(PMMSY) प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना: बढ़ी मछुआरों की आय, मछली उत्पादन और निर्यात में भी इजाफा
Gaon Connection | Mar 12, 2026, 16:12 IST
भारत सरकार मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) चला रही है। इस योजना से मछली उत्पादन और निर्यात बढ़ा है साथ ही मछुआरों की आय में वृद्धि हुई है। योजना के बाद से तटीय गाँवों में बुनियादी ढांचे का विकास हो रहा है, जिससे पशुपालन क्षेत्र को भी मजबूत किया जा रहा है।
मछली उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी
देश में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) चला रही है। इस योजना का उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाना, नई तकनीकों को बढ़ावा देना, मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना और मछुआरों के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। सरकार का कहना है कि इस योजना से मछुआरों और मछली पालकों की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है।
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री Rajiv Ranjan Singh ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं और पहलों का उद्देश्य मत्स्य और पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करना, किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।
पिछले कुछ वर्षों में देश में मछली उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2019-20 में जहाँ मछली उत्पादन 141.64 लाख टन था, वहीं यह बढ़कर 2024-25 में 197.75 लाख टन हो गया है। इसके साथ ही मत्स्य निर्यात में भी वृद्धि हुई है। निर्यात का मूल्य 46,666 करोड़ रुपये से बढ़कर 62,408 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। इससे मछुआरों की आय और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हुई है।
मत्स्य क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने के लिए Indian Council of Agricultural Research (ICAR) के तहत कई अनुसंधान संस्थान लगातार अध्ययन कर रहे हैं। Central Marine Fisheries Research Institute (CMFRI) की एक वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार भारत के लगभग 91.1 प्रतिशत समुद्री मछली भंडार स्वस्थ स्थिति में हैं। शोध में यह भी सामने आया है कि पर्यावरण और जलवायु में बदलाव के कारण उत्पादन में कुछ उतार-चढ़ाव होते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में समुद्री मत्स्य उत्पादन स्थिर बना हुआ है।
केंद्र सरकार तटीय क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए Climate Resilient Coastal Fishermen Villages (CRCFV) कार्यक्रम भी चला रही है। इसके तहत मछली सुखाने के यार्ड, प्रसंस्करण केंद्र, मछली बाजार, आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज और फिशिंग जेटी जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। साथ ही समुद्री शैवाल की खेती, कृत्रिम रीफ और हरित ईंधन के उपयोग जैसी जलवायु-अनुकूल गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार मछली संसाधनों को बढ़ाने के लिए रिवर रेंचिंग और सी रेंचिंग जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित कर रही है। इसमें नदियों और समुद्र में मछली के बीज छोड़े जाते हैं, जिससे मछली की संख्या बढ़ाने में मदद मिलती है और मछुआरों की आय में भी सुधार होता है।
सरकार पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए भी कई कदम उठा रही है। राज्यों को पशु चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं। पशुओं में फैलने वाली बीमारियों जैसे एफएमडी, ब्रुसेलोसिस, पीपीआर और क्लासिकल स्वाइन फीवर के खिलाफ टीकाकरण के लिए केंद्र सरकार 100 प्रतिशत सहायता दे रही है। इसके अलावा किसानों के दरवाजे तक पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के लिए देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 4000 से अधिक मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां काम कर रही हैं।
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री Rajiv Ranjan Singh ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं और पहलों का उद्देश्य मत्स्य और पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करना, किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।
मछली उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी
मछुआरों की आय और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि
जलवायु बदलाव पर हो रहा शोध
तटीय गाँवों में विकसित हो रहा बुनियादी ढांचा
मछली भंडार बढ़ाने के लिए नई पहल
रिवर रेंचिंग और सी रेंचिंग जैसी गतिविधियों को भी मिला प्रोत्साहन