भारत को ईयू से बड़ी राहत, सितंबर के बाद भी एक्वाकल्चर, शहद और अंडों का निर्यात रहेगा जारी; जानें कितना बड़ा है बाज़ार

Umang | Jun 09, 2026, 12:33 IST
Share

यूरोपीय संघ (ईयू) ने भारत को बड़ी राहत देते हुए सितंबर 2026 के बाद भी मछली, जलीय कृषि उत्पाद, शहद और अंडों के निर्यात की अनुमति दे दी है। इससे भारतीय निर्यातकों को फायदा होगा और यूरोपीय बाजार में इन उत्पादों की बिक्री जारी रहेगी। खासतौर पर मत्स्य क्षेत्र को इससे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

यूरोप से भारत को बड़ी राहत!
यूरोप से भारत को बड़ी राहत!
भारतीय कृषि और मत्स्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। यूरोपीय संघ (ईयू) ने भारत को उन अधिकृत देशों की सूची में शामिल कर लिया है जिन्हें सितंबर 2026 के बाद भी जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) उत्पाद, अंडे, शहद और पशु-आधारित कुछ अन्य उत्पादों का निर्यात 27 सदस्य देशों वाले यूरोपीय बाजार में जारी रखने की अनुमति होगी। इस फैसले से भारत के निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। खासकर मत्स्य क्षेत्र को, जहां यूरोपीय संघ भारत के प्रमुख निर्यात बाजारों में शामिल है।

केंद्र सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि यूरोपीय संघ ने रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस) को लेकर बढ़ती चिंताओं के मद्देनजर अपने नियमों में संशोधन किया है। इसके तहत विनियमन (ईयू) 2021/405 में बदलाव कर पशु मूल के कुछ उत्पादों के निर्यात के लिए अतिरिक्त मानदंड तय किए गए हैं। संशोधित नियम सितंबर 2026 से लागू होंगे।

भारतीय निर्यात को मिलेगी निरंतरता

मंत्रालय के अनुसार, भारत को अधिकृत देशों की सूची में शामिल किए जाने से यह सुनिश्चित हो गया है कि भारतीय उत्पादों का निर्यात सितंबर 2026 के बाद भी बिना किसी बाधा के यूरोपीय संघ के बाजार में जारी रह सकेगा। नए नियमों के लागू होने के बाद केवल उन्हीं देशों को निर्यात की अनुमति होगी, जो निर्धारित मानकों और नियंत्रण व्यवस्थाओं को पूरा करेंगे।

मत्स्य क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण फैसला

यह निर्णय विशेष रूप से भारतीय मत्स्य उद्योग के लिए अहम माना जा रहा है। वर्तमान में भारत से यूरोपीय संघ को मछली और मत्स्य उत्पादों का निर्यात लगभग 1.59 अरब डॉलर का है। ऐसे में निर्यात की निरंतरता बनाए रखने से लाखों मछुआरों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों को सीधा लाभ मिलेगा। यूरोपीय संघ के बाजार में पहुंच बरकरार रहने से भारतीय समुद्री उत्पादों की मांग और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।

मानकों को पूरा करने के लिए किए गए प्रयास

वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि यूरोपीय आयोग के साथ लगातार संवाद कर नियामकीय आवश्यकताओं और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर काम किया गया। वहीं निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी) ने निरीक्षण, परीक्षण और प्रमाणन व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाया है। सरकार के अनुसार, यूरोपीय संघ के मानकों के अनुरूप भारत की आधिकारिक नियंत्रण प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए गए, जिसके परिणामस्वरूप भारत को अधिकृत देशों की सूची में स्थान मिला।

निर्यातकों को मिलेगा भरोसा

यूरोपीय संघ का यह फैसला भारतीय निर्यातकों के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे न केवल मौजूदा निर्यात को संरक्षण मिलेगा, बल्कि भविष्य में कृषि, मत्स्य और पशु-आधारित उत्पादों के निर्यात विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। यूरोपीय संघ दुनिया के सबसे बड़े और सख्त गुणवत्ता मानकों वाले बाजारों में गिना जाता है। ऐसे में भारत का अधिकृत देशों की सूची में शामिल होना भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और नियामकीय अनुपालन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
Tags:
  • European Union
  • EU Exports
  • Fish Exports
  • Aquaculture Products
  • Honey Export
  • Egg Export
  • Fisheries Sector
  • Export Inspection Council
  • Commerce Ministry
  • India Exports