Read latest updates about "संवाद" - Page 1

  • "कहती थीं न अम्मा! हाय हर चीज़ की बुरी"

    नमस्ते साथियों, गांव कनेक्शन मेरा बहुत पुराना है। सच कहें तो भीतर मेरे एक गांव की लड़की आज भी रहती है। जिसने बैलगाड़ी में से खींच कर गन्ने चुराए हैं। मैं याद करती हूं वो दिन जब गांव में घर ज्यादा होते थे, बाज़ार कम। खेत घरों से ज़्यादा और हर गांव के बाहर एक जंगल होता था। हवा शुद्ध होती थी और...

  • संवाद- लाखों रुपए कमाने वाले किसान की जगह लड़कियां शादी के लिए खोजती हैं शहरी लड़का

    93 साल के डी क्लार्क गिल्बर्ट दुनिया देख चुके हैं। वह यूरोपीय देश बेल्जियम के शहर मोंस से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक गांव लेशोन्नेलेस में रहने वाले किसान हैं। जुलाई के पहले हफ्ते में मैं यूरोप की संक्षिप्त यात्रा पर था, इसी दौरान मेरी उनसे मुलाकात हुई।गिल्बर्ट तीसरी पीढ़ी के किसान हैं, पर अब...

  • दुनिया को कोलिंडा की तरह ख़ूबसूरत होना चाहिए

    परसों जब दुनिया फ्रांस के जीतने का जश्न मना रही थी और मैं ग़मजदा थी क्रोएशिया के हार जाने से। जिन पलों मैं लुका की उदास आँखों की तस्वीर को अपने फ़ोन में क़ैद रही थी, उन्हीं पलों में मेरी उदास नज़रें ठहरी एक ख़ूबसूरत महिला पर। जो व्लादिमीर पुतिन और मैक्रों के साथ मैदान में आयी। उन्होंने पहना था क्रोएशिया...

  • प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता बिना खर्च के भी सुधर सकती है

    सरकार ने स्कूली पोशाक, किताबें, स्कूल भवन, दोपहर का भोजन और स्कूल में शौचालय आदि का प्रबंध तो किया है लेकिन बच्चों को पढ़ाएगा कौन? कबीर की सरल भाषा में "बिना गुरु ज्ञान मिले कहो कैसे।" संयुक्त परिवार अब बचे नहीं, जहां दादा-दादी बच्चे की पढ़ाई आरम्भ करा देते थे, अब प्राथमिक शिक्षा पर समाज का कोई...

  • यही है उम्मीद कि अब और मासूम न गुज़रें महिला खतने की तकलीफ़ से

    "अगर लड़कियों का खतना नहीं किया जाता है तो वे आदमियों के पीछे भागने वाली वेश्याएं बन जाती हैं।" जी बिलकुल ठीक पढ़ा आपने। मुस्लिम समाज का एक समुदाय, बोहरा समुदाय आज भी लड़कियों में खतना हो इसकी वक़ालत इसी तर्क के साथ करता है। यह समुदाय मानता है कि महिलाओं को सेक्स सिर्फ बच्चा पैदा करने या पति को...

  • अब लद्दाख घूमने जाएं तो याद रखें आप एक रेगिस्तान में आए हैँ, पानी सहेजें

    आधुनिक दुनिया की आपाधापी से दूर स्वर्ग सरीखी छवि वाले लद्दाख को भी आधुनिक दुनिया का रोग लग गया है। इस खूबसूरत इलाके में पानी की कमी का संकट सर उठाने लगा है। इसी महीने से इस प्रांत के सबसे बड़े शहर लेह में पानी की कटौती शुरू हो गई है। अब यहां सिर्फ सुबह और शाम पानी की सप्लाई होती है वह भी महज दो-दो...

  • वर्षाजल और जंगल बचाना होगा

    पानी कैसे बचेगा, कैसे बढ़ेगा, इस प्रश्न से हमसे सामना होते रहता है। जनसाधारण के लिये पानी एक समस्या है, लेकिन वह इस समस्या का जाने-अनजाने एक कारक बन गया है। हमने पानी बचाने के जो पुराने तरीके थे, जो पानी बरतने की किफायती परम्पराएँ थीं, उसे भुला दिया है। पानी उलीचो संस्कृति को अपना लिया है, जंगल साफ...

  • सड़क छाप : एक ठो पत्रकार का एक ठो पत्र

    प्यारे दद्दू, हम हियाँ एकदम ठीक हैं। घर से चलते बखत आप हमसे बोले थे कि बेटा वैज्ञानिक बन जाना, टीचर बन जाना, अधिकारी बन जाना, डॉक्टर बन जाना। हमने कोशिश की कि कम्प्यूटर इन्जीनियर बन जाएँ, होटल मेनेजर बन जाएँ, मुनीम बन जाएँ, लेकिन कुछ भी न बन पाए दद्दू, हम कुछ भी न बन पाए। हमें ये एहसास हो गया था...

  • विश्व जनसंख्या दिवस : विकास में बाधक है तेजी से बढ़ती जनसंख्या

    विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई पर विशेषडॉ. अनुरूद्ध वर्माराष्ट्र को आज जिन गम्भीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उनमें से एक जनसंख्या विस्फोट की स्थिति है जो बहुत ही चिन्तनीय गति से बढ़ रही है। हमने किसी क्षेत्र में प्रगति की हो या न की हो परन्तु जनसंख्या वृद्धि के मामले में हम विश्व के अनेक देशों...

  • अपने हक की‍ आय भी नहीं मिलती किसानों को, पार्ट-2

    देश में खेती की हालत और किसान की दशा को लेकर कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने एक विशेष सीरीज में किसान और खेती की दशा और दिशा को समझाने की कोशिश की है। ये इस सीरीज का दूसरा भाग है।पार्ट - 1 आजादी के 70 साल से भारत के किसानों का कभी न खत्म होने वाला इंतजार से आगेजहां किसानों को उनके हक़ की आय से...

  • आख़िर कब थमेगा मासूमों से बलात्कार का सिलसिला?

    बच्चियाँ इतनीं छोटी की उन्हें ये तक पता नहीं होता कि उनके साथ आख़िर हो क्या रहा है। जो हो रहा है उसे पूरा हो जाने से पहले ही उनका बदन ठंडा पर जाता होगा। शायद बीच में ही दम तोड़ देती होंगी। आखिर बिसात ही क्या होती है दो साल की बच्ची की या चार साल की बच्ची की। वो सुन्न पर जाती होंगी। दर्द से छोड़ जाती...

  • पारी नेटवर्क का विशेष लेख : 2,000 घंटे के लिए गन्ना कटाई

    पार्थ एम.एन / PARIपांच महीने से अधिक समय तक, स्वास्थ्य जोखिम, कम मजदूरी और अपने बच्चों की शिक्षा के नुकसान के बावजूद उमेश केदार एक हंसिया उठाते हैं, आगे झुकते हैं और गन्ने को जड़ से छीलने लगते हैं। वह तुरंत अगले गन्ने की ओर बढ़ते हैं। फिर दूसरा, और तीसरा। गन्ना काटने में ताकत और बल लगता है, और वह...

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