रियल एस्टेट बिल पास, अब नहीं चलेगी बिल्डर्स की मनमानी

रियल एस्टेट बिल पास, अब नहीं चलेगी बिल्डर्स की मनमानीGaon Connection real state

गाँव नकेन्शन नेटवर्क

नई दिल्ली। अगर आप अपने बिल्डर्स की मनमानी से परेशान हैं तो आपके लिए एक अच्छी ख़बर है। बिल्डरों की धोखाधड़ी पर लगाम कसने के लिए राज्यसभा में गुरुवार को रियल एस्टेट रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट बिल पास कर दिया है। लोकसभा में पारित होने और राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद ये बिल कानून बन जाएगा। यह इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि हर साल 10 लाख लोग नया घर खरीदते हैं। कानून बनने के बाद अगर बिल्डर ने वक्त पर आपको घर नहीं दिया तो उसे खरीदार को ब्याज देना पड़ेगा। अगर बिल्डर ने ट्राइब्यूनल का आदेश नहीं माना तो 3 साल की सजा हो सकती है। 

बिल का क्यों हो रहा है विरोध ?

- रेग्युलेटरी अथॉरिटी के नियम राज्यों को अमल में लाने हैं। ऐसे में, राज्य केंद्र के कानून में फेरबदल करेगा।

जेल की सज़ा बेहद सख्त

- रियल्टी डेवलपर्स ने जेल भेजने के कानून को सख्त बताया। साथ ही, कहा कि सरकारी अफसरों को भी इसके दायरे में लाना था।

क्यों अहम है यह बिल और रियल एस्टेट?

- रोज़गार के मामले में खेती के बाद दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर रियल एस्टेट है। जीडीपी में इसका 9% हिस्सा है।

- हर साल 10 लाख लोग नया मकान खरीदते हैं। 3.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश करते हैं। 

- 76 हजार कंपनियां इस सेक्टर में हैं। 27 बड़े शहरों में 5 साल में 4,488 प्रोजेक्ट शुरू हुए। 

- दिल्ली में 17431, बंगाल में 17010 और महाराष्ट्र में 11160 प्रोजेक्ट शुरू हुए।

खरीदारों के लिए बिल में क्या?

- मकान खरीददारों और बिल्डरों के बीच लेन-देन की निगरानी होगी। स्टेट लेवल पर रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (रेरा) बनेगी। 

- बिल्डर टाइम लिमिट में पजेशन नहीं देगा तो उसे कंज्यूमर को ब्याज देना होगा। यह उसी रेट से देना होगा, जिस पर कंज्यूमर से ब्याज लिया जाता है।

- अपार्टमेंटों में सभी कंज्यूमर को अपने खान-पान और रहन-सहन की आजादी होगी। उनसे कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। 

- बिल्डर प्रोजेक्ट के बारे में भी दिए ऐड, ब्रॉशर और पैम्फलेट में दी गई जानकारियों से मुकर नहीं सकेगा। इस तरह वह झूठे ऐड भी नहीं दे सकेगा।

बिल्डरों के लिए क्या?

- सभी राज्यों में रियल एस्टेट अपील ट्रिब्यूनल भी बनेंगे। यहां रेग्युलेटरी अथॉरिटी के फैसलों के खिलाफ अपील की जा सकेगी। 

- रेरा और ट्रिब्यूनल को विवाद का निपटारा 60 दिन में करना होगा। पहले रेरा के लिए समय-सीमा नहीं थी। ट्रिब्यूनल को 90 दिन दिए थे। 

- हर प्रोजेक्ट रेरा में रजिस्टर्ड होगा। बिना रजिस्ट्रेशन बिल्डर प्रोजेक्ट में बुकिंग या बिक्री नहीं कर सकेंगे। एजेंट्स का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। 

- बिल्डरों को खरीददारों से ली रकम का 70 पर्सेंट अलग खाते में रखना होगा। उसका इस्तेमाल उस प्रोजेक्ट के लिए ही किया जाएगा। 

- राज्य में 500 स्क्वेयर मीटर से बड़े प्‍लॉट साइज या 8 फ्लैट से ज्यादा रेजिडेंशियल या कमर्शियल प्रोजेक्ट का अथॉरिटी से रजिस्‍ट्रेशन कराना होगा। 

- प्रॉपर्टी डीलर्स को भी रजिस्‍ट्रेशन कराना जरूरी होगा।

- रजिस्ट्रेशन के साथ ही डेवलपर्स को अपनी वेबसाइट पर प्रोजेक्‍ट्स की पूरी जानकारी डालनी होगी।

- यह भी बताना होगा कि उसके प्रोजेक्ट को कौन-कौन सी अप्रूवल मिल चुकी हैं।

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