फसल खराब हुई तो मिलेगी आर्थिक सुरक्षा, 125 दिन रोज़गार की भी गारंटी; बिहार कैबिनेट ने किसानों के लिए किये कई फैसले

Gaon Connection | Jun 09, 2026, 14:57 IST
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बिहार कैबिनेट ने किसानों और ग्रामीण परिवारों को राहत देते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने, 125 दिन रोजगार गारंटी वाली नई ग्रामीण योजना शुरू करने और गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए राशि मंजूर की है। इसके अलावा सिंचाई, पेंशन, जलापूर्ति और सीवरेज परियोजनाओं समेत 25 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई।

बिहार कैबिनेट ने खोला राहत का पिटारा
बिहार कैबिनेट ने खोला राहत का पिटारा
बिहार सरकार ने किसानों, ग्रामीण परिवारों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभार्थियों को बड़ी राहत देने वाले कई अहम फैसले किए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को राज्य में लागू करने, नई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना शुरू करने, गन्ना किसानों के बकाया भुगतान और सिंचाई व शहरी विकास परियोजनाओं समेत 25 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों का सीधा असर लाखों किसानों, ग्रामीण मजदूरों और पेंशनधारकों पर पड़ेगा।

सबसे महत्वपूर्ण निर्णय प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू करने का है। इसके तहत किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, मौसम की मार और अन्य कारणों से फसल नुकसान होने पर आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। वहीं, एक जुलाई से लागू होने जा रही विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन तक मजदूरी आधारित रोजगार की गारंटी दी जाएगी। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों की जोखिम क्षमता बढ़ेगी।

रबी सीजन से लागू होगी पीएम फसल बीमा योजना

कैबिनेट ने राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने को मंजूरी दे दी है। यह योजना खरीफ 2018 से चल रही बिहार राज्य फसल सहायता योजना की जगह लेगी। आगामी रबी सीजन से किसान इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत बीमित किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में कृषि लागत के बराबर तक मुआवजा मिलने का प्रावधान होगा। साथ ही, बीमित भूमि की अधिकतम सीमा नहीं होने से बड़े जोत वाले किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा।

ग्रामीण परिवारों को 125 दिन रोजगार की गारंटी

ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल ने विकसित भारत-जी राम जी योजना, बिहार-2026 को मंजूरी दी है। यह योजना एक जुलाई 2026 से राज्य के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगी। योजना के तहत ऐसे ग्रामीण परिवार, जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं, उन्हें एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक मजदूरी आधारित रोजगार की गारंटी दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आजीविका सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए 43 करोड़ रुपये मंजूर

कैबिनेट ने गोपालगंज जिले की सासामुसा शुगर वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए 43 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। सरकार कर्नाटक की एमआरएन ग्रुप के सहयोग से 2018-19 से बंद पड़ी इस चीनी मिल को पुनर्जीवित करने की दिशा में भी काम कर रही है। इससे क्षेत्र के गन्ना किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

सिंचाई परियोजनाओं पर 1,113 करोड़ रुपये खर्च होंगे

जल संसाधन विभाग की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए 1,113 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है। इसके तहत मुंगेर और लखीसराय जिलों की 3,284 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गंगा नदी के निकट पंप हाउस और नहरों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में तटबंधों के निर्माण और मजबूती के लिए भी राज्य सरकार अपने हिस्से के रूप में 771 करोड़ रुपये खर्च करेगी। मुंगेर के खड़गपुर क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

पेंशनधारकों के लिए 3,662 करोड़ रुपये की मंजूरी

राज्य मंत्रिमंडल ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों को मई, जून और जुलाई महीने की पेंशन राशि के भुगतान के लिए बिहार आकस्मिकता निधि से 3,662 करोड़ रुपये अग्रिम स्वीकृत करने का निर्णय लिया है। यह राशि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बिहार नि:शक्तता पेंशन और मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के लाभार्थियों को दी जाएगी। लाभार्थियों को प्रति माह 1,100 रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से उनके खातों में भेजी जाएगी।

जमीन की मापी हुई महंगी

राज्य सरकार ने भूमि मापी शुल्क में भी बढ़ोतरी का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में रैयती भूमि की मापी के लिए प्रति खेसरा 2,000 रुपये और अधिकतम 8,000 रुपये शुल्क देना होगा। पहले यह शुल्क प्रति खेसरा 1,000 रुपये और अधिकतम 4,000 रुपये था। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि मापी का शुल्क 500 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रति खेसरा कर दिया गया है, जबकि अधिकतम शुल्क 2,000 रुपये से बढ़ाकर 4,000 रुपये कर दिया गया है। तत्काल मापी के लिए भी शुल्क में दोगुनी बढ़ोतरी की गई है।

जलापूर्ति और सीवरेज परियोजनाओं को भी मंजूरी

अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत 2.0) के तहत बिहारशरीफ, बेगूसराय, हाजीपुर और सहरसा में जलापूर्ति एवं सीवरेज परियोजनाओं के लिए 736 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं के तहत बिहारशरीफ और बेगूसराय में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जाएंगे, जबकि हाजीपुर और सहरसा में पेयजल आपूर्ति योजनाओं को लागू किया जाएगा।
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