साहित्य और सिनेमा का अटूट साथ

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जमाना बदलता रहेगा, फिल्मों में प्रयोग होते रहेंगे लेकिन फिल्मों में साहित्य का असर हमेशा प्रभावी रहेगा। चर्चित उपन्यासों और कालजयी रचनाओं पर आधारित फिल्में हर दौर में पसंद की जाती रही हैं। यही वजह है कि निर्देशक, निर्माता उपन्यासों को टटोलना और उन पर फिल्म बनाना पसंद करते हैं। यह सही भी है इससे वे दर्शक जिन्हें साहित्य की रचनाओं का ज्ञान नहीं है उन्हें जानकारी मिलती है। इसके अलावा वे दर्शक जो हमेशा से उपन्यासों को पढ़ना पसंद करते हैं वे बड़े पर्दे पर उस पर आधारित फिल्में देखकर गौरवांतित होते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसी ही फिल्में के बारे में बता रहे हैं- 

  • आर के नारायण के उपन्यास ‘गाइड’ पर देव आनंद के भाई विजय आनंद ने गाइड नाम से ही फिल्म बनाई। 1965 में बनी इस फिल्म में देव आनंद और वहीदा रहमान मुख्य भूमिका में थे। कई अवॉर्ड जीतने वाली यह फिल्म हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। फिल्म में देवआनंद राजू गाइड की भूमिका में थे, वहीं वहीदा रहमान एक कुशल नर्तकी और पति द्वारा उपेक्षित महिला रोजी की किरदार में थीं।
  • 1962 में आई फिल्म साहिब बीवी और ग़ुलाम बंगाली लेखक बिमल मित्रा के उपन्यास साहिब बीबी और गोलाम पर आधारित थी। कोलकाता के जमींदार पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म को बेहद पसंद किया गया था। फिल्म के लिए मीना कुमारी को बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था।
  • गोवर्धनराम माधवराम त्रिपाठी द्वारा लिखित गुजराती उपन्यास सरस्वतीचंद्र पर आधारित फिल्म 1968 में बनी थी। इसमें नूतन के साथ मनीष लीड रोल में थे। इस फिल्म का विषय जागीरदारी प्रथा पर बेस्ड था। फिल्म को म्यूजिक डायरेक्टर और सिनेमेटोग्राफी के लिए नैशनल अवॉर्ड भी मिला था।
  • 1977 में बनी सत्यजीत रे निर्देशित फिल्म शतरंज के खिलाड़ी प्रेमचंद की लघु कहानी पर आधारित थी। फिल्म 1857 की क्रान्ति के आसपास की दौर की कहानी कहती है। इसमें अमजद खान, संजीव कुमार, सईद जाफरी के साथ शबाना आजमी और टॉम अल्टर मुख्य भूमिका में थे।  
  • 1978 में 1857 की क्रान्ति पर आधारित एक और लेखक के उपन्यास पर फिल्म बनाई गई थी। लेखक रस्किन बॉन्ड की फिक्शनल किताब अ फ्लाइट ऑफ पीजंस पर बेस्ड श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित जुनून एक अवॉर्ड विनिंग फिल्म थी। शशि कपूर, नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और नफीसा अली इसमें मुख्य किरदार थे। 
  • ऋषिकेश मुखर्जी ने शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास मेजदीदी पर आधारित 1967 में फिल्म मझली दीदी बनाई थी जिसमें धर्मेंद्र और मीना कुमारी लीड रोल में थे।दीपा मेहता की ‘1947 अर्थ’ भी बापसी सिदवा की नॉवेल क्रैकिंग इंडिया पर आधारित थी। इसमें आमिर खान, राहुल खन्ना और नंदिता दास मुख्य किरदार में थे।                                                                                                                                                               

  • जानी-मानी लेखिका अमृता प्रीतम के उपन्यास पिंजर पर इसी नाम से फिल्म बनी। बंटवारे के दौरान हुए सामाजिक उथल-पुथल, प्यार और नफरत पर आधारित इस फिल्म को बेहद पसंद किया गया। निर्देशक थे चंद्र प्रकाश द्विवेदी। वर्ष 2003 में बनी इस फिल्म को तीन भाषाओं हिंदी, उर्दू और पंजाबी में बनाया गया। फिल्म के मुख्य कलाकार थे मनोज बाजपेई, उर्मिला मातोंडकर और प्रियांशु चटर्जी।

विशाल भारद्वाज की फिल्में

निर्देशक विशाल भारद्वाज की ज्यादा फिल्में उपन्यास आधारित रहीं। इसमें खासकर शेक्सपीयर और रस्किन बॉन्ड के उपन्यासों का इस्तेमाल हुआ। विशाल भारद्वाज की फिल्म मकबूल शेक्सपीयर के नाटक मैकबेथ पर आधारित थी। वहीं ओंकारा, ऑथेलो पर बेस्ड थी और हैदर, हेमलेट पर आधारित थी। इसी तरह फिल्म सात खून माफ रस्किन बॉन्ड की कहानी सुजैनास सेवेन हस्बैंड और द ब्लू अम्ब्रैला भी रस्किन बॉन्ड की कहानी थी।   

चेतन भगत के उपन्यास पर बनी फिल्में

युवाओं के पसंदीदा लेखक चेतन भगत के उपन्यासों को आज के निर्माता- निर्देशकों ने फिल्मों के जरिए खूब भुनानी की कोशिश की। फाइव पॉइंट समवन पर बेस्ड थ्री इडियट्स, थ्री मिस्टेक्स ऑफ माय लाइफ पर बेस्ड काय पो चे, वन नाइट ऐट कॉलसेंटर पर आधारित फिल्म हैलो और टू स्टेट्स पर आधारित फिल्म बन चुकी है। इन दिनों उनकी लेटेस्ट नॉवेल हाफ गर्लफ्रेंड पर भी फिल्म बन रही है। 

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