दुबई पहुंची असम की मशहूर तेजपुर लीची, किसानों के लिए खुला विदेशी बाजार का नया रास्ता

Preeti Nahar | Jun 09, 2026, 09:44 IST
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असम की GI-टैग प्राप्त प्रसिद्ध तेजपुर लीची की पहली निर्यात खेप APEDA के सहयोग से दुबई भेजी गई है। इस पहल से किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है, वहीं पूर्वोत्तर भारत के कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलने का रास्ता भी मजबूत हुआ है।

<h3>किसानों के लिए खुला अंतरराष्ट्रीय बाजार का नया रास्ता</h3>
किसानों के लिए खुला अंतरराष्ट्रीय बाजार का नया रास्ता
भारत के अलग-अलग राज्यों के कृषि उत्पाद अब तेजी से विदेशी बाजारों तक पहुंच रहे हैं। इससे किसानों को न सिर्फ अपने उत्पाद का बेहतर दाम मिल रहा है, बल्कि स्थानीय फसलों और फलों को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है। इसी कड़ी में अब असम की प्रसिद्ध तेजपुर लीची ने एक नई उपलब्धि हासिल की है।

असम की GI-टैग प्राप्त तेजपुर लीची की पहली निर्यात खेप दुबई भेजी गई है। APEDA के सहयोग से हुई इस पहल को पूर्वोत्तर भारत के बागवानी क्षेत्र के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। इससे क्षेत्र के लीची उत्पादकों को नए बाजार मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

क्या है तेजपुर लीची की खासियत?

तेजपुर लीची असम के सोनितपुर जिले और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उगाई जाती है। यह लीची अपनी खास मिठास, सुगंध, आकर्षक रंग और बेहतर गुणवत्ता के लिए जानी जाती है। इन्हीं विशेषताओं के कारण इसे GI (Geographical Indication) टैग भी मिला हुआ है।

GI टैग किसी उत्पाद की विशिष्ट पहचान को दर्शाता है और बताता है कि उसकी गुणवत्ता और विशेषता उसके भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी हुई है। इससे उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान मिलती है।

दुबई रवाना हुई पहली निर्यात खेप

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से तेजपुर लीची की पहली खेप दुबई भेजी गई है। यह केवल एक निर्यात नहीं बल्कि पूर्वोत्तर भारत के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यदि निर्यात का यह सिलसिला आगे भी जारी रहता है तो असम के लीची उत्पादकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

किसानों को क्या होगा फायदा?

विदेशी बाजारों में फलों की मांग और कीमतें अक्सर घरेलू बाजार की तुलना में बेहतर होती हैं। ऐसे में निर्यात बढ़ने से किसानों को अपनी उपज का अधिक मूल्य मिलने की संभावना रहती है।

इसके अलावा, जब किसी क्षेत्र का उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचता है तो किसानों में गुणवत्ता सुधार, बेहतर पैकिंग और वैज्ञानिक खेती को अपनाने की रुचि भी बढ़ती है। इससे लंबे समय में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखने को मिल सकता है।

पूर्वोत्तर भारत के लिए क्यों है अहम?

पूर्वोत्तर भारत में कई ऐसे कृषि और बागवानी उत्पाद हैं जिनकी गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की मानी जाती है, लेकिन बाजार और निर्यात सुविधाओं की कमी के कारण वे बड़े बाजार तक नहीं पहुंच पाते। तेजपुर लीची का निर्यात इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

इससे न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के किसानों को यह संदेश मिलेगा कि स्थानीय उत्पाद भी वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना सकते हैं।

APEDA की क्या रही भूमिका?

APEDA देश के कृषि और खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए काम करता है। संस्था किसानों, उत्पादक समूहों और निर्यातकों को बाजार से जोड़ने, गुणवत्ता मानकों की जानकारी देने और निर्यात प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद करती है।

तेजपुर लीची के निर्यात में भी APEDA ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे स्थानीय उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का अवसर मिला।

यदि गुणवत्ता, ग्रेडिंग, पैकिंग और कोल्ड चेन सुविधाओं को मजबूत किया जाए तो तेजपुर लीची की मांग खाड़ी देशों के अलावा यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बढ़ सकती है।

यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकती है, बल्कि असम और पूर्वोत्तर भारत के कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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