'48°C तो सिर्फ रिकॉर्ड है! बांदा वासियों की असली मुसीबत दिनभर 40°C से ऊपर रहने वाला तापमान'

Preeti Nahar | May 24, 2026, 16:56 IST
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उत्तर प्रदेश का बांदा इस समय सिर्फ भीषण गर्मी नहीं, बल्कि एक ऐसे संकट से जूझ रहा है जिसने लोगों की पूरी जीवनशैली बदल दी है। हालात ऐसे हैं कि सुबह 10 बजे के बाद सड़कें खाली होने लगती हैं। लगातार 47-48 डिग्री तापमान और 30 डिग्री से ऊपर की गर्म रातों ने बांदा को देश के सबसे तपते इलाकों में ला खड़ा किया है। सवाल सिर्फ मौसम का नहीं, बल्कि उस बदलते पर्यावरण का भी है, जिसे वैज्ञानिक आने वाले समय के बड़े खतरे के तौर पर देख रहे हैं।
<em>तपती धूप में खुद को तसले से ढकती महिलाएं-सांकेतिक तस्वीर</em>
तपती धूप में खुद को तसले से ढकती महिलाएं-सांकेतिक तस्वीर
उत्तर प्रदेश का बांदा इस समय देश के सबसे गर्म जिलों में शामिल है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि सुबह 10 बजे के बाद शहर लगभग ठहर सा जाता है। लोग अब अपना ज्यादातर काम सुबह 6 से 9 बजे के बीच निपटा रहे हैं, क्योंकि इसके बाद सड़कें सुनसान होने लगती हैं और बाजारों में सन्नाटा फैल जाता है।

कई दुकानदार दोपहर में दुकानें बंद कर देते हैं, जबकि मजदूर 10 बजे से शाम 5 बजे तक काम करने से बच रहे हैं। लगातार पड़ रही भीषण गर्मी ने बांदा की सामान्य जिंदगी का पूरा टाइमटेबल बदल दिया है।

स्थिति इतनी गंभीर है कि कुछ किसानों ने दिन की झुलसाती गर्मी से बचने के लिए रात में LED फ्लडलाइट्स की रोशनी में खेतों में काम करना शुरू कर दिया है। खेतों में दिन के समय काम करना अब जोखिम भरा माना जा रहा है।

बांदा क्यों बना देश का सबसे गर्म जिला?

देश का सबसे गर्म इलाका बना बांदा
देश का सबसे गर्म इलाका बना बांदा
मौसम विभाग के मुताबिक पिछले कई दिनों से बुंदेलखंड क्षेत्र में भीषण हीटवेव चल रही है। बांदा में लगातार तापमान 46 से 48 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। 19 मई 2026 को बांदा का अधिकतम तापमान 48.2°C दर्ज किया गया, जो उस दिन देश में सबसे ज्यादा था।

पिछले 10 दिन का बांदा में कितना रहा तापमान

बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिनेश साहा के मुताबिक, पिछले करीब एक सप्ताह से बांदा का तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। रात का तापमान भी 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं जा रहा, जिससे लोगों को दिन ही नहीं बल्कि रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है।

तारीखअधिकतम तापमानन्यूनतम तापमानस्थिति
15 मई 202647°C31°Cभीषण हीटवेव
16 मई 202647°C31°Cगर्म रातें जारी
17 मई 202646.4°C30°Cदेश के सबसे गर्म शहरों में शामिल
18 मई 202647.6°C31°Cभारत का सबसे गर्म शहर
19 मई 202648.2°C31°Cदेश में सबसे अधिक तापमान
20 मई 202647°C30°CSevere Heatwave
21 मई 202646°C30°Cरेड अलर्ट
22 मई 202647°C31°CVery Severe Heatwave
23 मई 202647°C31°Cलगातार गर्म रातें
24 मई 202647°C32°CIMD अलर्ट जारी
गाँव कनेक्शन से बातचीत में डॉ. दिनेश साहा ने बताया, “बांदा लगातार देश के सबसे गर्म इलाकों में दर्ज हो रहा है। दिन में तापमान तेजी से 44 डिग्री से बढ़कर 47-48 डिग्री तक पहुँच रहा है। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें कर्क रेखा के नजदीक होने की वजह से सीधी धूप पड़ना, साफ आसमान होने से धूप तेज़ और सीधी पड़ती है, पठारी/पथरीली भूभाग-जो लगातार गर्म होती रहती है मई और जून के महीने में, मिट्टी में नमी की कमी, नदियों का सूखना, लगातार घटती हरियाली और बढ़ता खनन शामिल हैं।”

बांदा के अलगे 4 दिन का तापमान- IMD
बांदा के अलगे 4 दिन का तापमान- IMD

बालू खनन और सूखती नदियां भी बढ़ा रही हैं गर्मी

बांदा में कई नदियां हैं जैसे केन नदी, बेतवा नदी, जिनसे बड़े स्तर पर बालू निकाली जाती है। लगातार बालू का तटीय इलाकों पर जमा होना और नदियों का जलस्तर घटना बांदा की बढ़ती गर्मी की मुख्य वजहों में माना जा रहा है। बालू तेजी से गर्म होती है, जिससे आसपास के वातावरण का तापमान और बढ़ जाता है।

