Read latest updates about "संवाद" - Page 2

  • इस होली मैं सबका मुंह काला कर रहा हूँ

    प्यारे श्री शाहरुख खान जी, हमारा नाम सड़क छाप है और हम एक टुटपुंजिया टाइप निठल्ले राईटर हैं। गाँव शहर भटकते हैं और बेमतलब की बकबक करते हैं। जहाँ बन पड़े किसी ढाबे पे बैठ के इधर की उधर करते हैं। पिछले दिनों हम होली की शौपिंग करने जेब में सौ रुपैय्ये ले कर टहलते हुए मार्किट गए हुए थे कि देखा कि कोई...

  • लोगों के मरने से कुछ नहीं रुकता, सब चलता रहता है

    ये भारत है, यहां पुल गिरते हैं आम लोग मरते हैं। इन लोगों के मरने से कुछ नहीं रुकता, सब चलता रहता है। 14 मार्च को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस रेलवे स्टेशन का एक ओवरब्रिज टूटा। ज़्यादा लोग भी नहीं मरे, केवल 6 लोग और 40 लोग बुरी तरह ज़ख़्मी हुए हैं। ग़ौर करने वाली बात है उनमें से कोई भी ऐसे पद पर...

  • उच्चतम न्यायालय भी नहीं दिला सकेगा जनमत वाली सरकार

    आमचुनाव का शंखनाद हो हो चुका है लेकिन दुनिया के सबसे बडे प्रजातंत्र में परिपक्वता और शालीनता का पूरी तरह अभाव है। जिस तरह प्रधानमंत्री को चोर और आतंकवादियों को सम्मानसूचक शब्दों से अलंकृत करने का चलन चला है वैसा पहले कभी नहीं हुआ। कई लोग मोदी की तुलना इन्दिरा गांधी से करते हैं तो क्या सत्तर के...

  • भारतीय नारी अबला कब और कैसे हो गई ?

    भारत वही देश है जहां देवता रहते थे, क्योंकि यहां नारी की पूजा होती थी। नारी के बिना यज्ञ अधूरा रहता था और भगवान राम को भी यज्ञ करते समय सीता की जगह मूर्ति बिठानी प़ड़ी थी। चाहे सीताराम बोलें या राधेश्याम अथवागौरी शंकर सब जगह नारी का स्थान प्रथम है। इसी देश में गार्गी, अपाला और मैत्रेयी जैसी विदूषी...

  • ये क्या हैप्पी विमेंस डे-फे लगा रखा है?

    ये क्या हैप्पी विमेंस डे-फे लगा रखा है? मर्दों को मनाही है विमेंस डे की बधाई देने की जब तक मेरी कुछ शर्तें न पूरी हो जाएँ जब तक माँ भी पूरे परिवार के साथ खाना न खाए जब तक हिंदुस्तान के सारे पापा और भाई खाने के बाद अपने बर्तन खुद चौके में रखना न सीख जाएँ गुस्सा निकलने का तरीका माँ-बहन की...

  • कश्मीर के लिए लड़ना पड़े तो युद्ध हो निर्णायक

    कश्मीर में सैनिक मर रहे हैं, आतंकवादी ताल ठोंक कर जिम्मेदारी ले रहे हैं लेकिन इमरान खां सबूत मांग रहे हैं । मुम्बई और पठानकोट में सबूत दिए भी गए परन्तु अंजाम क्या हुआ। समाधान केवल युद्ध से नहीं होगा अब निर्णायक युद्ध होना चाहिए। आजादी के बाद चार युद्ध हो चुके हैं, लेकिन वे निर्णायक नहीं हुए।...

  • रिकॉर्ड कृषि उत्पादन का हासिल क्या?

    पिछले कुछ समय से जब भी कृषि विकास का सवाल उठता है, तब कृषि की उन्नति के पक्ष में उत्पादन बढ़ने का तर्क दिया जाता है। बेशक साल दर साल कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ रहा है। सो हर साल रिकॉर्ड टूटना अब आम बात है। अपनी उपलब्धियां गिनाते समय सरकारें अक्सर रिकॉर्ड टूटने का हवाला दिया करती हैं। हाल ही में 5...

  • कांग्रेस ने लम्बे समय तक हिन्दुत्व का लाभ लिया

    साभार: इंटरनेटआरम्भ में कांग्रेस ने बिना उद्घोष किए हिन्दुत्व का रास्ता अपनाया और लाभ उठाया। सोमनाथ मन्दिर का निर्माण, अनेक प्रदेशों में गोवध बन्दी, सरकारी आयोजनों पर हवन पूजन, मुहूर्त देखकर मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण जैसे अनेक कदम उठे। लेकिन जैसे-जैसे संघ परिवार का प्रखर हिन्दुत्व बढ़ता गया, कांग्रेस...

  • कैंसर नियंत्रण में कारगर हो सकते हैं सेब और अमरूद

    सेब एक ऐसा फल है जिसे ब्रिटिशर्स हमारे देश में लेकर आए थे और अमरूद हमारा अपना देसी फल है। इन दोनों फलों की खासियत ये है कि आज विश्व की अनेक अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में इनके कैंसररोधि गुणों पर शोध चल रही है। सेब और अमरूद दोनो फलों को रोगियों के फल कहा जाता है यानी इनमें रोगों को खत्म कर देनी की...

  • अंतरिम बजट विकासोन्मुख है, महंगाई न बढ़ाए

    पीयूष गोयल ने जो अन्तरिम बजट पेश किया, उसका निहितार्थ है, खूब कमाओ और खूब खर्चा करो, जिससे बाजार में खूब पैसा आए और बैंकों में पैसा आए। मध्यम वर्ग और किसान का विशेष ध्यान रखा है। मध्यम वर्ग जो किसी देश समाज की रीढ़ होता है, अनेक वर्षों से उपेक्षित और अप्रसन्न था, किसान की भी नाराजगी भारी पड़ सकती...

  • बजट 2019 : अंतरिम बजट में गाँव और किसानों को क्या मिला

    बजट पेश कर दिया गया, परंपरा यह रही है कि चुनावी साल में सरकारें अंतरिम बजट लाया करती हैं। अंतरिम बजट में भी ज़्यादातर मौजूदा सरकार अगली सरकार आने तक के लिए वोट ऑन अकाउंट पेश करती है। अगर पूरा अंतरिम बजट पेश भी किया जाता है तो परम्परा के अनुसार उसमें भी बड़े नीतिगत फैसले और टैक्स में बदलाव जैसे फैसले...

  • महात्मा गांधी, किसान और आज का भारत

    गांधी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उन चुनिंदा नेताओं में से एक थे जिन्होंने वैचारिक रूप से स्वतंत्रता आंदोलन को एक नया आकार दिया था। महात्मा गांधी ने अहिंसा, सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा, निष्क्रिय प्रतिरोध के अपने अपरंपरागत माध्यमों के ज़रिए से शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य के 200 साल के शासन से भारत को...

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