Mandi Tax Update: MP सरकार ने मंडी शुल्क 1% से घटाकर 0.5% किया, जानें पूरा फैसला
मध्य प्रदेश सरकार ने कृषि उपज मंडी शुल्क (मंडी टैक्स) को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने कपास पर लगने वाले मंडी शुल्क को 1 प्रतिशत से घटाकर 0.5 प्रतिशत कर दिया है। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश के कपास किसानों और जिनिंग उद्योग को फायदा मिलेगा, साथ ही कपास व्यापार को राज्य के भीतर ही बढ़ावा मिलेगा।
वहीं दूसरी ओर अधिकांश अन्य कृषि उपजों पर मंडी शुल्क 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से हर साल करीब 800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी, जिसे कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
कपास पर क्यों घटाया गया मंडी शुल्क?
मध्य प्रदेश देश के प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में शामिल है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य के कई किसान अपनी कपास पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र की मंडियों में बेचने लगे थे, क्योंकि वहां व्यापारिक परिस्थितियां अधिक अनुकूल मानी जाती थीं।
सरकार का मानना है कि मंडी शुल्क घटाकर 0.5 प्रतिशत करने से किसानों को अपनी उपज राज्य के भीतर ही बेचने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे स्थानीय मंडियों में कारोबार बढ़ेगा और किसानों को दूर-दराज के राज्यों में जाने की जरूरत कम पड़ेगी।
जिनिंग और कपास उद्योग को मिलेगी मजबूती
राज्य में करीब 158 कपास जिनिंग मिलें संचालित हैं। उद्योग जगत लंबे समय से मंडी शुल्क कम करने की मांग कर रहा था। सरकार का कहना है कि शुल्क घटने से कपास प्रसंस्करण उद्योग की लागत कम होगी और उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। इस फैसले से प्रदेश से उद्योगों के पलायन पर भी रोक लगने की उम्मीद है। साथ ही नए निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।
अन्य फसलों पर बढ़ा मंडी शुल्क
जहां कपास को राहत दी गई है, वहीं अधिकांश अन्य कृषि उपजों पर मंडी शुल्क 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया गया है। यानी अब 100 रुपये की कृषि उपज पर किसानों या व्यापारियों को 1 रुपये की जगह 1.50 रुपये शुल्क देना होगा। सरकार का तर्क है कि इस बढ़ी हुई आय का उपयोग कृषि बाजारों के आधुनिकीकरण, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और किसानों को बेहतर सुविधाएं देने में किया जाएगा।
सरकार को होगी 800 करोड़ रुपये अतिरिक्त आय
मंडी शुल्क में बदलाव के बाद राज्य सरकार को हर साल लगभग 800 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है। इससे मंडी बोर्ड और कृषि क्षेत्र से जुड़ी विकास योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन बढ़ेंगे। इस राशि का उपयोग कृषि अवसंरचना, भंडारण, सड़क और सिंचाई सुविधाओं के विकास में किया गया तो इसका लाभ किसानों को भी मिलेगा।
रोजगार और निवेश बढ़ने की उम्मीद
कैबिनेट का मानना है कि कपास पर शुल्क में कटौती से जिनिंग, प्रेसिंग और टेक्सटाइल उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इससे राज्य में नए निवेश आकर्षित होंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। कपास उत्पादन वाले क्षेत्रों में छोटे और मध्यम उद्योगों को भी इस फैसले से फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
किसानों के लिए क्या बदलेगा?
कपास उगाने वाले किसानों को अपनी उपज बेचने में अधिक विकल्प मिल सकते हैं और व्यापारिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। हालांकि अन्य फसलों के किसानों और व्यापारियों पर बढ़े हुए मंडी शुल्क का असर देखने को मिल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार अतिरिक्त राजस्व का उपयोग कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में किस तरह करती है।