48 डिग्री में झुलसा बांदा, IPS अधिकारी ने CM से की 3 बड़ी माँग, कहा-" अभी नहीं संभले, तो आने वाली पीढ़ियाँ नहीं करेंगी माफ"
Preeti Nahar | May 24, 2026, 16:01 IST
उत्तर प्रदेश का बांदा इस समय सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि एक बड़े पर्यावरणीय संकट की मार झेल रहा है। तापमान 48 डिग्री के पार पहुंच चुका है और हालात ऐसे हैं कि सुबह 10 बजे के बाद सड़कें सूनी होने लगी हैं। इसी बीच एक वरिष्ठ IPS अधिकारी ने बढ़ती गर्मी, सूखती नदियों और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर खुलकर चिंता जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तीन बड़ी मांगें की हैं, जिन्हें बुंदेलखंड के भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। आखिर क्यों एक पुलिस अधिकारी को सार्वजनिक रूप से यह अपील करनी पड़ी?
48°C की गर्मी पर IPS अधिकारी की CM योगी से अपील
“बांदा की ये जलती हुई धरती सिर्फ मौसम की मार नहीं, बल्कि हमारी लापरवाही का नतीजा है। अगर अभी भी हम नहीं संभले, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी माफ नहीं करेंगी।” ये बयान है मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ IPS अधिकारी और वर्तमान एडीजी (रेलवेज) राजाबाबू सिंह का, जिनका गृह जिला है बांदा, जो इस समय भीषण गर्मी की मार झेल रहा है।
हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि पिछले कुछ दिनों में बांदा देश के सबसे गर्म इलाकों में शामिल रहा। तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने आम लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। बुंदेलखंड में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और बिगड़ते पर्यावरणीय हालात को लेकर यह चिंता मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ IPS अधिकारी और वर्तमान एडीजी (रेलवेज) राजाबाबू सिंह ने जाहिर की है।
अपने गृह जनपद बांदा में बढ़ते तापमान, घटती हरियाली और लगातार हो रहे खनन को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील की है। जिसमें उन्होंने बढ़ती गर्मी और पर्यावरणीय संकट को लेकर तीन बड़ी मांगें की हैं।
मूल रूप से बांदा के रहने वाले वरिष्ठ IPS अधिकारी राजाबाबू सिंह ने एक वीडियो जारी कर कहा कि बांदा जैसे इलाके, जहाँ केन नदी, बेतवा नदी और उनकी सहायक नदियाँ जैसी प्राकृतिक संपदा होने के बावजूद वहाँ इतनी भयावह गर्मी चिंता का विषय है। उन्होंने इसे “मिसमैनेजमेंट” और पर्यावरणीय नुकसान का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए हालात और गंभीर हो सकते हैं।
1. अवैध खनन पर तुरंत रोक- IPS अधिकारी ने केन नदी और आसपास के क्षेत्रों में हो रहे अवैध बालू खनन और पत्थर खनन पर तत्काल कार्रवाई की माँग की। उनका कहना है कि लगातार खनन से इलाके का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है।
2. 10 साल तक खनन पट्टे बंद हों- उन्होंने माँग की कि बांदा, महोबा और हमीरपुर में अगले 10 साल तक बालू और स्टोन क्वेरिंग के नए पट्टे न दिए जाएं। उनके मुताबिक इससे पर्यावरण को राहत मिल सकती है और जमीन की प्राकृतिक क्षमता दोबारा विकसित हो सकेगी।
3. बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण- राजाबाबू सिंह ने तीसरी और सबसे अहम माँग बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाने की रखी। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों की टीम बनाकर बांदा में हरियाली बढ़ाने और खत्म हो रही जैव विविधता को वापस लाने पर गंभीरता से काम होना चाहिए।
IPS अधिकारी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बंजर जमीन को हरियाली में बदला जा सकता है, अगर ईमानदारी से काम किया जाए।
बांदा और बुंदेलखंड के कई इलाकों में दिन के समय सड़कें खाली दिखाई दे रही हैं। लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीज बढ़ रहे हैं। कई जगहों पर पानी और बिजली की मांग भी बढ़ गई है। IPS अधिकारी ने कहा कि अगर तापमान में लगातार इसी तरह बढ़ोतरी होती रही और पर्यावरणीय नुकसान नहीं रुका, तो आने वाले वर्षों में बुंदेलखंड में गर्मी और गंभीर रूप ले सकती है।
हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि पिछले कुछ दिनों में बांदा देश के सबसे गर्म इलाकों में शामिल रहा। तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने आम लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। बुंदेलखंड में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और बिगड़ते पर्यावरणीय हालात को लेकर यह चिंता मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ IPS अधिकारी और वर्तमान एडीजी (रेलवेज) राजाबाबू सिंह ने जाहिर की है।
अपने गृह जनपद बांदा में बढ़ते तापमान, घटती हरियाली और लगातार हो रहे खनन को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील की है। जिसमें उन्होंने बढ़ती गर्मी और पर्यावरणीय संकट को लेकर तीन बड़ी मांगें की हैं।
IPS राजाबाबू सिंह ने उठाए पर्यावरण से जुड़े सवाल
मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ IPS अधिकारी राजाबाबू सिंह
CM योगी से कीं ये 3 बड़ी मांगें
2. 10 साल तक खनन पट्टे बंद हों- उन्होंने माँग की कि बांदा, महोबा और हमीरपुर में अगले 10 साल तक बालू और स्टोन क्वेरिंग के नए पट्टे न दिए जाएं। उनके मुताबिक इससे पर्यावरण को राहत मिल सकती है और जमीन की प्राकृतिक क्षमता दोबारा विकसित हो सकेगी।
3. बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण- राजाबाबू सिंह ने तीसरी और सबसे अहम माँग बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाने की रखी। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों की टीम बनाकर बांदा में हरियाली बढ़ाने और खत्म हो रही जैव विविधता को वापस लाने पर गंभीरता से काम होना चाहिए।
“सिर्फ फोटो नहीं, जमीन पर काम हो”
हीटवेव से लोगों का हाल बेहाल
48 डिग्री में तपा बांदा