्छी पकड़ है। इसका उदाहरण हम 2015 में विधानसभा चुनाव में देख चुके हैं। 2015 में बिहार में हुए चुनाव में लालू की पार्टी जनता दल सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। कांग्रेस, जदयू के साथ हुए गठबंधन में लालू की पार्टी को सबसे ज्यादा 80 सीटें मिली थीं। नीतीश की पार्टी नंबर दो और कांग्रेस तीसरे नंबर पर थी।

इन आंकड़ों से ये बात साफ हो जाती है कि बिहार में लालू के पास बड़ा जनाधार है। हां, ये बात भी है कि इधर कुछ महीनों में लालू और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे हैं। नीतीश के इस्तीफे के पीछे इन आरोपों को एक बड़ी वजह के तौर पर देखा जा रहा है।

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कुछ लोगों का कहना है कि अचानक नीतीश ने गठबंधन तोड़ दिया तो कुछ लोगों का मानना है कि लालू प्रसाद आैर उनके बेटे तेजस्वी यादव पर लग रहे आरोपों के बाद नीतीश ने ये फैसला लिया। लेकिन मैं आपको थोड़ा फ्लैशबैक में ले चलूंगा। नीतीश और भाजपा की ये नजदीकियां तो काफी दिनों से चली आ रही हैं। पिछले कई महीनों में कई ऐसे मौके आए जब नीतीश पूरी तरह से मोदी और भाजपा के साथ खड़े दिखे। भाजपा ने भी कई मौकों पर नीतीश का साथ दिया।

ऐसी ही कुछ घटनाचक्रों पर नजर डालते हैं, जो लालू पर लग रहे आरोपों से काफी पहले के हैं, तब भी नीतीश मोदी के साथ ही थे, कई मौकों पर भाजपा ने भी नीतीश का साथ दिया, नजर डालते हैं इस पूरी रिपोर्ट पर-

प्रधानमंत्री मोदी के साथ नरेंद्र मोदी।

पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक की तारीफ की

भारतीय सेना ने पिछले साल पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकियों के ठिकाने ध्वस्त किए थे। मामले ने तब विवाद का रूप ले लिया था जब कांग्रेस सहित केजरीवाल और कई अन्य पार्टियों ने सरकार से सबूत मांगे। तब नीतीश कुमार ने मोदी सरकार का साथ दिया था। और तब उन्होंने कहा था कि सेना ने एलओसी पर आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की। आर्मी को बधाई। हमें सेना पर गर्व है और हम उसके शौर्य और पराक्रम की सराहना करते हैं। आतंकवाद और उसे पनाह देने वालों के खिलाफ केंद्र कड़ी कार्रवाई करे। हम उसके साथ हैं।

नोटबंदी के फैसले की तारीफ की

मोदी सरकार ने 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी का एलान किया था। इस फैसले के बाद पूरे देश में हाहाकार जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी। कई पार्टियां इसके विरोध में सड़कों पर उतर आयी थीं। मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की गई। इस संकट की घड़ी में नीतीश कुमार ने फिर मोदी सरकार का साथ दिया और इस फैसले को बड़ा आर्थिक सुधार बताया। उन्होंने कहा था- ''केंद्र के फैसले को हमारा स्वागत और समर्थन है। मैं नोटबंदी का हिमायती हूं। इससे देश की अर्थव्यवस्था को बहुत फायदा होगा।

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सरकार बेनामी प्रॉपर्टी वालों पर हमला करे

मोदी सरकार ने बेनामी प्रॉपर्टी कानून बनाया। नीतीश इसे लेकर भी केंद्र के साथ दिखे। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार को जल्द ही बेनामी संपत्ति पर हमला करना चाहिए। आम आदमी मेहनत करे और कालाधन वाले मौज करें, इस पर लगाम लगनी ही चाहिए।

