रिपोर्टर कोना

वर्ल्ड फोटोग्राफी डे : जब एक फोटोग्राफर की खींची फोटो उसकी आत्महत्या की वजह बनी

वह 1993 का दौर था। अफ्रीकी देश सूडान भयंकर अकाल से पीड़ित था। इस बीच एक इथोपियाई कुपोषित बच्ची पर फोटोग्राफर केविन कार्टर की नजर पड़ी। जो अपने माता पिता की झोंपड़ी की ओर रेंग कर जाने का प्रयत्न कर रही है और उसके पीछे एक गिद्ध बैठा हुआ है जो उसके प्राण निकल जाने के इंतजार में है।

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भूख ने उस बच्ची को बेदम कर रखा है। बताते हैं कि केविन ने 20 मिनट तक इस दृश्य को देखा और अपने कैमरे में क़ैद कर लिया और उस गिद्ध को वहां से उड़ा दिया। केविन कार्टर की इस फोटो को न्यूयॉर्क टाइम्स ने 26 मार्च 1993 को इसे प्रकाशित किया था। फोटो के प्रकाशित होते ही हज़ारों लाखों लोगों ने केविन कार्टर से इस इथोपियाई बच्ची के बारे में हज़ारों सवाल किए। कईयों ने उस पर यह आरोप भी लगाए कि उसने उस समय फोटो खींचना ज्यादा उचित समझा उस रेंगती हुई बच्ची को बचाने के बजाय।

तब इन सारी बातों के लगभग एक साल बाद। न्यू यॉर्क टाइम्स के पिक्चर एडिटर नैन्सी ब्रूस्की ने 2 अप्रैल 1994 के दिन कॉर्टर को फोन कर सूचित किया कि उसकी इस नायाब तस्वीर ने उसे फीचर फोटोग्राफी के लिए पुलित्जर पुरस्कार दिला दिया है। 23 मई 1994 के दिन कार्टर को कोलंबिया यूनिवर्सिटी के लॉ मेमोरियल लाइब्रेरी में पुरस्कार से नवाज़ा गया।

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सम्मान समारोह के लगभग दो महीने बाद ही कॉर्टर ने खुदकुशी कर ली। वह अत्यधिक तनाव में थे। पुरस्कार मिलने की खुशी के बजाय फोटो पर मिल रहे तानों से वह बुरी तरह परेशान थे। मरने के कुछ रोज़ पहले उन्होंने अपने दोस्तों के सामने कुबूल किया था कि वह उस बच्ची की मदद करना चाहते थे लेकिन उस समय सूडान में संक्रमित बीमारियाँ फैली थी और पत्रकारों और फोटोग्राफरों को घायल और दम तोड़ते सूडानी लोगों से दूर रहने का आदेश यूएन (संयुक्त राष्ट्र) ने दिया था।

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