सोशल मीडिया पर खूबसूरत दिखी ये झील, लेकिन वैज्ञानिकों ने बताया ‘ख़तरे की घंटी’! आखिर क्या है वाटर हायसिंथ?
Preeti Nahar | May 24, 2026, 13:30 IST
मणिपुर की एक झील इन दिनों सोशल मीडिया पर अपनी खूबसूरत बैंगनी चादर की वजह से वायरल हो रही है। लोग इसे प्रकृति का अद्भुत नजारा बता रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों की नजर में यह सुंदरता एक बड़े खतरे का संकेत हो सकती है। जिस पौधे ने झील को ढक लिया है, वह दुनिया की सबसे तेजी से फैलने वाली जलीय प्रजातियों में गिना जाता है। आखिर क्या है यह पौधा और क्यों इसके बढ़ने से पर्यावरण को खतरा माना जा रहा है?
जलकुंभी का पर्यावरण पर असर, मणिपुर लम्फेलपट
पहली नजर में यह दृश्य किसी फ्लोटिंग गार्डन जैसा लगता है, लेकिन इसके पीछे छिपी कहानी उतनी खूबसूरत नहीं है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि झील में तेजी से फैल रहा यह पौधा पानी की पूरी पारिस्थितिकी को बदल सकता है। यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे सिर्फ एक ‘वायरल व्यू’ नहीं, बल्कि आने वाले पर्यावरणीय संकट की चेतावनी मान रहे हैं।
‘वाटर हायसिंथ’इकोसिस्टम को कर रहा प्रभावित
आक्रामक जलीय पौधों का खतरा
क्या है वाटर हायसिंथ?
सोशल मीडिया पर क्यों हो रहा वायरल?
पर्यावरण के लिए कैसे बनता है खतरा?
झीलों में फैलती जलखुंभी
1. पानी में ऑक्सीजन की कमी- यह पौधा पानी की सतह को पूरी तरह ढक देता है, जिससे सूरज की रोशनी नीचे तक नहीं पहुंच पाती। इससे पानी में घुली ऑक्सीजन कम होने लगती है और मछलियों व अन्य जलीय जीवों पर असर पड़ता है।
2. जैव विविधता को नुकसान- तेजी से फैलने के कारण यह दूसरे स्थानीय जलीय पौधों की जगह घेर लेता है। इससे झील का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है।
3. पानी का बहाव रुकना- घनी परत बनने से जल निकासी और पानी का प्रवाह प्रभावित होता है। इससे बाढ़ और जलभराव की समस्या भी बढ़ सकती है।
4. मच्छरों की संख्या बढ़ना- जहाँ पानी स्थिर हो जाता है, वहाँ मच्छरों के पनपने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।
फिर भी क्यों माना जाता है उपयोगी?
दिलचस्प बात यह है कि जिस लम्फेलपट झील को आज सोशल मीडिया पर लोग बैंगनी फूलों से ढकी खूबसूरत जगह के रूप में देख रहे हैं, वही झील पिछले कुछ वर्षों से बड़े पुनर्जीवन (revival) प्रोजेक्ट का हिस्सा भी रही है। सरकार और पर्यावरण एजेंसियां इस जलाशय को बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं ताकि इंफाल घाटी में बाढ़ नियंत्रण, जल संरक्षण और जैव विविधता को मजबूत किया जा सके। ऐसे में वैज्ञानिकों का कहना है कि वाटर हायसिंथ जैसे आक्रामक पौधों का तेजी से फैलना इस पुनर्जीवन प्रयास के लिए नई चुनौती बन सकता है।