बुलंदशहर हिंसा: भीष्म साहनी के कालजयी उपन्यास 'तमस' की याद दिलाती है…

'तमस' के शुरुआती दो-तीन पन्नों ने ही इसे अज़र-अमर बना दिया। अगर उपान्यास नहीं पढ़ पाए हैं तो सीरियल और फिल्म पर आते हैं, अब वो शुरुआती सीन याद कीजिए… याद आया? नहीं तो google कर लीजिए, youtube खंगाल डालिए।

Arvind ShuklaArvind Shukla   6 Dec 2018 1:57 PM GMT

बुलंदशहर हिंसा: भीष्म साहनी के कालजयी उपन्यास तमस की याद दिलाती है…तमस में ओमपुरी। फोटो साभार रैडिफ. कॉम

बुलंदशहर हिंसा के बाद एक उम्र के लोगों के जेहन में एक उपन्यास और एक सीरियल का एक दृश्य जरुर आया होगा, जिसका नाम था 'तमस'। लेखक भीष्म साहनी ने सिर्फ पांच दिन की कहानी को लेकर इस उपन्यास का ताना-बाना बुना था, जिस पर पहले गोविंद निहलानी ने ओमपुरी, अमरीश पुरी और पंकज कपूर को लेकर दूरदर्शन पर सीरियल बनाया फिर चार घंटे की फिल्म बनी, फिल्म को चार नेशनल अवार्ड मिले थे।

आजादी के ठीक पहले यानि साल 1947 में बंटवारे की पृष्ठभूमि पर आधारित 'तमस' के शुरुआती दो-तीन पन्नों ने ही इसे अज़र-अमर बना दिया। अगर उपान्यास नहीं पढ़ पाए हैं तो सीरियल और फिल्म पर आते हैं, अब वो शुरुआती सीन याद कीजिए… याद आया? नहीं तो गूगल कल लीजिए, यूट्यूब खंगाल डालिए।

सीरियल के शुरुआती दृष्य भिस्ती बने ओमपुरी के हाथ में मुराद अली (पंकज कपूर) पांच रुपए रखकर कहते हैं कि एक सुअर मारकर दे दो, क्योंकि सलोतरी साहब (मुराद अली के बॉस) को दवा के लिए चाहिए।

बाद में इसी सुअर का शव, एक मस्जिद के बाहर पड़ा मिलता है और पंजाब के उस हिस्से में जहां नत्थू (ओमपुरी) रहा करते थे, दंगा फैल गया था। हिंदू-मुस्लिम के इस विवाद में सैकड़ों लोग मारे गए, हजारों लोग बेघर हो गए थे। नत्थू को भी पता चला कि उससे ये गुनाह हो गया..

इस उपान्याय के कालखंड यानि अप्रैल 1947 से निकलकर 3 दिसंबर 2018 में आते हैं। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में गोकशी को लेकर हंगामा हो जाता है। एक किसान के गन्ने के खेत में गाय के दो-तीन सिर मिलते है और भीड़ सड़क पर उतर आती है। पुलिस के एक इंस्पेक्टर की गोली लगने से मौत हो जाती है। भीड़ में शामिल एक युवक भी जान से हाथ धो बैठता है। इस घटना के कई वीडियो सामने आए हैं… एक में वीडियो में सामने ट्रैक्टर पर कुछ कंकाल हैं और पीछे हंगामे के बीच आवाज़ आ रही है, मुझे पता है गाय किसने काटी हैं… कुछ और आवाजें थी… लेकिन वो तमस की तरह ही उन्मादियों की थीं.. मारो-मारो की…

देखिए वीडियो बुलंदशहर हिंसा की ग्राउंड रिपोर्ट

चलिए अब आपको बुलंदशहर के उन गांवों में लेकर चलते हैं जहां गोकशी की घटना बताई जा रही है। गाय के कंकाल स्याना थाना क्षेत्र के महाव गांव में मिले थे, इसी से जुड़े एक गांव चिंगरावठी में भी कुछ ऐसा होने की ख़बर आई। गांव कनेक्शन संवाददाता रणविजय सिंह इन गांवों में होकर आए हैं, उनके दोनों जाट बहुल गांव है और महाव में 7 तो चिंगरावठी में तीन मुस्लिम परिवार रहते हैं। कुछ लोग सवाल उठाते हैं आखिर इतना जोखिम क्यों लेंगे।

तमस उपन्यासतमस उपन्यास

विपक्षी दल बुलंदशहर वाक्ये को दंगा कराने की साजिश बताते हैं। खुद उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया ओपी सिंह साजिश की बात कह चुके हैं। सच्चाई के लिए एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार रहेगा...

चलिए अब तमस पर वापस लौटते हैं..

'तमस' हिंदू-मुस्लिम दंगों पर आधारित था। कालजयी लेखक भीष्म साहनी ने दंगों की वो सच्चाई दिखाई, जो उन्होंने खुद अपने वास्तविक जीवन अनुभव की थी। साहनी ने साम्प्रदायिक दंगों को आधार बनाकर इस समस्या का सूक्ष्म विश्लेषण किया था, राजनेताओं से लेकर सरकारी कर्मचारी, आम लोगों की सोच और मानसिक दशा को सामने रखा था… जो २०वीं सदी ही नहीं, आने वाली कई सदियों तक शायद सच्चाई ही रहेगी...

ये भी पढ़ें- गोकशी के बवाल में फिर मौत, क्‍या पीएम मोदी की भी नहीं सुन रहे गौरक्षक

तमस फिल्म-


More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top