इसके अलावा सूखी हवाएं, कम हरियाली, बढ़ती गर्म सतह और लंबे समय से चल रही शुष्क परिस्थितियां गर्मी को और ज्यादा खतरनाक बना रही हैं। यही वजह है कि मौसम विभाग ने बांदा समेत कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है।

“सिर्फ हीटवेव नहीं, पर्यावरणीय संकट भी है”

दोपहर में जलती सड़कें
दोपहर में जलती सड़कें
डॉ. दिनेश साहा का कहना है कि बांदा में सिर्फ सामान्य हीटवेव नहीं चल रही, बल्कि कई भौगोलिक और पर्यावरणीय कारण मिलकर तापमान को खतरनाक स्तर तक पहुंचा रहे हैं। उनके मुताबिक, “यह इलाका कर्क रेखा के काफी नजदीक है, इसलिए यहाँ सूर्य की किरणें ज्यादा सीधे पड़ती हैं। इसके अलावा लगातार साफ आसमान, मिट्टी में नमी की कमी, सूखती नदियां और घटती हरियाली गर्मी को और बढ़ा रही हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि खनन और पेड़ों की कटाई ने इलाके के प्राकृतिक तापमान नियंत्रण सिस्टम को कमजोर कर दिया है।”

क्या बांदा ‘हीट आइलैंड’ में बदल रहा है?

पिछले 10-15 वर्षों में बांदा के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। डॉ. साहा बताते हैं कि पहले गर्मी तेज जरूर होती थी, लेकिन रात में कुछ राहत मिल जाती थी। अब रात का तापमान भी लगातार ऊंचा बना रहता है। उन्होंने कहा, “पिछले डेढ़ दशक में बांदा का मौसम तेजी से बदला है। पहले गर्मी तेज होती थी, लेकिन रात में कुछ राहत मिल जाती थी। अब रात का तापमान भी 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं जा रहा। इसका मतलब है कि धरती लगातार गर्म बनी हुई है। लू का समय भी पहले से लंबा हो गया है और हीटवेव की अवधि बढ़ रही है। जिस तरह कंक्रीट, सूखी जमीन और कम हरियाली बढ़ी है, उससे स्थानीय स्तर पर ‘हीट आइलैंड’ जैसी स्थिति बनती दिखाई दे रही है।”

खेती का तरीका बदलने को मजबूर किसान

खेतों में काम करना जोखिम भरा-सांकेतिक तस्वीर
खेतों में काम करना जोखिम भरा-सांकेतिक तस्वीर
भीषण गर्मी का असर खेती पर भी साफ दिखाई दे रहा है। खेतों में काम करना अब मजदूरों और किसानों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। डॉ. साहा के अनुसार, “दिन में तापमान इतना ज्यादा हो जाता है कि खेतों में काम करना जोखिम भरा हो गया है। मजदूर और किसान दोपहर में काम नहीं कर पा रहे, इसलिए कई लोग (बेहद जरूरी काम पड़ने पर) रात में LED लाइट लगाकर खेती का काम निपचाटे लगे हैं। सबसे ज्यादा असर सब्जियों, दलहन और पानी पर निर्भर फसलों पर पड़ रहा है। मिट्टी तेजी से सूख रही है और सिंचाई की जरूरत बढ़ गई है। अगर यही स्थिति जारी रही, तो आने वाले समय में खेती के तौर-तरीके बदलने पड़ सकते हैं।”

खनन और पहाड़ों की कटाई ने बिगाड़ा संतुलन

डॉ. साहा मानते हैं कि बांदा और आसपास के इलाकों में बढ़ता खनन स्थानीय इकोसिस्टम पर बड़ा असर डाल रहा है। उन्होंने कहा, “खनन का असर सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रहता, यह पूरे स्थानीय इकोसिस्टम को प्रभावित करता है। केन नदी और आसपास के इलाकों में लगातार बालू खनन से पानी रोकने और जमीन को ठंडा रखने वाली प्राकृतिक संरचना कमजोर हुई है। पहाड़ों की कटाई और पेड़ों की कमी से गर्म हवाओं को रोकने वाला प्राकृतिक संतुलन टूट रहा है। भूजल रिचार्ज कम होने से मिट्टी की नमी घटती है और तापमान तेजी से बढ़ता है।”

क्या भविष्य में रहना मुश्किल हो जाएगा?

आने वाले वर्षों में हालात और गंभीर हो सकते है।
आने वाले वर्षों में हालात और गंभीर हो सकते है।
बुंदेलखंड के भविष्य को लेकर भी वैज्ञानिक चिंता जता रहे हैं। डॉ. साहा का कहना है कि अगर पर्यावरणीय नुकसान और जल संकट को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले वर्षों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर यही स्थिति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में बुंदेलखंड में गर्मी और कठोर हो सकती है। पानी की उपलब्धता घटेगी, खेती और मुश्किल होगी और लोगों का पलायन बढ़ सकता है। यह सिर्फ मौसम का मुद्दा नहीं, बल्कि जीवन और आजीविका का संकट बन सकता है। अभी भी समय है कि बड़े स्तर पर वृक्षारोपण, जल संरक्षण, नदियों को बचाने और अनियंत्रित खनन रोकने जैसे कदम उठाने होंगे, तभी हालात संभल सकते हैं।”
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