इंदौर में BRICS कृषि सम्मेलन शुरू, खाद्य सुरक्षा से AI तक खेती के भविष्य पर होगा मंथन

Gaon Connection | Jun 09, 2026, 19:36 IST
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मध्य प्रदेश के इंदौर में भारत की अध्यक्षता में BRICS कृषि कार्य समूह (AWG) की बैठक शुरू हुई। 21 देशों के प्रतिनिधि खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, कृषि व्यापार, जलवायु-अनुकूल खेती और कृषि नवाचार पर चर्चा कर रहे हैं। सम्मेलन में AI, डिजिटल कृषि और स्मार्ट फार्मिंग पर भी फोकस रहेगा। बैठक से वैश्विक कृषि सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

इंदौर में जुटे 21 देशों के प्रतिनिधि
इंदौर में जुटे 21 देशों के प्रतिनिधि
वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन, खाद्य महंगाई, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और बढ़ती खाद्य सुरक्षा चुनौतियों के बीच मध्य प्रदेश के इंदौर में मंगलवार से BRICS एग्रीकल्चर वर्किंग ग्रुप की पांच दिवसीय बैठक शुरू हो गई। 9 से 13 जून तक चलने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में 21 देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह बैठक केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भविष्य की वैश्विक कृषि नीति और खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।

सम्मेलन में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, किसान कल्याण, जलवायु अनुकूल खेती, कृषि नवाचार, डिजिटल कृषि और कृषि व्यापार जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच BRICS देशों के बीच बढ़ता सहयोग दुनिया की खाद्य सुरक्षा को नई दिशा दे सकता है।

वैश्विक कृषि कूटनीति का बड़ा मंच बना इंदौर

BRICS कृषि सम्मेलन को वैश्विक कृषि कूटनीति के बड़े मंच के रूप में देखा जा रहा है। पांच दिनों तक चलने वाले विचार-विमर्श में किसानों की आय बढ़ाने, कृषि व्यापार को मजबूत करने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित करने पर रणनीति तैयार की जाएगी। सम्मेलन के समापन पर सदस्य और सहयोगी देशों द्वारा संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किए जाने की संभावना है, जो आने वाले वर्षों की कृषि नीतियों को प्रभावित कर सकता है।

AI और स्मार्ट फार्मिंग पर विशेष जोर

इस बार सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण खेती में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, डिजिटल एग्रीकल्चर, ड्रोन और प्रिसिजन फार्मिंग जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। उद्देश्य खेती की लागत कम करना, उत्पादकता बढ़ाना और किसानों को तकनीक आधारित समाधान उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि में डिजिटल तकनीकों का उपयोग आने वाले वर्षों में खाद्य उत्पादन और संसाधन प्रबंधन का स्वरूप बदल सकता है।

जलवायु परिवर्तन से निपटने की साझा रणनीति

जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के कारण कृषि क्षेत्र नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। सूखा, बाढ़, हीटवेव और जल संकट जैसी समस्याओं से निपटने के लिए BRICS देश साझा रणनीति बनाने पर विचार करेंगे। सम्मेलन में क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर, प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पादन, जल संरक्षण और मिट्टी के स्वास्थ्य सुधार जैसे विषयों को भी प्रमुखता दी जाएगी।

कृषि शक्ति के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका

विशेषज्ञों के अनुसार BRICS+ देशों के पास दुनिया की बड़ी आबादी, विशाल कृषि भूमि और खाद्य उत्पादन का बड़ा हिस्सा मौजूद है। ऐसे में इन देशों की नीतियां वैश्विक खाद्य सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकती हैं। भारत आज दुनिया के प्रमुख कृषि उत्पादक देशों में शामिल है। देश दूध उत्पादन में विश्व में अग्रणी है और खाद्यान्न उत्पादन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। कृषि अनुसंधान, डिजिटल तकनीक और खाद्य वितरण प्रणाली में भारत की उपलब्धियों को देखते हुए BRICS कृषि एजेंडे में उसकी भूमिका और मजबूत होती दिखाई दे रही है।

मध्य प्रदेश के कृषि उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच

सम्मेलन से मध्य प्रदेश के कृषि उत्पादों को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की उम्मीद है। झाबुआ का सफेद मक्का, नरसिंहपुर का गुड़, मंडला के मिलेट्स, छिंदवाड़ा की चिरौंजी और बुरहानपुर के केले से बने उत्पादों को वैश्विक बाजारों में पहुंचाने की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। इससे राज्य के कृषि निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है।

मालवा की संस्कृति से रूबरू होंगे विदेशी मेहमान

कृषि बैठक के साथ-साथ विदेशी प्रतिनिधियों को इंदौर और मालवा की सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित कराया जाएगा। मेहमानों को 56 दुकान, सराफा बाजार और ऐतिहासिक मांडू सहित प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इससे मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

कृषि सहयोग से बदल सकती है वैश्विक तस्वीर

विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS+ देशों को केवल कृषि व्यापार तक सीमित रहने के बजाय शोध, तकनीक, जलवायु समाधान, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप नवाचार और किसानों के प्रशिक्षण पर भी मिलकर काम करना होगा। यदि सदस्य देश साझा कृषि तंत्र विकसित करने में सफल रहते हैं तो यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और टिकाऊ कृषि के लिए बड़ा कदम साबित हो सकता है।
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