साख के लिए बच्चों के भविष्य से खिलवाड़

साख के लिए बच्चों के भविष्य से खिलवाड़गाँव कनेक्शन

लखनऊ। साख बढ़ाने की कोशिश में लगे स्कूल बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बोर्ड परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन के दबाव में स्कूल औसत छात्रों को 9वीं और 11वीं में फेल कर रहे हैं ताकि उनकी वजह से रिजल्ट पर असर न पड़े। स्कूलों की रणनीति से अभिभावकों को होश उड़े हुए हैं।

हरदोई रोड स्थित सेंट क्लेअर्स कान्वेंट स्कूल में 9वीं कक्षा के दो दर्जन से ज्यादा छात्रों को फेल कर दिया गया है। नाराज अभिभावकों का कहना है कि स्कूल ने पैसे कमाने और 10वीं के बोर्ड में अपने रिजल्ट को बेहतर बनाए रखने के लिए औसत छात्रों को भी फेल कर दिया है। फेल हुए छात्रों में से कई छात्रों ने नए सत्र में एक भी दिन स्कूल में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवाई है तो वहीं कुछ ने अपना नाम स्कूल से कटवा लिया है।

इसी स्कूल से कक्षा नौ में फेल की गई एक छात्रा ने बताया, “स्कूल में नौवीं कक्षा के तीन सेक्शन हैं। इनमें हर एक में 38 से 42 छात्र होंगे। स्कूल ने मेरे जैसे करीब करीब 25-26 बच्चों को फेल कर दिया है जबकि हमारी परीक्षाएं अच्छी हुई थीं।” 

मायूस छात्रा आगे बताती हैं, “हमारी टीचर पहले ही कह रही थीं कि इस बार हाईस्कूल का रिजल्ट अच्छा आना चाहिए, जिससे स्कूल का नाम रोशन हो। इसीलिए जिनके नंबर बहुत अच्छे थे टीचरों ने उन्हें पास किया, या फिर जो किसी शिक्षक के चहेते थे।’’

बालागंज निवासी एक अभिभावक बताते हैं, “स्कूलों को ये अधिकार है कि बेहतर रिजल्ट न दे पाने वाले छात्रों को फेल करें, लेकिन इन लोगों की मंशा खराब है, ये सिर्फ चहेते बच्चों को ही आगे बढ़ाना चाहते हैं ताकि बोर्ड में अपने शानदार रिजल्ट का गुणगान कर सकें, लेकिन हमारे बच्चे का भविष्य खराब हो रहा है।”

वहीं एक स्कूल के शिक्षक ने यह स्वीकार किया कि प्रतिवर्ष हमारे स्कूल में दाखिले के लिए कई नामी स्कूलों से ऐसे बच्चे आते हैं जिनको कक्षा 9 और कक्षा 11 में फेल कर दिया जाता है। इस बार भी कई बच्चे हमारे स्कूल में दाखिले के लिए आ रहे हैं। 

सत्र की शुरुआत के साथ ही शुरू हो गया स्कूलों का खेल

लखनऊ। स्कूलों की मनमानियां बच्चों के साथ अभिभावकों पर भी भारी पड़ रही हैं। हाल यह है कि बच्चे स्कूल जाने से घबराने लगे हैं और अभिभावक स्कूल भेजने से। 

सत्र की शुरुआत में ही स्कूल ड्रेस, होमवर्क और फीस में जरा सी कोताही होने पर बच्चों को शारीरिक व मानसिक रूप से परेशान किया जाता है। 

बच्चे की शर्ट पर स्कूल का लोगो न होने,  सप्ताह में एक दिन पहनी जाने वाली हाउस ड्रेस न पहनने, जूते साफ न होने, होमवर्क पूरा न होने जैसी छोटी-छोटी बातों के लिए जहां बच्चों को सबके सामने बेइज्जत किया जाता है। वहीं इस सम्बन्ध में अभिभावकों को कई-कई फोन भी किए जाते हैं। 

कई स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों को तपती धूप में कक्षा से बाहर निकाल कर घंटों खड़ा कर दिया जाता है। इस तरह से बच्चे स्कूल में प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं।  

एलपीएस स्कूल में कक्षा 3 में पढ़ने वाले 8 वर्षीय छात्र की मां बताती हैं, “मेरे बच्चे की शर्ट पर एलपीएस का लोगो नहीं था, केवल इस बात पर बच्चे को कक्षा से बाहर निकालकर एक घंटे तक खड़ा कर दिया गया।

 गर्मी और थकान के चलते बच्चे की तबीयत खराब हो गयी तो वहीं पढ़ाई का भी नुकसान हुआ। अब बच्चा स्कूल जाने से डरता है तो वहीं हम लोगों को भी स्कूल भेजने में घबराहट होती है।” उनका कहना है, “शैक्षिक सत्र की शुरुआत है, फिर गर्मी की छुटि्टयां होंगी, कम से कम जुलाई तक तो इंतजार करना चाहिए।” 

वहीं एलपीएस में पढ़ने वाले एक अन्य बच्चे के अभिभावक बताते हैं, “फीस जमा करने में जरा सी देर हो गयी तो बच्चे को कक्षा से बाहर निकाल दिया। 

इस सजा से जहां बच्चे को तकलीफ हुई तो वहीं मेरी बेइज्जती भी हुई क्योंकि बच्चे की सजा की वजह फीस देरी से दे पाना था, जिससे स्कूल में लोगों को लगा कि मैं बच्चे को पढ़ाने में सक्षम नहीं हूं।” 

सीएमएस के कक्षा एक में पढ़ने वाली 7 वर्षीय बच्ची की बुआ कहती हैं, “मेरी भतीजी की फीस भी जमा है, पूरी ड्रेस में भी जाती है, लेकिन केवल हाउस ड्रेस (जो कि सप्ताह में एक बार पहनी जाती है) को न पहनने के कारण टीचर उसको टोकती थीं। घर पर फोन भी किया गया पर एक रिश्तेदार की मृत्यु हो जाने के कारण हाउस ड्रेस समय पर नहीं ला सकी थी। ड्रेस तो एक दिन ही पहननी थी, लेकिन इसके चलते बच्ची स्कूल जाने से डरने लगी थी। फिर मैं क्लास टीचर से मिली और उसी दिन ड्रेस खरीदी।” 

यह मामले तो केवल बानगी भर हैं, कई अन्य निजी स्कूलों द्वारा दी जाने वाली इसी तरह की मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से केवल बच्चे ही नहीं बल्कि उनके अभिभावकों को भी आये दिन प्रताड़ना का शिकार उठाना पड़ता है।

रिपोर्टर- मीनल टिंगल 

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