सोशल मीडिया पर खूबसूरत दिखी ये झील, लेकिन वैज्ञानिकों ने बताया ‘ख़तरे की घंटी’! आखिर क्या है वाटर हायसिंथ?
Threat of 'Water Hyacinth' looms over beautiful Imphal lake: मणिपुर की राजधानी इंफाल के लम्फेलपट (Lamphelpat) में इन दिनों पानी पर तैरते बैंगनी फूलों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं।झील की सतह पर फैले बैंगनी फूलों और हरे पौधों की तस्वीरें लोगों को आकर्षित कर रही हैं। कई लोग इसे प्राकृतिक सुंदरता और ‘फूलों से ढकी झील’ बताकर शेयर कर रहे हैं।
पहली नजर में यह दृश्य किसी फ्लोटिंग गार्डन जैसा लगता है, लेकिन इसके पीछे छिपी कहानी उतनी खूबसूरत नहीं है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि झील में तेजी से फैल रहा यह पौधा पानी की पूरी पारिस्थितिकी को बदल सकता है। यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे सिर्फ एक ‘वायरल व्यू’ नहीं, बल्कि आने वाले पर्यावरणीय संकट की चेतावनी मान रहे हैं।
‘वाटर हायसिंथ’इकोसिस्टम को कर रहा प्रभावित
मणिपुर यूनिवर्सिटी के पीएचडी स्कॉलर नामिरकपम राकेश के मुताबिक, झील में तेजी से फैल रहे ये पौधे ‘वाटर हायसिंथ’ (Water Hyacinth) हैं, जिन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक आक्रामक जलीय पौधों में गिना जाता है। देखने में सुंदर लगने वाला यह पौधा पानी के पूरे इकोसिस्टम को प्रभावित कर सकता है।
क्या है वाटर हायसिंथ?
वाटर हायसिंथ (जलखुंभी) एक तैरने वाला जलीय पौधा है, जिसका वैज्ञानिक नाम Eichhornia crassipes है। यह मूल रूप से दक्षिण अमेरिका का पौधा माना जाता है, लेकिन अब दुनिया के कई देशों में फैल चुका है। इसके बैंगनी-नीले फूल और चमकदार हरे पत्ते इसे आकर्षक बनाते हैं। यही वजह है कि कई जगह इसे सजावटी पौधे के रूप में भी इस्तेमाल किया गया। लेकिन बाद में तेजी से फैलने वाली आक्रामक प्रजाति साबित हुई।
सोशल मीडिया पर क्यों हो रहा वायरल?
लम्फेलपट झील में इन पौधों के फूल खिलने के बाद लोगों ने इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया। बैंगनी फूलों से ढकी झील का दृश्य देखने में बेहद खूबसूरत लग रहा है, इसलिए कई यूजर्स इसे ‘नेचर ब्लूम’ और ‘मणिपुर का फ्लोटिंग गार्डन’ जैसे नामों से पोस्ट कर रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुंदरता असल में झील के लिए खतरे का संकेत है।
पर्यावरण के लिए कैसे बनता है खतरा?
पर्यावरण विशेषज्ञ नामिरकपम राकेश बताते हैं, वाटर हायसिंथ बहुत तेजी से फैलता है। एक पौधा सिर्फ 23 दिनों में लगभग 100 नए पौधे पैदा कर सकता है। यही वजह है कि कुछ ही समय में यह पूरे जलाशय की सतह को ढक लेता है। जब यह पानी की सतह पर फैल जाता है, तो कई गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं:
1. पानी में ऑक्सीजन की कमी- यह पौधा पानी की सतह को पूरी तरह ढक देता है, जिससे सूरज की रोशनी नीचे तक नहीं पहुंच पाती। इससे पानी में घुली ऑक्सीजन कम होने लगती है और मछलियों व अन्य जलीय जीवों पर असर पड़ता है।
2. जैव विविधता को नुकसान- तेजी से फैलने के कारण यह दूसरे स्थानीय जलीय पौधों की जगह घेर लेता है। इससे झील का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है।
3. पानी का बहाव रुकना- घनी परत बनने से जल निकासी और पानी का प्रवाह प्रभावित होता है। इससे बाढ़ और जलभराव की समस्या भी बढ़ सकती है।
4. मच्छरों की संख्या बढ़ना- जहाँ पानी स्थिर हो जाता है, वहाँ मच्छरों के पनपने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।
फिर भी क्यों माना जाता है उपयोगी?
वाटर हायसिंथ पूरी तरह बेकार पौधा नहीं है। इसकी जड़ें पानी से भारी धातुओं (Heavy Metals) और तेल जैसे प्रदूषकों को अवशोषित कर सकती हैं। इसी वजह से कुछ जगहों पर इसे वॉटर ट्रीटमेंट रिसर्च में भी इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि समस्या तब शुरू होती है, जब इसकी संख्या नियंत्रण से बाहर हो जाती है।
दिलचस्प बात यह है कि जिस लम्फेलपट झील को आज सोशल मीडिया पर लोग बैंगनी फूलों से ढकी खूबसूरत जगह के रूप में देख रहे हैं, वही झील पिछले कुछ वर्षों से बड़े पुनर्जीवन (revival) प्रोजेक्ट का हिस्सा भी रही है। सरकार और पर्यावरण एजेंसियां इस जलाशय को बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं ताकि इंफाल घाटी में बाढ़ नियंत्रण, जल संरक्षण और जैव विविधता को मजबूत किया जा सके। ऐसे में वैज्ञानिकों का कहना है कि वाटर हायसिंथ जैसे आक्रामक पौधों का तेजी से फैलना इस पुनर्जीवन प्रयास के लिए नई चुनौती बन सकता है।
लम्फेलपट के लिए क्यों जरूरी है सतर्कता?
एक तरफ झील में पक्षियों की संख्या बढ़ने और इकोसिस्टम सुधरने के संकेत मिल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पानी की सतह पर तेजी से फैल रही यह वनस्पति झील की ऑक्सीजन, जल प्रवाह और प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है। यानी जो दृश्य सोशल मीडिया पर ‘नेचुरल ब्यूटी’ के रूप में वायरल हो रहा है, वह असल में झील संरक्षण की लड़ाई का दूसरा पक्ष भी दिखाता है। लेकिन समय रहते इस पौधे को नियंत्रित नहीं किया गया, तो लम्फेलपट की जैव विविधता और जल गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए वैज्ञानिक लगातार इसकी निगरानी और प्रबंधन की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।