सिर्फ फसल बेचने से नहीं बढ़ेगी किसानों की कमाई! फल, सब्जी और दूध से ज्यादा मुनाफा कमाने का रास्ता क्या है?

Gaon Connection | Jun 09, 2026, 13:14 IST
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गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित SAPLING 2026 संवाद के दौरान खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय ने एक नई रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार भारत में फूड प्रोसेसिंग का स्तर वर्ष 2016 के लगभग 10 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में करीब 17 प्रतिशत तक पहुंच गया है। रिपोर्ट में बताया गया कि कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन और प्रोसेसिंग बढ़ने से किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं, फसल कटाई के बाद होने वाला नुकसान कम हो सकता है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

फल या सब्जियों के साथ खड़ा किसान<br>
फल या सब्जियों के साथ खड़ा किसान
किसान यदि टमाटर बेचता है तो उसे एक कीमत मिलती है, लेकिन वही टमाटर सॉस या प्यूरी बनकर बाजार में कई गुना महंगा बिकता है।

इसी तरह दूध से पनीर, दही या अन्य उत्पाद और फलों से जूस, जैम या प्रोसेस्ड उत्पाद तैयार करके उनकी कीमत बढ़ाई जा सकती है। कृषि विशेषज्ञ लंबे समय से इसे किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण तरीका मानते रहे हैं।

भारत में आज भी बड़ी मात्रा में कृषि उपज कच्चे रूप में बाजार तक पहुंचती है। इससे किसानों को सीमित लाभ मिलता है, जबकि फसल कटाई के बाद खराब होने से भी काफी नुकसान होता है।

किसानों की कमाई बढ़ाने का नया फॉर्मूला

किसानों की आय बढ़ाने की बात अक्सर होती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ ज्यादा उत्पादन से कमाई बढ़ सकती है? खेती किसानी से जुड़े एक्सपर्ट और सरकारें भी इस ओर ध्यान दिलाने की कोशिश में हैं कि असली मुनाफा तब मिलता है जब किसान अपनी उपज को कच्चे रूप में बेचने के बजाय उसकी प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन करें। यानी दूध से पनीर, फलों से जूस और सब्जियों से प्रोसेस्ड उत्पाद बनाकर बाजार में उतारें।

इसी मुद्दे पर गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित SAPLING 2026 संवाद में दक्षिण एशिया के कई देशों के नीति निर्माता, कृषि विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और स्टार्टअप्स एक मंच पर जुटे। चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि फूड प्रोसेसिंग के जरिए किसानों की आय कैसे बढ़ाई जाए, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कैसे कम किया जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर कैसे पैदा किए जाएं।

तकनीक, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग को फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र के विस्तार के लिए जरूरी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि फूड प्रोसेसिंग कृषि और समृद्धि के बीच एक मजबूत कड़ी है। उनके अनुसार इससे किसानों की आय बढ़ाने, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, रोजगार पैदा करने और खाद्य सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने तकनीक, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग को फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र के विस्तार के लिए जरूरी बताया।

रिपोर्ट में क्या सामने आया?

कार्यक्रम के दौरान जारी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में खाद्य प्रसंस्करण का स्तर वर्ष 2016 के लगभग 10 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में करीब 17 प्रतिशत तक पहुंच गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फल, सब्जियां और डेयरी जैसे क्षेत्रों में अभी भी प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से किसानों को बेहतर कीमत मिलने और खाद्य अपव्यय कम होने की उम्मीद है।

सिर्फ बड़े उद्योग नहीं, छोटे उद्यम भी होंगे मजबूत

चर्चा में यह भी सामने आया कि छोटे फूड प्रोसेसर, किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण उद्यमियों को मजबूत किए बिना फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र का विस्तार संभव नहीं है।इसके लिए यदि छोटे प्रोसेसरों को तकनीक, वित्त और बाजार तक पहुंच मिले तो ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

तकनीक और कोल्ड चेन पर जोर

कार्यक्रम में कोल्ड स्टोरेज, सप्लाई चेन, डिजिटल ट्रेसिबिलिटी, स्मार्ट प्रोसेसिंग तकनीक और आधुनिक भंडारण व्यवस्था जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए मजबूत कोल्ड चेन नेटवर्क की जरूरत है।

किसानों के लिए इसका क्या मतलब है?

भविष्य में केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। किसानों को बेहतर कमाई के लिए अपनी उपज का मूल्य बढ़ाने वाले मॉडल अपनाने होंगे। फूड प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और वैल्यू एडिशन ऐसे रास्ते हैं जिनसे कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। यही वजह है कि दक्षिण एशिया के देशों में अब कृषि विकास के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार का बड़ा इंजन माना जा रहा है।
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