जीएसटी को आर्थिक सुधार बताया

मोदी सरकार ने टैक्स व्यवस्थाओं में सुधार के लिए जीएसटी लागू कर दिया है। गैर-बीजेपी शासित कई राज्यों की सरकारें जीएसटी के विरोध में थे, लेकिन नीतीश इसके साथ खड़े हुए। उन्होंने कहा था कि मैंने हमेशा जीएसटी का सपोर्ट किया। एनडीए में रहते हुए भी हमने यूपीए के समय इसका समर्थन किया था। अब भी कर रहे हैं। यह देश और राज्यों के हित में है।

लालू प्रसाद यादव।

ईवीएम मुद्दे पर दिया सरकार का साथ

वहीं बात करे ईवीएम पर उठे सवाल की तो यहां भी बाकी पार्टियों ने जमकर मोदी सरकार का विरोध किया था लेकिन नीतीश सरकार ने कभी भी सीधे तौर पर इसका विरोध नहीं किया। मतलब यहाँ भी मोदी सरकार को नीतीश का साथ मिला।

डिग्री विवाद में मोदी का बचाव किया

इसी तरह पीएम की डिग्री को लेकर जब आम आदमी पार्टी विवाद पैदा करने की कोशिश कर रही थी। धीरे-धीरे बाकी विपक्षी पार्टियों ने भी इस विवाद में कूदना शुरू कर दिया। उस समय जब नीतीश से इस मुद्दे पर पूछा गया तो उन्होंने न सिर्फ मोदी का बचाव किया, बल्कि यहां तक कह डाला कि यह कोई मुद्दा नहीं है और सारा विवाद फिजूल का है।

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रामनाथ कोविंद का समर्थन

एनडीए ने बिहार के गवर्नर रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया था। तब नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग जाकर कोविंद का समर्थन करने का का ऐलान कर दिया था। मुद्दा दलित बनाम दलित बनाने के लिए विपक्ष ने पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को कोविंद से सामने उतारा था। कांग्रेस ने मीरा को बिहार की बेटी बताकर जेडीयू से सपोर्ट मांगा, लेकिन नीतीश अपने फैसले पर कायम थे। तब उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने बिहार की बेटी को हारने के लिए चुनाव में खड़ा किया है। राष्ट्रपति चुनाव से पहले नीतीश मोदी के डिनर के लिए दिल्ली भी गए थे। बता दें कि बिहार में जेडीयू-आरजेडी के साथ कांग्रेस भी महागठबंधन में शामिल है।

जब बीजेपी ने नीतीश का साथ दिया

नशामुक्ति को मोदी का समर्थन

बिहार में शराबबंदी का फैसला नीतीश कुमार ने किया था। नीतीश के इस कदम का समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था और कहा था कि वो इसके हिमायती हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने भी गुजरात में शराबबंदी की थी।

पीएम मोदी ने की तारीफ

पिछले दिनों राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में पीएम मोदी ने नीतीश कुमार के भाषण की जमकर तारीफ की थी। उन्होंने उनके उठाए मुद्दों को सबसे ज्यादा अहमियत दी थी।

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गंगा मामले में भाजपा का साथ मिला

बिहार में गंगा में गाद जमने के मुद्दे पर जब नीतीश पीएम मोदी से मिले, तो उन्होंने फौरन अफसरों को बुलाकर इस समस्या को हल करने को कहा। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बिहार में एनएचआई की सड़क परियोजनाओं को फुल स्पीड करने का ऐलान किया था।

समिति में नीतीश कुमार को सदस्या बनाया

पिछले दिनों जब आरएसएस के वरिष्ठ नेता दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी समारोह मनाने के लिए समिति बनी तो उसमें नीतीश कुमार को भी सदस्य बनाया गया, हालांकि सीएम बनने के बाद इन्हीं नीतीश ने आरएसएस-मुक्त भारत का नारा दिया था।

नीतीश कुमार ने इस्तीफा देने के बाद क्या कहा था, देखें वीडियो